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कॉमनवेल्थ खेल 2022: कैसा रहा भारत का प्रदर्शन, कौन चमका, कौन चूका?
इंग्लैंड के बर्मिंघम में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स खत्म हो गए हैं. 28 जुलाई को शुरू हुए इन खेलों में 72 देशों ने शिरकत की और 283 स्पर्द्धाओं पांच हज़ार से अधिक खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया.
इस बार के खेलों में 178 मेडल लेकर सबसे ऊपर हैं ऑस्ट्रेलिया है. उसने 67 गोल्ड अपने नाम किए हैं. दूसरे नंबर पर है इंग्लैंड जिसे कुल 176 मेडल मिले हैं जिनमें से 57 गोल्ड हैं.
तीसरे नंबर पर कनाडा है जिसे 92 मेडल मिले हैं. उसने कुल 26 गोल्ड हासिल किए हैं
भारत इस बार मेडल तालिका मे चढ़कर चौथे स्थान पर आ गया है. भारत को कुल 61 मेडल मिले जिनमें 22 गोल्ड, 16 सिल्वर और 23 कांस्य पदक रहे. मेडल रहे. भारत ने कुछ 16 स्पर्द्धाओं में ये प्रदर्शन किया.
भारत ने कब थी पहली बार कॉमनवेल्थ में शिरकत?
पहली बार कॉमनवेल्थ खेलों में साल 1934 में भारत ने शिरकत की थी. उस वक्त इन्हें ब्रिटिश एम्पायर गेम्स कहा जाता था. उस वक्त भारत की तरफ से छह एथलीटों ने इसमें कुल दस स्पर्द्धाओं में हिस्सा लिया था.
कॉमनवेल्थ खेलों में भारत के लिए पहला पहला मेडल राशिद अनवर का था, जिन्होंने 74 किलोग्राम भारवर्ग में फ्रीस्टाइल रेलसिंग में ब्रॉन्ज़ जीता था.
भारत के लिए इन खेलों मे पहला गोल्ड मेडल मिल्खा सिंह ने हासिल किया था. उन्होंने 1958 में कार्डिफ में हुए खेलों में रेसिंग में गोल्ड अपने नाम किया था.
इसी में पहलवान लीला राम ने 100 किलोग्राम भारवर्ग में गोल्ड जीता था.
कॉमनवेल्थ का सबसे कामयाब खिलाड़ी कौन?
लेकिन राघवन चंद्रशेखन के नाम के ज़िक्र के बिना कॉमनवेल्थ खेलों में भारत के प्रदर्शन पर बात करना अधूरा ही है. उन्होंने 1990 में हुए खेलों में तीन गोल्ड मेडल जीते थे. फिर 1994 में विक्टोरिया में तीन सिल्वर जीते थे.
हालांकि कॉमनवेल्थ में सबसे कामयाब खिलाड़ी इन्हें नहीं जसपाल राणा को कहा जाता है जिन्होंने अब तक इन खेलों में 15 मेडल जीते हैं. नौ 9 गोल्ड, चार सिल्वर और 2 ब्रोज़ जीते हैं.
तब से लेकर अब तक भारत कॉमनवेल्थ खेलों में 500 से अधिक मेडल जीत चुका है.
पिछली बार ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में जो खेल हुए थे, उसमें भारत मेडल तालिका भारत तीसरे नंबर पर था. उसे 26 गोल्ड मिले थे जबकि कनाडा जो चौथे नंबर पर था उसे 15 गोल्ड मिले थे.
पिछली बार गोल्ड कोस्ट में हुए खेलों में भारत तो कुल 66 मेडल मिले थे. जिनमें 26 गोल्ड थे, 20 सिल्वर और 20 ब्रॉंज थे. भारत तीसरे पायदान पर रहा था.
वहीं कनाडा को पंद्रह गोल्ड, 40 सिल्वर और 27 कांस्य पदक मिले थे. यानी वो भारत के एक पायदान पीछे यानी चौथे नंबर पर तो था लेकिन कुल मेडल की संख्या को देखा जाए तो उसने भारत से अधिक मेडल जीते थे.
कनाडा ने कुल 82 मेडल जीते थे जबकि भारत ने 67 मेडल जीते थे. कुल मेडल के हिसाब से वो असल में तीसरे नंबर पर था. लेकिन गोल्ड मेडल भारत ने ज़्यादा जीते थे
भारत का कैसा रहा प्रदर्शन ?
इस बार भारत का प्रदर्शन कैसा रहा और पिछले खेलों के मुकाबले प्रदर्शन कैसा था?
बीबीसी संवाददाता रेहान फज़ल कहते हैं कि गोल्ड कोस्ट में भारत ने शूटिंग में 16 पदक जीते थे. लेकिन इस बार कॉमनवेल्थ गेम्स में शूटिंग शामिल नहीं था. तो इस तरह इसे घाटा हुआ. कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का सबसे अच्छा प्रदर्शन 2010 में नई दिल्ली में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में था. उस वक्त भारत ने 38 गोल्ड, 27 सिल्वर और 37 ब्रॉन्ज समेत कुल 102 पदक जीते थे.
भारत के लिए निराशा के क्षण
लेकिन इस बार के कॉमनवेल्थ गेम्स में कई निराशा के क्षण आए. सबसे ज्यादा निराश किया भारतीय हॉकी टीम ने.
ये टीम इंग्लैंड के खिलाफ एक बार चार-एक से आगे थी लेकिन मैच खत्म होते-होते ये चार-चार की बराबरी पर आ गया. भारत को मैच बचाने के लाले पड़ गए.
यही हाल महिला क्रिकेट टीम का रहा जो ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच विकेट पर 139 रन बना चुकी थी लेकिन आखिर के पांच खिलाड़ी सिर्फ 22 रन पर आउट हो गए. और इस तरह यह टीम ऑस्ट्रेलिया के 162 रन के लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाई.
इसी तरह वेट लिफ्टर पूनम यादव ने निराश किया. वह 116 किलो वजन नहीं उठा पाई और प्रतियोगिता से बाहर हो गईं.
सबसे ज्यादा निराश महिला मुक्केबाज लवलीना बोरगोहाईं ने किया. टोक्यो ओलिंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाली लवलीना बोरगोहेन को क्वार्टर फाइनल मुकाबले में वेल्स की मुक्केबाज रोजी इकेल्स ने 3-2 से हरा दिया
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