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ऋषभ पंत में दिग्गजों को दिखी धोनी की झलक, क्या माही को छोड़ सकते हैं पीछे
- Author, विधांशु कुमार
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
इंग्लैंड के खिलाफ़ तीसरे वनडे में जब ऋषभ पंत ने शतक लगाया तो उनकी तारीफ़ों के पुल बांधे जाने लगे और हो भी क्यों ना, उन्होंने भारतीय टीम को मुश्किल परिस्थितियों से निकालते हुए वनडे में अपना पहला शतक लगाया और टीम को जीत दिलाई.
पंत ने इस पारी में ताबड़तोड़ बैटिंग की. दूसरे छोर पर गिरते विकेट की परवाह करे बगैर उन्होंने तेज़ी से रन बनाए. यहां तक कि 'नाइनटीज़' यानी नब्बे रन का आंकड़ा पार करने के बाद भी वो 'नर्वस' नहीं दिखे और डेविड विली की गेंद पर छक्का लगाया.
ऋषभ पंत के करियर की ये छठी सेंचुरी थी. इससे पहले वो टेस्ट मैचों में पांच शतक लगा चुके थे. पंत के शतकों की खासियत ये है कि उन्होंने टीम के लिहाज से 'बहुमूल्य रन' विपरीत हालातों में और विदेशी धरती पर लगाए हैं.
वनडे से ठीक पहले टेस्ट सिरीज़ के आखिरी मैच में भी उन्होंने शतक लगाया था. उनके पांच टेस्ट शतक `सेना देश' यानी साउथ अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूज़ीलैंड और ऑस्ट्रेलिया में आए हैं.
पंत के हालिया प्रदर्शन की जमकर तारीफ हुई. इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन ने उनकी पारी को 'बेहद समझदारी भरा और मनोरंजक' कहा. वहीं इरफ़ान पठान ने इसे किसी भारतीय की 'वनडे की सर्वश्रेष्ठ पारियों में एक' बताया.
24 साल के पंत ने अपने छोटे से करियर में दमखम वाली बैटिंग का प्रदर्शन किया है. उन्होंने 31 टेस्ट मैचों में 43 की औसत से 2123 रन बनाए हैं.
वहीं, वनडे में उन्होंने 27 मैचों में 36.53 की औसत से 840 रन बनाए हैं. टी 20 इंटरनेशनल में उन्होंने 50 मैचों में 22 की औसत से 768 रन बनाए हैं.
वहीं विकेटकीपर के तौर पर पंत ने टेस्ट में 111 कैच पकड़े हैं और 11 बल्लेबाज़ों को स्टंप किया है. वनडे में उन्होंने कुल 25 शिकार बनाए हैं.
धोनी और युवराज की याद
कई पूर्व खिलाड़ियों ने पंत की बैटिंग की तुलना भारत के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की बल्लेबाज़ी से की.
आकाश चोपड़ा को उनकी और माही की बैटिंग में समानता दिखाई दी. महेंद्र सिंह धोनी के करीबी उन्हें माही भी कहते हैं.
उन्होंने कहा, "पंत बाएं हाथ के धोनी के जैसी बल्लेबाज़ी करते हैं."
वहीं, सुनील गावस्कर ने कहा, "पंत और पंड्या धोनी और युवराज की याद दिलाते हैं और इनके जैसे ही सफल क्रिकेटर साबित होंगे."
तो क्या पंत और धोनी की तुलना का वक़्त आ गया है?
जानकारों की राय में पंत की बैटिंग और कीपिंग में कुछ ऐसी खूबियां हैं, जिन्हें निखारकर वो धोनी या गिलक्रिस्ट के बराबर या उनसे भी ज़्यादा सफलता हासिल कर सकते हैं.
मैच फ़िनिश करने की क्षमता
अभी हाल में खत्म हुए इंग्लैंड दौरे पर तीसरे वनडे मैच में इंग्लैंड के स्कोर का पीछा करते हुए भारत ने चार विकेट जल्दी खो दिए. क्रीज़ पर हार्दिक पंड्या और ऋषभ पंत बैटिंग कर रहे थे.
हार्दिक पंड्या ने पंत से कहा, "अगर आप अपना नैचुरल गेम खेलना चाहते हैं तो खेलिए लेकिन पहले मैच तो क्लोज़ कर लें."
यानी पंड्या चाहते थे कि पंत उनके साथ साझेदारी निभाएं. थोड़ा संभल कर खेलें और बाद में जब लक्ष्य क़रीब हो तो बड़े स्ट्रोक्स लगाएं.
ये एक उदाहरण है जो पंत के टैलेंट और उन पर टिकी उम्मीदों को दर्शाता है. इस बात ये भी जाहिर होता है कि फ़ैंस की तरह टीम में भी पंत को लेकर कहीं न कहीं ये डर रहता है कि कहीं वो जल्दबाज़ी ना कर बैठे और ग़ैर जिम्मेदार शॉट खेलते हुए जल्दी आउट न हो जाए.
धोनी और गिलक्रिस्ट के साथ ऐसा नहीं था. दोनों के स्ट्राइक रेट ज़बरदस्त थे और दोनों ही लंबे शॉट लगाने में माहिर थे. लेकिन विपरीत परिस्थितियों में क्रीज़ पर डट कर रहना भी उन्हें खूब आता था.
ख़ासकर धोनी को तो अतुलनीय मैच फ़िनिशर के रूप में याद किया जाता है.
फील्ड में मौजूद गैप में खेलना, विकेट के बीच तेज़ी से दौड़ते हुए एक रन को दो, और दो को तीन में बदल देना, ख़राब गेंद पर जमकर प्रहार करना धोनी की बैटिंग की ख़ासियत थी जिसकी मदद से उन्होंने वनडे में दस हज़ार से ज़्यादा रन बनाए.
उनकी बैटिंग में इतनी परिपक्वता थी कि तेज़ी से रन बनाते हुए भी उन्हें कभी भी बहुत ज्यादा रिस्क लेने की ज़रूरत नहीं पड़ती थी.
यही वो मैच्युरिटी है जिसकी ऋषभ पंत की बैटिंग में भी आशा की जाती है. हालांकि पंत कुछ मैचों में संभल कर खेले हैं लेकिन उनसे लगातार मैच फ़िनिश करने की उम्मीद और धोनी जैसा मैच फ़िनिशर बनने का भरोसा लगाया जा रहा है .
ऋषभ पंत की विकेटकीपिंग में समय के साथ काफ़ी सुधार आया है और इस वक्त वो पेस और स्पिन दोनों तरह की गेंदबाज़ी के दौरान बेहतरीन कीपिंग कर रहे हैं.
महेंद्र सिंह धोनी भी शानदार कीपर थे लेकिन उनकी एक और खासियत थी जो उन्हें दूसरे विकेटकीपरों से अलग बनाती थी. वो कला थी गेंदबाज़ों और फील्ड प्लेसमेंट का शानदार इस्तेमाल करते हुए विकेट गिरा देने की काब़िलियत.
विकेट लेने में सफलता
धोनी बल्लेबाज़ की मानसिकता को किसी मनोवैज्ञानिक की तरह समझते थे.
उन्हें अच्छी तरह पता होता था कि बल्लेबाज़ के मन क्या बात बात चल रही और कहां फ़ील्ड में जगह छोड़नी चाहिए ताकि बैट्समैन लालच में ग़लत शॉट खेल बैठे और आउट हो जाए.
वो विकेट के पीछे से गेंदबाज़ों को सलाह देते रहते थे कि कहां गेंद फेंकी जाए और कैसी बॉलिंग की जाए जिससे तुरंत विकेट मिल सके.
युज़वेंद्र चहल और कुलदीप यादव ने वनडे में अपनी सफलता का श्रेय कई बार धोनी को दिया. पिछले साल एक अखबार को इंटरव्यू में कुलदीप यादव नें कहा कि धोनी के रिटारयमेंट के बाद उन्हें काफ़ी मिस करते हैं.
उन्होंने कहा कि धोनी विकेट के पीछे से अक्सर इशारा करते रहते थे जिससे उन्हें विकेट लेने में सफलता मिलती थी. कई बार तो वाइड गेंद डालकर भी बैट्समैन को स्टंप आउट करवा लेते थे धोनी.
टैलेंट का भंडार
पंत भी विकेट के पीछे काफी वाचाल हैं और गेंदबाज़ों का हौसला बढ़ाते रहते हैं लेकिन धोनी की 'सिक्सथ सेंस' शायद ही किसी को मिलती है.
इसमें कोई शक नहीं की पंत के पास टैलेंट का भंडार है लेकिन धोनी से तुलना करने का समय शायद अभी नहीं आया है.
अगर पंत अपनी प्रतिभा का एक हिस्सा भी रिटायरमेंट तक पूरा करते हैं तो ज़रूर ही आंकड़ों में अपने 'मेंटॉर' धोनी औऱ गिलक्रिस्ट से भी आगे निकल सकते हैं.
ऐसा हुआ तो शायद सबसे ज्यादा खुशी खुद धोनी को ही हो कि 'चलो, चेला तो चीनी हो गया.'
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