INDvsENG - ऋषभ पंत के कमाल करने से पहले जब कोहली ने उन्हें मारे ताने

    • Author, विमल कुमार
    • पदनाम, बर्मिंघम से, बीबीसी हिंदी के लिए

बर्मिंघम टेस्ट शुरू होने से दो दिन पहले जब टीम इंडिया एजबेस्टन के मैदान में अभ्यास के लिए आई तो ऋषभ पंत को हर दिन पूर्व कप्तान विराट कोहली से ताने मिल रहे थे.

मज़ाक में ही सही, अभ्यास के दौरान जब जब पंत थोड़ी सी चूक दिखाते तो कोहली कहते कि 'अरे कहां है भाई, क्या हो गया है.' पंत जवाब में कुछ कहते नहीं बस मुस्करा देते और कहते, 'अरे भइया..'

पंत के शब्दों और उनके रवैये में अपने सीनियर के लिए सम्मान और भरपूर सम्मान की भावना है. कोहली ना सिर्फ़ दिग्गज बल्लेबाज़ हैं बल्कि पूर्व कप्तान और पंत के ही शहर दिल्ली से आते हैं और उनके हीरो रहे हैं. लेकिन, ये सम्मान पंत सिर्फ़ अपने टीम के खिलाड़ियों के दिग्गज के लिए रखते हैं.

अगर दिग्गज चाहे कोई भी हो, अगर वो विरोधी टीम में हो तो पंत उनको टारगेट करते हैं. यही काम उन्होंने एजबेस्टन टेस्ट के पहले दिन जेम्स एंडरसन के साथ किया.

अब खुद सोचिए, कि एंडरसन ना सिर्फ़ इंग्लैंड के महानतम गेंदबाज़ हैं बल्कि टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में मुथैया मुरलीधरन और शेन वार्न ने ही उनसे ज़्यादा विकेट झटके हैं. तेज़ गेंदबाज़ों में तो ग्लेन मैक्ग्रा ने भी 600 विकेट का आंकड़ा नहीं छुआ था और वो दिग्गज जब पहले दिन के खेल में भारत के टॉप ऑर्डर को फिर से परास्त कर चुका था, पिच पर एंट्री होती है पंत की.

पंत का पलटवार

64 रन पर तीन विकेट गंवाने वाली टीम इंडिया दबाव में थी लेकिन पंत को इन सब बातों की कहां परवाह थी. उन्होंने तो एंडरसन को उस अंदाज़ में खेलना शुरू किया जैसे कि दिल्ली के उनके सोनेट क्लब का कोई युवा गेंदबाज़ सामने हो.

एंडरसन को इंग्लैंड में और वो भी एजबेस्ट में रिवर्स स्वीप और स्कूप शॉट्स लगते देखते हुए प्रेस बॉक्स में बैठे सारे अंग्रेज़ पत्रकारों को ऐसा अंचभा लगा कि उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा था कि आखिर ये हो क्या रहा है. लेकिन, इसमें कुछ भी नया तो नहीं था. पंत तो एंडरसन के खिलाफ़ ऐसा मज़ाक अहमदाबाद टेस्ट में कर चुके थे.

लेकिन, बात सिर्फ़ एंडरसन की नहीं है. जब भी टीम इंडिया संकट में रहती है तो पंत के तेवर बिल्कुल बदल जाते हैं. इसकी शुरुआत उनके टेस्ट करियर में इंग्लैंड के ही मैदान ओवल से हुई. 2018 में भारत ने महज़ 121 रन पर 5 विकेट खो दिये थे और पंत ने 114 रनों की हैरतअंगेज पारी खेल दी.

अहमदाबाद में पिछले साल जब टीम इंडिया के 4 विकेट 80 रन पर गिर गये तो पंत ने 101 रन ठोक डाले. इस साल के शुरुआत में साउथ अफ्रीका में टीम इंडिया के 58 पर 4 विकेट जा चुके थे तो पंत ने नाबाद 100 रन जड़ डाले.

बर्मिंघम में 146 रनों की पारी को विदेशी ज़मीन पर किसी भी भारतीय बल्लेबाज़ द्वारा खेली गयी उम्दा 25 पारियों में से एक में गिना जायेगा. अगर टीम इंडिया ये मैच और सीरीज़ जीतती है तो शायद इस पारी की बदौलत रैंकिंग और बेहतर होते हुए टॉप 10 में आ जाए. सबसे दिलचस्प बात ये रही कि पंत ने अपना शतक 89 गेंदों में पूरा किया जिसमें 50 गेंद डॉट बॉल थीं. जिस पर कोई रन नहीं बने. अगर दूसरे नज़रिए से देखा जाए तो पंत ने महज़ 39 गेंदों पर ही शतक जमा दिया.

जडेजा का जलवा

लेकिन, एजबेस्टन का पहला दिन सिर्फ़ पंत और पंत के नाम नहीं रहा.

पंत का साथ देने के लिए दूसरे छोर पर रवींद्र जडेजा एक बेहद अनुभवी और सुलझे हुए बल्लेबाज़ और सीनियर खिलाड़ी की भूमिका निभा रहे थे.

लेकिन, जडेजा का ये नया रूप नहीं है. पिछले तीन साल से उनकी बल्लेबाज़ी में परिपक्वता दिख रही है. ये अब वो जडेजा नहीं जो 30-40 रन की ताबड़तोड़ पारी खेलकर संतुष्ट हो जाया करते थे. जडेजा को हाल के सालों में टेस्ट क्रिकेट का नंबर 1 ऑलराउंडर की तरह खेलने की आदत हो गयी है और इसलिए वो उसी साख को ध्यान में रखते हुए बल्लेबाज़ी करते दिख रहे हैं.

वैसे निजी तौर पर जडेजा को इस पारी की सख़्त ज़रुरत थी. पिछले कुछ महीने जडेजा के लिए बहुत अच्छे नहीं रहे हैं. चेन्नई सुपर किंग्स में कप्तानी को लेकर जिस तरह का सुलूक उनके साथ हुआ, उन्हें तकलीफ हुई. जडेजा ने आईपीएल से ठीक पहले श्रीलंका के ख़िलाफ़ नॉट-आउट 175 रन की पारी खेली थी तब भी कई जानकारों ने उनकी उपलब्धि को हल्का करने की कोशिश की थी.

कहा ये गया कि ये तो श्रीलंका के मामूली आक्रमण के ख़िलाफ़ था. जब तक बाहर रन नहीं बनाते हैं तो क्या बात. जडेजा शायद वैसे ही आलोचकों को जवाब देने की कोशिश कर रहे हैं.

अगर शनिवार को पहले घंटे के भीतर राजकोट का ये खिलाड़ी शतक बनाता है तो उस पारी की अहमियत पंत के शतक से किसी तरह से कम नहीं होगी. निजी तौर पर विदेशी ज़मीन पर ख़ासकर एक बेहद नाज़ुक हालात से संभालते हुए अपनी टीम को दबदबे वाले हालत में ले जाने के लिए जडेजा की इस पारी को लंबे समय तक याद रखा जायेगा. इस बात से फ़र्क नहीं पड़ता है कि वो शतक पूरा कर पाते हैं या नहीं.

जडेजा और पंत के बीच छठे विकेट के लिए रिकॉर्ड 222 रनों की साझेदारी हुई.

याद रहेगी ये पारी

इससे पहले भारतीय क्रिकेट में छठे विकेट के लिए किसी साझेदारी की याद आती थी तो वो 1996 के केपटाउन टेस्ट में मोहम्मद अज़हरुद्दीन और सचिन तेंदुलकर की साझेदारी का था.

एक सत्र में असाधारण आक्रामक बल्लेबाज़ी की मिसाल उससे पहले भारतीय क्रिकेट में नहीं देखी गयी थी, विदेशी ज़मीं पर. जब आधी टीम 100 रन से पहले पवेलियन लौट चुकी थी. लेकिन, इंग्लैंड की सरज़मीं पर पंत-जडेजा की शानदार साझेदारी को देखते हुए अज़हर-सचिन को अपना ज़माना याद आ रहा होगा लेकिन वो ये सोच रहे होंगे कि उनकी साझेदारी तो भारत को जीत नहीं दिला पायी थी लेकिन इस साझेदारी ने ना सिर्फ पहले दिन ही हार की संभावना को टाल दिया बल्कि एक संभावित जीत की उम्मीद का आधार दिया है.

इंग्लैंड की तरफ से प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व बल्लेबाज़ और बल्लेबाज़ी कोच पॉल कॉलिंगवुड आये. उन्होंने पंत की पारी के बारे में कहा कि ये बेज़बॉल (कोच ब्रैंडन मैक्कलम की आक्रामक दर्शन का दूसरा नाम) तरह की पारी थी. पंत ने शायद ये बात सुनी नहीं वरना वो ये कहते कि उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में एंट्री लेने के साथ ही इसी तेवर से क्रिकेट खेला है.

पंत के बारे में प्रेस बॉक्स में इंग्लैंड के एक वरिष्ठ पत्रकार ने टिप्पणी की अजीब सी बात है कि पंत टेस्ट क्रिकेट में वन-डे और टी20 वाली रफ्तार और नज़रिये से बल्लेबाज़ी करते हैं जबकि टी20 में टेस्ट और वन-डे वाला तरीका क्यों अपनाते हैं? ये सोचने वाली बात तो है लेकिन शुक्रवार का दिन उन बातों में उलझने का नहीं बल्कि क्रिकेट के एक जीनियस की बेहद उम्दा पारी के जश्न मनाने का है.

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