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चंद्रकांत पंडित: जानिए घरेलू क्रिकेट के सबसे कामयाब क्रिकेट कोच को
- Author, आदेश कुमार गुप्त
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
पूरा नाम- चंद्रकांत सीताराम पंडित
उम्र- 60 साल
भारत के पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज़. लेकिन क्रिकेटर के तौर पर नहीं बल्कि कोच के तौर पर आज हर तरफ़ इनके नाम की गूंज है.
उन्होंने अपनी कोचिंग में उस मध्य प्रदेश को पहली बार 'रणजी ट्रॉफ़ी' का चैंपियन बनाकर ही दम लिया है, जिसे बतौर कप्तान 23 साल पहले यानी 1999 में वह नहीं कर सके थे. हालांकि तब भी टीम को उन्होंने फ़ाइनल तक पहुंचाया ही था.
इसे इत्तेफ़ाक़ ही कहा जा सकता है कि वह फ़ाइनल भी उसी चिन्नास्वामी स्टेडियम बंगलुरू में खेला गया था जहां इस बार का रणजी ट्रॉफ़ी फ़ाइनल खेला गया.
हालांकि 23 साल बाद फ़र्क़ इतना था कि तब चंद्रकांत पंडित की कप्तानी में खेलने वाली मध्य प्रदेश फ़ाइनल में कर्नाटक से हार गई थी, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ.
मध्य प्रदेश ने पहली बार कप्तानी कर रहे आदित्य श्रीवास्तव की अगुवाई में 41 बार की चैंपियन मुंबई को छह विकेट से हराकर रणजी ट्रॉफ़ी जीत लिया.
जो ट्रॉफ़ी कप्तान चंद्रकांत पंडित के हाथों से फिसल गई थी उसे कोच के तौर पर पंडित ने भीगी पलकों के साथ थामा. यही वजह है कि फ़ाइनल जीतने के बाद उन्होंने कहा, "हर ट्रॉफ़ी संतुष्टि देती है पर यह विशेष है. इतने वर्षों तक हमेशा महसूस हुआ कि मेरा कुछ छूट गया है, इसलिए ज़्यादा ही भावुक हूं."
23 साल की उनकी टीस का अंत आख़िरकार सुखांत हुआ. वैसे चंद्रकांत पंडित की कोच के रूप में यह कामयाबी कोई नई नहीं है. एक कोच के रूप में यह उनका छठा रणजी ट्रॉफ़ी ख़िताब है.
कमाल की बात तो यह है कि वह तीन बार मुंबई और दो बार विदर्भ को भी रणजी ट्रॉफ़ी चैंपियन बना चुके हैं. उनकी कोचिंग में विदर्भ लगातार दो बार साल 2018 और 2019 में चैंपियन बनी थी.
मध्य प्रदेश के कप्तान आदित्य श्रीवास्तव ने भी ख़िताबी जीत का श्रेय कोच चंद्रकांत पंडित को दिया और कहा कि उनसे ही उन्हें नेतृत्व करने के बारे में पता चला.
खेल चुके हैं विश्व कप
चंद्रकांत पंडित भारत के पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज़ रहे हैं. वह साल 1987 के विश्व कप के सेमीफ़ाइनल में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ खेले थे.
वह मुक़ाबला मुंबई में खेला गया था जहां वह दिलीप वेंगसरकर की जगह टीम में शामिल हुए और 24 रनों की पारी खेली. भारत उस सेमीफ़ाइनल में हार गया था.
इसके अलावा चंद्रकांत पंडित ने पांच टेस्ट मैच और 36 एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच खेले.
आख़िर चंद्रकांत पंडित की कोचिंग में ऐसा क्या ख़ास है जिसने उन्हें भारत के घरेलू क्रिकेट का सबसे कामयाब कोच बना दिया है? उनकी कोचिंग के बारे में क्रिकेट समीक्षक विजय लोकपल्ली कहते हैं कि एक कोच के रूप में मध्य प्रदेश को रणजी ट्रॉफ़ी का चैंपियन बनाना उनकी बहुत बड़ी उपलब्धि है.
वो कहते हैं, "कभी मुंबई ने उन्हें ठुकराया तो उन्होंने विदर्भ को चैंपियन बनवा दिया. अब मध्य प्रदेश जो कभी यह ट्रॉफ़ी जीती ही नहीं थी उसे चैंपियन बना दिया. मध्य प्रदेश का क्रिकेट इतिहास बहुत बेहतरीन रहा है. लेकिन यह चंद्रकांत पंडित का ही उद्देश्य था कि वह नए चैंपियन खिलाड़ी तैयार करें, हर खिलाड़ी को दिमाग़ी तौर पर मज़बूत बनाएं. यह सब चंद्रकांत पंडित को अच्छी तरह से आता है. उन्होंने मुंबई के मैदानों पर भी यही काम किया है."
विजय लोकपल्ली यह भी बताते हैं, "चंद्रकांत पंडित खिलाड़ियों से क्रिकेट की बातें करते रहते हैं. क़िस्से सुनाते हैं, क़िस्सों से उदाहरण देकर समझाते हैं. क्रिकेट को लेकर उनके पास जो समझ है, या वह जिस तरह परिस्थियां के अनुसार क्रिकेट को भांपते है वह कमाल की है. वह बेहद साधारण और व्यवहारिक हैं. उन्होंने कभी भी बहुत बड़े-बड़े दावे नहीं किए."
विजय लोकपल्ली यह भी कहते हैं, "आज उनसे बेहतर कोई कोच ही नहीं है. वह बिना लैपटॉप के सारे समय क्रिकेट की बातें करते रहते हैं. उन्हें 'क्रिकेट का कीड़ा' कहा जा सकता है. मैं तो उन्हें उनके खेलने के ज़माने से जानता हूं. इतनी सारी उपलब्धि के बावजूद उनमें कोई गर्व का भाव नहीं है. वह बस अपना काम करते हैं और वह बहुत बेहतरीन इंसान हैं."
टीम को चैंपियन टीम में बदलना
चंद्रकांत पंडित को लेकर ही भारत के पूर्व ऑलराउंडर और कोच रहे मदन लाल कहते हैं, "उनका मध्य प्रदेश को चैंपियन बनाना बहुत बड़ी बात है क्योंकि रणजी ट्रॉफ़ी का सीज़न बहुत लम्बा होता है. इससे कभी-कभी प्रदर्शन में गिरावट भी आ जाती है. सबसे बड़ी बात कि ऐसी जीत से टैलेंट भी उभरकर सामने आता है. खिलाड़ियों में खुद पर भरोसा जागता है कि वह भी रणजी ट्रॉफ़ी जीत सकते हैं. वैसे भी रणजी ट्रॉफ़ी भारत के इतिहास में सबसे बड़ा घरेलू टूर्नामेंट है. इसमें सैकड़ों खिलाड़ी खेलते हैं."
मदन लाल ने मध्य प्रदेश के खिलाड़ियों और कोच चंद्रकांत पंडित को विशेष बधाई भी दी. वो कहते हैं, "वैसे तो यह टीम वर्क है जिसमें चंद्रकांत पंडित पूरे फ़िट बैठते हैं. कोच की रणनीति को मैदान में खिलाड़ी ही कामयाब बनाते हैं. चंद्रकांत पंडित ने दिखा दिया है कि कैसे खिलाड़ियों से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कराया जा सकता है."
विजय लोकपल्ली यह भी बताते हैं कि चंद्रकांत पंडित को इस जीत से बड़ी राहत भी मिली होगी, हालांकि उनके मन में किसी से बदला लेने की भावना नहीं है.
वह बताते हैं, "इसी मैदान में कभी हारे थे अब इसी मैदान में जीते हैं. उन्हें थोड़ा भावनात्मक लगाव था कि एक कोच के रूप में मैं यहां जीत हासिल करूं, लेकिन वह पूरा श्रेय खिलाड़ियों को देते रहे हैं. कहीं भी उन्हें इसका श्रेय नहीं लिया और ना ही लेंगे. वह कभी कभी ग़ुस्सा भी करते हैं लेकिन सबको मालूम है कि वह खिलाड़ियों से स्नेह भी रखते हैं."
विजय लोकपल्ली के मुताबिक़ बीसीसीआई भारतीय क्रिकेट में उनके लिए कोई बड़ी भूमिका देख सकती है. वे कहते हैं, "सब बड़े नाम भारत का कोच बने हैं जैसे रवि शास्त्री, अनिल कुंबले और राहुल द्रविड़, सब अपनी जगह हैं, लेकिन जो काम ज़मीनी स्तर पर जाकर चंद्रकांत पंडित ने किया है वह इनमें से किसी ने नहीं किया."
कोचिंग का नया अंदाज़
चंद्रकांत पंडित की कोचिंग के बारे में कहा जाता है कि वह खिलाड़ियों को रात को डेढ़ बजे जगाकर मैदान में ले जाते हैं और दूधिया रोशनी (फ्लड लाईट) में सुबह पांच बजे तक कड़ा अभ्यास कराते रहे हैं. ऐसे अभ्यास की बदौलत टीम में यश दुबे, शुभम शर्मा, रजत पाटीदार और गौरव यादव जैसे क्रिकेटर मिले हैं.
वैसे क्रिकेटर के तौर पर चंद्रकांत पंडित में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए खेलने के अलाव घरेलू क्रिकेट में 138 प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 48.57 की औसत से 8209 रन बनाए जिनमें 22 शतक और 42 अर्धशतक शामिल हैं. उन्होंने विकेट के पीछे 281 कैच और 41 स्टंप भी किए.
लेकिन पिछले कुछ सालों में अपनी क्रिकेट कोचिंग क्षमता के दम पर चंद्रकांत पंडित ने रणजी ट्राफ़ी में जो कुछ कर दिखाया है उसे लेकर अब क्रिकेट समीक्षक दबी ज़बान में यह भी कह रहे हैं कि ऐसा कारनामा कोई दूसरा खिलाड़ी करके तो दिखाए.
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