हार्दिक पंड्या आयरलैंड के ख़िलाफ़ शुरू करेंगे अपनी कप्तानी पारी, टी20 विश्व कप की टीम क्या होगी?

    • Author, विमल कुमार
    • पदनाम, बीबसी हिंदी के लिए

रविवार से आयरलैंड के ख़िलाफ़ 2 मैचों की टी-20 सीरीज़ से एक नये अध्याय की शुरुआत हो रही है. हार्दिक पंड्या अब टीम इंडिया के लिए खेल के सबसे छोटे फॉर्मेट में नये कप्तान हैं.

मुमकिन है कि पंड्या अगले महीने इंग्लैंड के ख़िलाफ़ होने वाली 3 मैचों की टी20 सीरीज़ में भी कप्तान रहें. कोच राहुल द्रविड़ जिनका क्रिकेट दर्शन स्थिरता और निरंतरता के सिद्धांत पर चलता है, उन्हें हेड कोच के तौर पर पहले 6 महीनों में 5 कप्तानों से रूबरू होना पड़ा है!

इतना ही नहीं अहम खिलाड़ियों की फॉर्म, फिटनेस और थकान जैसे कारणों के चलते उन्हें दो दर्जन से भी ज़्यादा खिलाड़ियों के साथ सामंजस्य बनाना पड़ा है. बावजूद इसके टी20 वर्ल्ड कप के लिए एकदम पक्के 15 खिलाड़ी कौन होंगे, ये फिलहाल पता नहीं है.

लेकिन, इस स्थिति के लिए कोच द्रविड़ या पूरी तरह से चयनकर्ता भी ज़िम्मेदार नहीं हैं. पिछले साल यूएई में टी20 वर्ल्ड कप के बाद भारत को जिस तरह से करारी हार मिली उसके बाद तुरंत विराट कोहली जैसे कप्तान को अपनी कुर्सी खाली करनी पड़ी.

2021 वर्ल्ड कप में लेग स्पिनर के तौर पर युज़वेंद्र चहल उस टीम में नहीं थे और राहुल चाहर उनकी जगह खेल रहे थे. लेकिन, 6 महीने बाद चाहर का कोई अता-पता नहीं है और अब उनके विकल्प के तौर पर लेग स्पिनर रवि बिश्नोई देखे जा रहे हैं.

लेकिन, चहल ने पहले आईपीएल और फिर साउथ अफ्रीका के ख़िलाफ़ हालिया सीरीज़ में धाकड़ खेल दिखाकर ये साबित कर दिया कि वो ना सिर्फ अब टीम इंडिया के नंबर 1 लेग स्पिनर हैं बल्कि प्लेइंग इलेवन में अगर सिर्फ एक स्पिनर को ही जगह मिलने की गुंजाइश होती है तो वो नाम सिर्फ उनका ही होगा.

दूसरा स्पिनर कौन होगा?

टीम में दूसरे स्पिनर के तौर पर मुक़ाबला अब काफी कड़ा हो चला है. ऑलराउंडर रविंद्र जडेजा अब भी इस रेस में सबसे आगे हैं लेकिन चेन्नई सुपर किंग्स के लिए आईपीएल में जो कुछ जडेजा के साथ हुआ और जिस तरह से वो खेले, उस लिहाज़ से उनको लेकर कुछ संदेह टीम मैनेजमेंट के दिमाग में आ सकते हैं.

वैसे, अक्षर पटेल को लगातार जडेजा के बैक-अप के तौर पर तैयार रखा जा रहा है और इसलिए वो आयरलैंड में भी हैं और साउथ अफ्रीका के ख़िलाफ़ हर मैच में खेले भी. वैसे, बायें हाथ के स्पिनर के तौर पर विकल्प के तौर पर इस सूची में कुलदीप यादव ने भी अपना दावा ठोंका है लेकिन वो आयरलैंड में नहीं हैं. फिलहाल, कुलदीप के लिए वर्ल्ड कप के लिए अपने चयन का दावा मज़बूत करना मुश्किल दिख रहा है.

बहरहाल, दिनेश कार्तिक और पंड्या की रफ्तार और फॉर्म ने ये दिखाया है कि अगर इरादे मज़बूत हों तो कोई भी खिलाड़ी कभी भी अपनी वापसी की राह चमत्कारिक ढंग से तय कर सकता है. कार्तिक ने पहले आईपीएल और उसके बाद साउथ अफ्रीका के ख़िलाफ़ सीरीज़ में ज़बरदस्त खेल दिखाया है और ऐसा लगता है कि तुलानत्मक तौर पर कमज़ोर दिख रही आयरलैंड के ख़िलाफ़ उन्हें बहुत कुछ करने का मौका नहीं मिले.

लेकिन, कार्तिक के लिए असली चुनौती जुलाई महीने में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ होने वाले टी20 मैचों की होगी जहां पर अगर वो नाज़ुक हालात में मैच जिताने वाली पारियां खेलतें हैं तो उनका ऑस्ट्रेलिया के लिए टिकट पक्का हो जायेगा. क्योंकि तमाम उपलब्धियों के बावजूद कार्तिक के करियर में कमी सिर्फ इस बात की रही है कि वो मुश्किल हालात में विदेशी पिचों पर उम्मीद के मुताबिक निरंतरता नहीं दिखा पाए हैं. लेकिन, अपने करियर के आखिरी पड़ाव से गुज़र रहे कार्तिक शायद एक स्वर्णिम अध्याय के साथ अपना अंत कर पायें.

ऑलराउंडर कौन-कौन होगा?

पंड्या के तौर पर भारत के लिए ऑलराउंडर की समस्या ख़त्म होती दिख रही है लेकिन वर्ल्ड कप से पहले करीब 4 महीने की क्रिकेट अब भी बची हुई है और अगर उन्हें फिर से फिटनेस की समस्या होती है तब क्या? इसी सवाल को ध्यान में रखते हुए चयनकर्ताओं ने वेंकटेश अय्यर को फिर से टीम में बनाये रखा है.

इतना ही नहीं, दीपक हुडा को भी टीम में रखकर चयनकर्ताओं ने ये कहने को कोशिश की है अगर ज़रूरत पड़ी तो आर अश्विन जैसे एक विशुद्ध ऑफ स्पिनर की बजाए वो हुडा जैसे पार्ट-टाइम स्पिनर की तरफ रुख़ करेंगे जो पहले 6 में बल्लेबाज़ी भी कर सकता हो. शायद, अश्विन भी चयनकर्ताओं को मूड को भांप चुके थे और इसलिए आईपीएल में वो राजस्थान रॉयल्स के लिए कई मौक़ों पर अपर ऑर्डर में बल्लेबाज़ी के लिए आ रहे थे और कुछ शानदार पारियां भी खेलीं.

इंग्लैंड के खिलाफ़ ना सिर्फ अश्विन बल्कि रोहित शर्मा, विराट कोहली, जसप्रीत बुमराह, जडेजा जैसे सीनियर खिलाड़ियों का खेलना मुश्किल दिख रहा है क्योंकि 1 जुलाई से 5 जुलाई तक ये खिलाड़ी बर्मिंघम टेस्ट में शिरकत करेंगे और टी 20 सीरीज़ 7 जुलाई से शुरू हो जायेगी. मुमकिन यही लगता है कि ऋषभ पंत, शार्दुल ठाकुर, मोहम्मद शमी और श्रेय्यस अय्यर भी इंग्लैंड के खिलाफ भी टी20 मैचों में नहीं खेलेंगे.

इसलिए संजू सैमसन और सूर्यकुमार यादव जैसे बल्लेबाज़ों के लिए आयरलैंड के ख़िलाफ 2 मैच काफी अहम साबित होंगे. कोच द्रविड़ की जो सोच रही है उसके मुताबिक इन दोनों बल्लेबाज़ों को इंग्लैंड के खिलाफ़ भी 3 मैचों में मौक़ा मिलेगा भले ही वो कामयाब रहें या नाकाम. इसकी वजह ये है कि अब टी20 वर्ल्ड कप की टीम को फाइनल करने के लिए बहुत ज़्यादा वक़्त नहीं बचा है.

द्रविड़ ने साउथ अफ्रीका के ख़िलाफ़ घरेलू सीरीज़ में उन्हीं 11 खिलाड़ी को हर मैच में खिलाया जो पहले मैच में खेले थे. टीम 0-2 से सीरीज़ में पीछे भी हुई थी लेकिन कोच परेशान नहीं हुए और युवा और अनुभवी खिलाड़ियों के मिश्रण पर भरोसा बनाये रखा और अच्छी बात रही कि द्रविड़ सही भी साबित हुए.

बुमराह और भुवनेश्वर पर बड़ी ज़िम्मेदारी

साउथ अफ्रीका के ख़िलाफ़ भुवनेश्वर कुमार ने मैन ऑफ द सीरीज़ का ख़िताब हासिल करके दिखा दिया कि बुमराह और उनकी जोड़ी ही नई गेंद और डेथ ओवर्स में ज़िम्मेदारी उठायेगी.

भुवनेश्वर के साथ-साथ हर्षल पटेल ने अपने लाजवाब खेल से साबित कर दिया कि तीसरे तेज़ गेंदबाज़ के तौर पर प्लेइंग इलेवन में उनके स्थान को फिलहाल कोई चुनौती नहीं दे सकता है. और यही वजह है कि आईपीएल के दो शानदार युवा गेंदबाज़ उमरान मलिक और अर्शदीप सिंह को साउथ अफ्रीका के ख़िलाफ़ मौक़े नहीं मिले.

लेकिन, अगर फिटनेस या फॉर्म की वजह से किसी सीनियर खिलाड़ी को अगले कुछ महीनों में किसी तरह की परेशानी होती है तो ये दोनों युवा ऊर्जावान खिलाड़ियों के तौर पर अंतिम 15 का हिस्सा हो सकते हैं. लेकिन, अर्शदीप और मलिक दोनों को पता है कि अगर उन्हें किसी भी तरह से वर्ल्ड कप के लिए दावा ठोंकना है तो पहले उन्हें आवेश ख़ान से खुद को बेहतर दिखाना होगा जो इन दोनों के साथ आयरलैंड में हैं.

आवेश ने पिछले दो आईपीएल में शानदार खेल दिखाया है और विदेशी ज़मीं पर 1-2 अच्छी सीरीज़ उनके दावे को और पक्का कर देगी.

चलते-चलते आखिर में एक बात और कि राहुल त्रिपाठी भी इस टीम में ओपनर के तौर पर हैं जिन्होंने आईपीएल में बेहतरीन खेल से खूब वाहावाही लूटी थी. लेकिन, साथी ओपनर ऋतुराज गायकवाड़ अब तक मिले मौके पर वो छाप अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में नहीं छोड़ पाये हैं. जिसके चलते हमेशा ये सवाल उठते रहे हैं कि आईपीएल और इंटरनेशनल में काफी फासला होता है. और हो सकता है कि आयरलैंड के लिए राहुल तेवातिया का ना होने की वजह के पीछे चयनकर्ताओं का यही तर्क रहा हो.

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