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मोहम्मद सिराज का आख़िरी ओवर और वेस्ट इंडीज़ पर भारत की तीन रन से जीत
- Author, विमल कुमार
- पदनाम, बीबीसी के लिए पोर्ट ऑफ स्पेन से
वनडे मैच- वेस्ट इंडीज़ बनाम भारत
स्टेडियम- क्वीन्स पार्क ओवल, पोर्ट ऑफ स्पेन
भारत- 308 (शिखर धवन- 97 रन, शुभमन गिल- 64 रन, श्रेयस अय्यर- 54 रन)
वेस्ट इंडीज़- 305 (कायल मेयर्स- 75 रन, शमरा ब्रुक्स- 46 रन, ब्रैंडन किंग- 54 रन)
भारत ने मैच आख़िरी ओवर में महज़ तीन रन से जीता
नतीजे के लिहाज से पोर्ट ऑफ स्पेन मैच रोमांचक रहा. वेस्ट इंडीज़ के दर्शक 49 ओवर तक अपनी जीत को लेकर आश्वस्त थे. वे तालियां बजा रहे थे कि उनकी टीम उम्मीद के परे जुझारुपन का परिचय देते हुए अचानक से एक संभावित जीत के बेहद क़रीब आ गई.
लेकिन, आख़िरी ओवर की आख़िरी गेंद पर मेज़बान चूक गए. वो भारत के ऐसे तेज़ गेंदबाज़ के सामने पस्त हुए जिसके पास ना तो वन-डे क्रिकेट का बहुत ज़्यादा अनुभव है और ना ही उनके डेथ ओवर्स में कोई भरोसेमंद गेंदबाज़ मानता था.
अपने आख़िरी ओवर में मोहम्मद सिराज ने जिस तरह से अपनी सूझ-बूझ का परिचय देते हुए मैच को जिताया, उसे बेशक मैच का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट कहा जा सकता है.
अपने आख़िरी ओवर में सिराज के पास टीम इंडिया को बचाने के लिए सिर्फ़ 15 रन थे. उससे पहले दो अवर में सिराज ने 7 और 11 रन दिए थे. आईपीएल में उनकी धुनाई के अभ्यस्त हो चुके जानकारों ने अपना सिर पकड़ लिया था कि अब मैच तो निकल गया.
लेकिन, फिर सिराज ने जो काम किया उससे ना सिर्फ़ गेंदबाज़ी कोच पारस महाम्ब्रे को बहुत तसल्ली मिली होगी कि बल्कि शिखर धवन ने भी राहत की सांस ली.
आख़िरी गेंद और सिराज की यॉर्कर
आख़िरी ओवर की पहली दो गेंद पर 0 और 1 के बाद तीसरी गेंद पर जब सिराज को चौका लगा तो ऐसा लगा कि वो दबाव में बिखर जाएंगे. फिर मामला पहुँचा आख़िरी गेंद में पाँच रन का. कई लोगों को जावेद मियांदाद की याद आने लगी होगी तो नई पीढ़ी के खेल प्रेमियों को महेंद्र सिंह धोनी की.
लेकिन, सिराज ने यहाँ पर यॉर्कर डालने का साहस दिखाया और जीत हासिल की. ये वही यॉर्कर है, जिसने वसीम अकरम और वक़ार यूनिस को वन-डे क्रिकेट का बेताज बादशाह बनाया था. क्या सिराज उसी नक्शे क़दम पर चल सकते हैं? फ़िलहाल तो ये जल्दबाज़ी होगी लेकिन हाँ वन-डे क्रिकेट में सिराज ने पहली बार बेहतरीन भविष्य की उम्मीद जगाई है.
ओपनर्स ने पक्की की जमीन
लेकिन, मैच जिताने का आधार रखा टीम इंडिया के ओपनर्स ने. अगर पहले पाँच ओवर में शिखर धवन और शुभमन गिल की जोड़ी ने 38 रन जोड़े तो इसी दौरान लक्ष्य का पीछा करते हुए कैरेबियाई टीम ने एक विकेट के नुक़सान पर महज़ 16 रन बनाए थे.
10 ओर में भारत के 73 रन बिना किसी नुक़सान के वेस्ट इंडीज़ ने जवाब में 52 ही बनाए. 15 ओवर में भारत 103 तो अब भी वेस्टइंडीज़ पीछे था और उनका स्कोर था 88. सिर्फ़ 47वाँ ओवर ऐसा रहा कि लक्ष्य के पीछा करने के दौरान वेस्टइंडीज़ का तुलनात्मक स्कोर में भारत से सिर्फ़ एक रन पीछे था.
तमाम आक्रामकता के बावजूद निकोलस पूरन की टीम एक ओवर भी भारत से आगे नहीं रही. इसका श्रेय जाता है, मिड्ल ओवर्स में सधी हुई गेंदबाज़ी करने के लिए युजवेंद्र चाहल को.
रविंद्र जाडेजा के अनफिट होने के चलते गेंदबाज़ी आक्रमण और अनुभवहीन हो गया क्योंकि तेज़ गेंदबाज़ों के पास कुल मिलाकर अनुभव 40 वन-डे से भी कम का था.
चाहल ने ख़तरनाक दिख रहे ब्रैंडन किंग को चलता किया तो उन्होंने बेहद ख़तरनाक माने जाने वाले रोवमन पावेल को तो हाथ खोलने का मौक़ा ही नहीं दिया.
वेस्ट इंडीज की टीम दीपक हुडा के किफायती पाँच ओवर के लिए भी शायद तैयार नहीं थी. लेकिन हुडा ने बल्ले से भी एक छोटी लेकिन अहम पारी खेली और गेंद से भी अपना योगदान दिया.
श्रेयस अय्यर की श्रेष्ठता
लेकिन, एक बल्लेबाज़ जिसके रन बनाने से ना सिर्फ़ उसको राहत मिली है बल्कि बल्लेबाज़ी और हेड कोच काफ़ी ख़ुश होंगे- वो हैं श्रेयस अय्यर.
आपको जानकर हैरानी होगी कि मैच से दो दिन पहले एक भारतीय मूल की महिला उनकी इतनी बड़ी फैन हैं कि उन्होंने उनके ऑटोग्राफ के लिए चार घंटे से ज़्यादा वक़्त का इंतज़ार किया.
अय्यर को भी इस मैच में एक अदद पारी की तलाश थी और उनका भी इंतज़ार अच्छे अर्धशतक से ख़त्म हुआ.
कुल मिलाकर देखा जाए तो धवन के अलावा शुभमन गिल और अय्यर की पारी ने भी राहुल द्रविड़ को काफ़ी राहत दी होगी.
किसी के लिए खुशी, किसी के लिए मायूसी
बहरहाल, चलते-चलते आपको ये जानकर मायूसी होगी कि अपने घरेलू मैदान पर पहला मैच खेल रहे ऑलराउंडर अकील हुसैन बल्ले और गेंद से भरपूर ज़ोर लगाया लेकिन टीम को वो जीत नहीं दिला पाए.
अकील मैच के बाद खुद को सांत्वना भी नहीं दे पार रहे थे कि स्टेडियम में उनकी माँ और तीन बहनें थीं. पिता की मौत के बाद अकील के जीवन में काफ़ी उतार आया लेकिन उनके परिवार वालों ने उन्हें संभाला.
पूरे मैच में अपनी टीम के लिए बेस्ट ऑलराउंडर होने के बावजूद उनका हार से सामना पोर्ट ऑफ स्पेन की शाम को दर्शकों के लिए थोड़ी ख़ामोशी का एहसास दिला कर चली गई जो पूरे दिन मौज-मस्ती में दिख रहे थे.
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