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#INDvsENG: जसप्रीत बुमराह ने ओवल में ऐसा क्या किया जो क्रिकेट में पहले कभी नहीं हुआ
- Author, विमल कुमार
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
विराट कोहली और रोहित शर्मा को लेकर इंग्लैंड के हर स्टेडियम के बाहर बहुत शोर मचता है लेकिन किसी तेज़ गेंदबाज़ को स्टार का दर्जा मिलते देखना एक सुखद बदलाव का हिस्सा रहा है.
हर रोज़ बुमराह टीम बस से उतरने या चढ़ने के समय एकदम आख़िर में ही आते हैं. जैसे मानो कि वो गेंदबाज़ी करते हुए अपना आख़िरी स्पेल डाल रहें हों.
लेकिन बूम-बूम बुमराह का शोर उनके जैसे गंभीर शख्सियत के चेहरे पर भी थोड़ी हल्की मुस्कान ला देती है.
कई मायनों में देखा जाए तो बुमराह आधुनिक क्रिकेटर हैं ही नहीं. उन्हें चकाचौंध पसंद नहीं है और ना ही मीडिया में आकर ऐसी बातें करना कि बस वो ही वो छा जाएं.
यहाँ तक कि इंग्लैंड के पूर्व कप्तान नासिर हुसैन के एक बेहद सम्मानित टिप्पणी पर भी जब इस लेखक ने उनसे सवाल किया तो बुमराह बहुत विनम्रता से एक असाधारण तारीफ़ को टाल गए.
आईपीएल की पीढ़ी का दूसरा खिलाड़ी ऐसी तारीफ़ों पर अपनी प्रतिक्रिया देकर सोशल मीडिया में हलचल मचा देता. लेकिन, यही तो अंतर है बुमराह में और बाक़ी गेंदबाज़ों में.
वन-डे क्रिकेट में पहली बार
इंग्लैंड को तो ये समझ में ही नहीं रहा था कि कप्तान के तौर पर पिछले ही हफ्ते एजबेस्टन टेस्ट के अंतिम दिन जिस बुमराह से ना तो रन रोके जा रहे थे और ना विकेट लिए जा रहे थे और ना ही स्विंग करायी जा पा रही थी तो वो ओवल में अचानक इतना ख़तरनाक कैसे हो गए कि उनके टॉप क्रम के 4 बल्लेबाज़ों में 3 को खाता खोलने तक का मौक़ा भी नहीं मिला. ऐसा वन-डे क्रिकेट के इतिहास में पहली बार हुआ.
बुमराह तो मानो रोहित के टॉस जीतने के साथ ही गेंद लेकर मैदान में कूदने का इरादा लेकर आये थे.
टॉस के बाद जैसे ही बुमराह ने मैदान में बड़ी स्क्रीन पर देखा कि भारत ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाज़ी का फैसला किया है तो वो उसी वक्त मोहम्मद शमी के साथ अपनी मुस्कराहत को रोक नहीं पाये. ऐसा लगा कि ये जोड़ी बस रोहित के इस फैसले के इतंज़ार में लार टपकाये बैठी हुई थी.
मैच के पहले 10 ओवर के ही खेल में बुमराह ने 4 विकेट झटक डाले और वो भी सिर्फ़ 9 रन देकर.
भारतीय क्रिकेट के इतिहास में यूं तो स्टुअर्ट बिन्नी और जवागल श्रीनाथ ने बांग्लादेश और श्रीलंका जैसी टीमों के ख़िलाफ़ अतीत में कुछ ऐसे ही असाधारण स्पेल डाले हैं.
लेकिन वर्ल्ड चैंपियन इंग्लैंड के ख़िलाफ और वो भी उनके घर में इतने शानदार खिलाड़ियों की मौजूदगी वाली मेज़बान टीम के खिलाफ इस स्पेल को निसंदेह सबसे बेहतरीन स्पेल कहा जा सकता है.
इंग्लैंड में अब तक दर्जन से भी कम गेंदबाज़ों में एक पारी में वन-डे क्रिकेट में 6 या उससे ज़्यादा विकेट लिये हैं लेकिन बुमराह उस सूची में भी हटकर हैं.
उनके 6 विकेट महज़ 44 गेंदों पर आये, मतलब हर 7वीं गेंद फेंकने के बाद एक विकेट गुजरात के इस गेंदबाज़ को मिल रहा था.
दूसरे छोर से मोहम्मद शमी
लेकिन, बुमराह की तारीफ करते करते हमें मोहम्मद शमी के दूसरे छोर पर डाले जा रहे स्पेल को कतई नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए.
मगर शमी के साथ उनके पूरे वन-डे करियर में यही होता आया है. भारत के लिए सबसे तेज़ी से 150 विकेट पूरे करने वाले शमी से ज़्यादा रफ्तार (महज़ 80 मैचों में ये कमाल) सिर्फ 2 और गेंदबाज़ों ने ही दिखायी है.
शमी-बुमराह की इस ख़रनाक गेंदबाज़ी को देखते हुए प्रेस बॉक्स में वरिष्ठ ब्रिटिश पत्रकारों को माइकल होल्डिंग और मैल्कम मार्शल जैसे महान गेंदबाज़ों का दौर उनके ज़ेहन में ताजा होने लगे.
मोहम्मद सिराज ने कहा था एजबेस्टन टेस्ट के दौरान ये कहा था कि ड्यूक्स गेंद स्विंग नहीं हो रही थी और अजीब बात है कि कुकाबुरा से वन-डे में धारदार स्विंग देखने को मिल रहा है.
यूं तो तेज़ गेंदबाज़ों ने ऐसा कमाल कर दिया था कि ऐसा लगा कि लेग स्पिनर युज़वेंद्र चहल का इस्तेमाल ही ना हो लेकिन कप्तान रोहित शर्मा ने अगले मैच को ध्यान में रखते हुए उनसे 2 ओवर का अभ्यास करवाना मुनासिब समझा.
धुआँधार बल्लेबाज़ी
दरअसल, देखा जाए तो लक्ष्य इतना छोटा था तो इंग्लैंड संपूर्ण आक्रमण की नीति अपनाते हुए कम से कम 2-3 विकेट लेने की कोशिश ज़रुर करता लेकिन कप्तान रोहित शर्मा और उनके पूराने जोड़ीदार शिखर धवन ने पहले ही तय कर लिया था जो काम एजबेस्टन टेस्टके पाँचवें दिन हुआ वो ओवल में मंगलवार को ज़रुर करेंगे.
यानी विरोधी को पूरे दिन के खेल में एक भी विकेट हासिल नहीं करने देंगे.
रोहित ने इसी मैच के दौरान 250 छक्के बना डाले और ऐसा करने वाले वो दुनिया के सिर्फ चौथे बल्लेबाज़ हैं.
इस मैच में भी अगर वो एक और छक्का लगा देते तो पूरे में मैच में आधे दर्जन छक्के बनाने का कमाल भी वो दिखा सकते थे.
अगर रोहित छक्के लगा कर छठे गियर में बल्लेबाज़ी करते दिखे तो वेस्ट दौर पर वन-डे टीम के कप्तान शिखर धवन ने 54 गेंद पर 31 रनों की पारी में सिर्फ 4 चौके जड़े.
सचिन तेंदुलकर-सौरव गांगुली (6609 रन), एडम गिलक्रिस्ट-मैथ्यू हेडेन(5372 रन) और गोर्डन ग्रीनीज़- डेसमंड हेंस की जोड़ी (5150 रन)ने ही वन-डे क्रिकेट में बतौर साझेदार 5000 रनों का आंकड़ा पार किया है.
इस मैच को देखने के लिए ओवल में ग्रीनिज और गांगुली भी इत्तेफाक से साथ बैठे हुए थे और ये उम्मीद की जा सकती है दोनों महान बल्लेबाज़ों को अपने दौर और अपने पूराने साथी के साथ तालमेल का दौर भी याद आ गया होगा.
लेकिन, इंग्लैंड इस मैच को भविष्य में कभी भी याद नहीं करना चाहेगा क्योंकि इससे पहले उन्हें अपने घर में कभी भी 10 विकेट से बुरी तरह से पराजित होने का अनुभव नहीं चखा था.
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