एशिया कप: हॉकी में पाकिस्तान के साथ हाई वोल्टेज़ मुक़ाबले से भारत शुरू करेगा अभियान

भारत-पाक हॉकी

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    • Author, मनोज चतुर्वेदी
    • पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए

मौजूदा एशियाई चैंपियन भारत जकार्ता के जीबीके एरिना में 23 मई को पाकिस्तान से हाई वोल्टेज मुक़ाबला खेलकर एशिया कप हॉकी चैंपियनशिप में अपने अभियान की शुरुआत करेगा. आठ ठीमों को इस चैंपियनशिप में भारत को पाकिस्तान, जापान और मेजबान इंडोनेशिया के साथ ग्रुप 'ए' में रखा गया है.

ये सही है कि भारत और पाकिस्तान के बीच हॉकी मुकाबलों में पहले जैसा उन्माद अब देखने को नहीं मिलता है. इसकी वजह अब दोनों टीमों का अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में लगातार खेलते रहना है. दोनों टीमों की अब पहले जैसी बादशाहत भी नहीं है.

लेकिन इस सबके बावजूद दोनों टीमों के प्रशंसकों में कोई कमी नहीं आई है. इसलिए इन परंपरागत प्रतिद्वंद्वियों को मुक़ाबले को देखने वालों की तादाद अच्छी-खासी होने से आयोजक इस मुक़ाबले को रखने का मोह नहीं छोड़ पाते हैं.

मुकाबले में तनाव तो रहता है

यह सही है कि भारत और पाकिस्तान के मुकाबलों में पहले वाली रोमांचकता भले ही नहीं रही हो. दोनों टीमों के खिलाड़ी इस मुक़ाबले को अन्य मुकाबलों की तरह होने की बात भी कहते हैं. लेकिन यह सच है कि इस मुक़ाबले में दोनों ही टीमों पर पहले के मुक़ाबले जैसा ही तनाव रहता है.

यही वजह है कि दोनों ही टीमें एक-दूसरे से हारना कभी पसंद नहीं करती हैं. यही नहीं कई बार तो एक दूसरे पर जीत पाने पर चैंपियन बनने से ज्यादा खुशी होती है.

भारतीय टीम के उप कप्तान एसवी सुनील ने एशिया कप की शुरुआत से पहले मीडिया में कहा है, "पाकिस्तान के ख़िलाफ़ खेलते समय दवाब होना लाजिमी है.

पाकिस्तान के ख़िलाफ़ हर मैच हाई वोल्टेज होता है. हम सीनियर खिलाड़ी इन मैचों में ज्यादा रोमांचित नहीं होते हैं. पर युवा खिलाड़ियों पर मैच में दवाब बन सकता है. इसलिए हम इस मैच को सामान्य मैच की तरह ही लेने की बात उन्हें समझा रहे हैं."

भारत को इस टूर्नामेंट में सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं जापान से भी कड़ी चुनौती मिल सकती है. जापान ने पिछले कुछ सालों में एक मजबूत टीम वाली छवि बनाई है. 2018 के एशियाई खेलों में जापान ने मलेशिया को हराकर गोल्ड मेडल जीता था.

इन दोनों टीमों ने सेमीफाइनल में ही भारत और पाकिस्तान की चुनौती ध्वस्त कर दी थी .बाद में भारत ने पाकिस्तान को हराकर कांस्य पदक जीता था.

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इमेज कैप्शन, जापान दे रहा है कड़ी टक्कर

भारत के लिए अपने ग्रुप मुकाबलों में पाकिस्तान और जापान में से किसी एक टीम को फ़तह करना ज़रूरी होगा, क्योंकि प्रत्येक ग्रुप की टॉप दो टीमें ही अगले चरण में स्थान बनाएंगी.

दोनों ग्रुपों की टॉप दो-दो टीमों का ग्रुप बनेगा और सभी टीमें आपस में खेलेंगी और पहली दो टीमों के बीच फाइनल खेला जाएगा.

इस तिकड़ी पर रहेगी निगाह

भारत ने एशिया कप में कुछ सीनियर खिलाड़ियों के साथ युवा खिलाड़ियों की टीम बनाकर भेजी है और इसकी अगुआई अनुभवी डिफेंडर बीरेंद्र लाकड़ा कर रहे हैं. पहले रूपिंदर पाल को कप्तान बनाया था. लेकिन बेंगलुरू में शिविर में अभ्यास के दौरान कलाई चोटिल हो जाने की वजह से बीरेंद्र को कप्तानी सौंपी है.

भारत ने अनुभवी बीरेंद्र लाकड़ा और एसवी सुनील के साथ युवा खिलाड़ियों को चुना है. इसके अलावा टोक्यो ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन करने वाले सिमरनजीत सिंह चोट के कारण लंबे समय तक खेल से दूर रहने के बाद वापसी कर रहे हैं.

इस तिकड़ी पर बहुत निर्भर करेगा कि वह युवाओं को किस तरह आगे बढ़ाते हैं.

एशिया कप के माध्यम से पहली तीन टीमें विश्व कप के लिए क्वालिफाई होती हैं. पर अगला विश्व कप भारत में 2023 में होना है, इसलिए भारत का मेजबान होने के नाते पहले ही खेलना पक्का है.

इसी को ध्यान में रखकर भारत ने युवाओं की टीम उतारी है. इस तरह भारत अपनी दूसरी पंक्ति की परीक्षा भी कर सकेगा.

भारत के युवा खिलाड़ियों की टीम भेजने की एक वजह यह भी है कि उसे 11 और 12 जून को एंटवर्प में बेल्जियम के ख़िलाफ़ एफआईएच प्रो लीग का मुक़ाबला खेलना है.

यह भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत अब तक खेले 12 मैचों में 27 अंक बनाकर सबसे आगे है. वहीं अर्जेंटीना 24 अंकों से दूसरे और जर्मनी 23 अंक बनाकर तीसरे स्थान पर है.

भारत यदि बेल्जियम के ख़िलाफ़ दोनों मैच जीतकर छह अंक और जुटा लेता है तो उसके इस बार चैंपियन बनाने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी. भारत को इसके बाद 18 और 19 जून को नीदरलैंड के ख़िलाफ़ रोटरडम में खेलना है.

इसके अलावा भारत के लिए विश्व कप के लिए क्वालिफाई करने वाली बात नहीं होने से युवा टीम उतारने में आसानी हुई है.

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पिछले कुछ सालों में भारतीय हॉकी की बदली है तस्वीर

भारतीय हॉकी की पिछले कुछ सालों में तस्वीर बदली है. टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने से भारत एक बार फिर बिग लीग की टीमों शुमार हो गया है. टीम की इस तस्वीर बदलने में कोच ग्राहम रीड ने अहम भूमिका निभाई है.

ग्राहम रीड एफआईएच प्रो लीग के लिए टीम को तैयार कर रहे हैं तो उन्होंने पूर्व भारतीय कप्तान सरदारा सिंह को कोच की जिम्मेदारी सौंपी है.

एशिया कप में भले ही भारत के ख़िलाफ़ पाकिस्तान का रिकॉर्ड बेहतर है. लेकिन भारत दोनों देशों के बीच हुए आठ मुकाबलों में से तीन को ही जीत सका है और पाकिस्तान के हिस्से पांच जीतें दर्ज हैं. भारत की तीन जीतों में पिछले एशिया कप में पाकिस्तान पर जीत भी शामिल है.

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असल में भारत पिछले कुछ सालों में पाकिस्तान को काफी पीछे छोड़ने में सफल रहा है. यही वजह है कि भारत ने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ खेले पिछले 13 मुकाबलों में से 12 को जीता है. कॉमनवेल्थ गेम्स 2018 में दोनों के बीच 2-2 से बराबरी रही थी.

भारतीय कप्तान बीरेंद्र लाकड़ा ने जकार्ता के लिए रवाना होने से पहले कहा था, "भारत और पाकिस्तान दोनों की टीमें युवा होंगी. हमारे लिए मैच दर मैच रणनीति बनाना महत्वपूर्ण होगा. अगर हम अच्छा प्रदर्शन कर सके तो परिणाम भी अच्छा ही आएगा. अगर हम ऐसा कर सके तो हमारे खिलाड़ियों का विश्वास आसमान पर पहुंच जाएगा."

उन्होंने यह भी कहा कि कोच सरदारा सिंह ने अभ्यास के दौरान फिटनेस पर विशेष जोर दिया है, इसका हमें फायदा मिल सकता है.

खिताब में भी है दोनों में बराबरी

भारत और पाकिस्तान ने अब तक एशिया कप में तीन-तीन बार खिताब जीते हैं. सिर्फ दक्षिण कोरिया ही चार खिताब जीतने वाली टीम है. फर्क सिर्फ यह है कि पाकिस्तान ने एशिया कप के शुरुआती दिनों में यानी 1982, 1985 और 1989 में खिताब जीते तो भारत ने 2003, 2007 और 2017 में खिताब जीते हैं.

भारत के पिछले एशिया कप में चैंपियन बनने से यह बात भी साफ हो जाती है कि उसने ने पिछले कुछ सालों में अपनी खोई प्रतिष्ठा को किसी हद तक पा लिया है. जबकि पाकिस्तान अभी भी प्रतिष्ठा पाने के लिए जूझ रहा है.

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