भारत से पिटी न्यूज़ीलैंड टीम टी-20 विश्व कप के बाद अर्श से फ़र्श पर क्यों आई

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- Author, आदेश कुमार गुप्त
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
सयुंक्त अरब अमीरात और ओमान में हुए आईसीसी टी-20 विश्व कप क्रिकेट टूर्नामेंट के फ़ाइनल में ऑस्ट्रेलिया से हारने के बाद जब न्यूज़ीलैंड की टीम भारत दौरे पर आई तो सबको एक शानदार टी-20 और टेस्ट सिरीज़ की उम्मीद थी लेकिन 'खोदा पहाड़ निकली चुहिया' जैसी बात हुई.
न्यूज़ीलैंड टीम ने भारत में जिस तरह निराशाजनक प्रदर्शन किया उसके बाद तो क्रिकेट समीक्षक भी हैरान हैं कि आख़िरकार इस टीम को क्या हो गया है?
क्या उसे किसी की नज़र लग गई है?

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हार से जुड़े कई सवाल
क्या यह वही न्यूज़ीलैंड टीम है जिसने कुछ समय पहले आईसीसी विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप के फ़ाइनल में भारत को हराया था, और क्या यह वही न्यूज़ीलैंड टीम है जिसने पिछले महीने आईसीसी विश्व टी-20 क्रिकेट टूर्नामेंट के ग्रुप मैच में भारत को आठ विकेट से हराकर उसे सेमीफ़ाइनल से पहले ही टूर्नामेंट से विदा कर दिया था.
थोड़े समय बाद ही न्यूज़ीलैंड की टीम अर्श से फ़र्श पर क्यों आ गई?
न्यूज़ीलैंड की टीम पहले तो तीनों टी-20 मुक़ाबले हार गई, फिर उसके बाद टेस्ट सिरीज़ में भी उसने घुटने टेकने जैसा प्रदर्शन किया.
भारत ने दो टेस्ट मैच की सिरीज़ 1-0 से अपने नाम की.

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पहले टेस्ट में किया संघर्ष
दोनो टीमों के बीच कानपुर में खेला गया पहला टेस्ट मैच ड्रॉ रहा जबकि मुंबई में खेले गए दूसरे टेस्ट मैच को भारत ने मैच के चौथे दिन ही लंच से पहले 372 रन के विशाल अंतर से जीत लिया.
टेस्ट सिरीज़ का परिणाम अपनी पूरी कहानी नहीं बताता. शायद क्रिकेट प्रेमियों को लगे कि न्यूज़ीलैंड ने पहले टेस्ट मैच में कोई बेहद आश्चर्यजनक खेल दिखाया हो, लेकिन हक़ीक़त में ऐसा कुछ नहीं था.
जीत के लिए 284 रन के लक्ष्य का पीछा करते समय एक समय न्यूज़ीलैंड के नौ विकेट 89.2 ओवर में केवल 155 रन पर गिर चुके थे. ऐसे में भारत जीत के दरवाज़े पर पहुंच चुका था लेकिन उसके बाद उसकी आखिरी जोड़ी रचिन रविंद्र ने 91 गेंदों पर नाबाद 18 और एजाज़ पटेल ने 23 गेंदों पर नाबाद तीन रन बनाकर मैच को हैरतअंगेज़ रूप से ड्रॉ करा दिया.
इन दोनों बल्लेबाज़ों ने आठ ओवर और दो गेंद खेली. इससे पहले भारतीय गेंदबाज़ लगातार विकेट ले रहे थे. उनका मैच समाप्त होने के बाद यह कहना कि विकेट से मदद नहीं मिल रही थी, सही नहीं था.
दरअसल रचिन रविंद्र और एजाज़ पटेल के पिच पर अंगद की तरह पांव जमाकर खेलने से न्यूज़ीलैंड ने अपनी जान बचाई और मैच ड्रॉ कराया.

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दूसरे टेस्ट में टेके घुटने
दूसरे टेस्ट मैच में तो न्यूज़ीलैंड ने और भी ख़राब खेल दिखाया. मुंबई में खेले गए इस टेस्ट मैच में भारत ने पहली पारी में 325 रन बनाए. जवाब में न्यूज़ीलैंड की पहली पारी महज़ 62 रनों पर सिमट गई.
जिस तरह से न्यूज़ीलैंड के बल्लेबाज़ 'आयाराम और गयाराम' साबित हुए उससे ऐसा लगा कि वह गेंद के साथ सोशल डिस्टेंस निभा रहे हैं.
उन्होंने अपने ही ख़ब्बू स्पिनर एजाज़ पटेल के उस कारनामे पर भी पानी फेर दिया जो टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में केवल तीसरी बार हुआ.

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एजाज़ पटेल के कमाल पर पानी
एजाज़ पटेल ने 119 रन देकर 10 विकेट लिए और इंग्लैंड के जिम लेकर और भारत के अनिल कुंबले के साथ अपना नाम जोड़ा.
जिम लेकर और अनिल कुंबले भी ऐसा कारनामा कर चुके हैं.
दूसरे टेस्ट मैच में न्यूज़ीलैंड के सामने जीत के लिए 540 रन जैसा विशाल लक्ष्य था, लेकिन विकेट में कुछ भी ऐसा नहीं था कि उसकी दूसरी पारी भी ताश के पतों की तरह बिखर जाए. न्यूज़ीलैंड की दूसरी पारी 56.3 ओवर में ही केवल 167 रन पर ढह गई.
भारत ने एक तरह से न्यूज़ीलैंड का इस सिरीज़ में सफ़ाया कर दिया. जो न्यूज़ीलैंड टीम भारत दौरे से पहले घूमकेतू की तरह चमक रही थी आखिरकार उसे ग्रहण कैसे लग गया.
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भारत ने दिखाया दम
दूसरी तरफ़ भारत की कामयाबी इसलिए बेहद विशेष है क्योंकि टी-20 सिरीज़ में रोहित शर्मा नए कप्तान और राहुल द्रविड़ नए कोच थे.
ट्वेंटी-20 टीम में विराट कोहली, जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद शमी जैसे खिलाड़ी नहीं थे.
दो टेस्ट मैच की सिरीज़ में भी पहले टेस्ट मैच में नियमित कप्तान विराट कोहली नहीं थे.
वह दूसरे टेस्ट मैच में वापस लौटे, लेकिन टेस्ट सिरीज़ में भी ऋषभ पंत, जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद शमी टीम से बाहर थे.
दूसरे टेस्ट मैच में तो अजिंक्य रहाणे और रविंद्र जडेजा भी चोटिल होकर टीम से बाहर हो गए.

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इसके अलावा रहाणे और चेतेश्वर पुजारा ख़राब फ़ॉर्म से जूझ रहे थे. अब होना तो यह चाहिए था कि न्यूज़ीलैंड टीम इसका फ़ायदा उठाती लेकिन हुआ उसका उल्टा.
भारत ने इतनी आसानी से न्यूज़ीलैंड को अपने वश में कर 'मनवांछित फल पावे' जैसे अंदाज़ में जीत हासिल की कि भारत की तमाम कमियां भी छुप गईं.
अजिंक्य रहाणे और चेतेश्वर पुजारा अपनी खोई फ़ॉर्म हासिल नहीं कर सके तो विराट कोहली का यह साल भी अभी तक बिना किसी शतक के बरक़रार है.
इसके बावजूद भारत के लिए बल्लेबाज़ी में पहले टेस्ट मैच में श्रेयस अय्यर और दूसरे टेस्ट मैच में मयंक अग्रवाल की बल्लेबाज़ी उपलब्धि रही.
श्रेयस अय्यर ने अपने पहले ही ही टेस्ट मैच की पहली पारी में शतक और दूसरी पारी में अर्धशतक बनाने जैसा अनूठा रिकॉर्ड बनाया. ऐसा रिकॉर्ड बनाने वाले वह पहले भारतीय हैं. इसके अलावा मयंक अग्रवाल ने भी दूसरे टेस्ट मैच की पहली पारी में शतक और दूसरी पारी में अर्धशतक जमाया.

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न्यूज़ीलैंड की टी-20 में हार के कारण
न्यूज़ीलैंड तीन मैचों की टी-20 सिरीज़ के पहले मैच में भारत से पांच विकेट से, दूसरे मैच में सात विकेट से और तीसरे मैच में 73 रन से हारी.
यह हार बताती है कि वह किसी भी मैच में दमदार खेल नहीं दिखा पाई. उसे सबसे पहला झटका तो नियमित कप्तान केन विलियमसन के बाहर होने से लगा.
विलियमसन ने आराम करने के उद्देश्य से इस सिरीज़ से दूर रहना ठीक समझा. नए कप्तान टिम साउदी सही रणनीति नहीं बना सके. पहले मैच में मार्टिन गप्टिल और चैपमैन के अर्धशतक के दम पर न्यूज़ीलैंड ने छह विकेट खोकर 164 रन तो बनाए, लेकिन उसके गेंदबाज़ रोहित शर्मा और सूर्यकुमार यादव पर काबू नहीं रख सके.
दूसरे और तीसरे मैच में भी न्यूज़ीलैंड का यही हाल रहा. तीसरे मैच में तो न्यूज़ीलैंड जीत के लिए 185 रनों की तलाश में केवल 111 रन बना सकी. जो मार्टिन गप्टिल, डेरेल मिचेल और मिचेल सैंटनर टी-20 विश्व कप में ढ़रों रन बना रहे थे वह यहां भारत में कुछ ख़ास नहीं कर सके. गेंदबाज़ी में भी कोई पैनापन नहीं था.

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टेस्ट सिरीज़ में भी न्यूज़ीलैंड टीम बेअसर रही
टी-20 क्रिकेट तो फिर भी एक दो खिलाड़ियों का खेल माना जाता है, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में ऐसा नही होता.
न्यूज़ीलैंड आईसीसी टेस्ट चैम्पियन टीम है और वह भारत को ही हराकर चैम्पियन बनी थी. इसलिए उसकी ऐसी हार चिंताजनक है.
कानपुर में खेले गए पहले टेस्ट मैच में कप्तान केन विलियमसन और बेहद अनुभवी बल्लेबाज़ रॉस टेलर दोनो पारियों में बुरी तरह से नाकाम रहे.
विलियमसन पहली पारी में 18 और दूसरी पारी में 24 रन बना सके. वहीं रॉस टेलर ने पहली पारी में 11 और दूसरी पारी में दो रन बनाए.
इसके बावजूद टॉम लैथम और विल यंग ने पहली पारी और टॉम लैथम ने दूसरी पारी में अर्धशतक बनाकर न्यूज़ीलैंड को मैच में बनाए रखा. लेकिन उनका मध्यमक्रम दोनों पारियों में बुरी तरह से चरमराया.

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भारत का दबदबा
पहली पारी में 151 रन जैसी शानदार शुरूआत के बाद भी वह 296 रन ही बना सके. उनका हद से अधिक रक्षात्मक होना किसी की समझ में नहीं आया.
नतीजा भारतीय गेंदबाज़ उन पर हावी होते चले गए. वह तो रचिन रविंद्र और एजाज़ पटेल आख़िर में विकेट पर अड़ गए वर्ना हार तो इबारत की तरह दीवार पर लिखी ही थी.
दूसरे टेस्ट मैच में तो न्यूज़ीलैंड कहीं नहीं दिखी. एजाज़ पटेल ने पहली पारी में भारत के दसों विकेट लेने का कारनामा ज़रूर किया लेकिन बाकि गेंदबाज़ बुरी तरह नाकाम रहे.
टिम साउदी और जेमीसन तो चले ही नहीं, साथ ही बाकि गेंदबाज़ अनुभवहीन थे. बल्लेबाज़ी में मुंबई में भी उन्होंने कानपुर जैसी ग़लती दोहराई. अति रक्षात्मक होना उनके लिए दोधारी तलवार जैसा था.
इससे ना तो रन बने और ना ही वह विकेट पर टिक सके. पहली पारी में केवल 62 रन पर सिमटना बताता है कि वह मानसिक और शारीरिक रूप से खेल में नहीं थे.
शायद उन्हें न्यूज़ीलैंड वापस जाने की जल्दी थी. रही सही कसर केन विलियमसन के ना खेलने से पूरी हो गई.
भारत में अक्सर अपने बल्ले से बेहद कामयाब रहने वाले रॉस टेलर शायद ही इस सिरीज़ को याद रखना चाहें. वह दोनों पारियों में केवल एक रन बना सके. उनके गेंदबाज़ एक-एक विकेट के लिए तरसते रहे.

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चमके भारत के गेंदबाज़
भारत ने पहली पारी में 325 और दूसरी पारी में सात विकेट खोकर 276 रन बनाए. भारत चाहता तो न्यूज़ीलैंड को फ़ॉलोऑन भी दे सकता था लेकिन उसके अधिकांश बल्लेबाज़ फ़ॉर्म में नहीं है इसलिए उन्हें मौक़ा देना बेहतर विकल्प था.
भारत के आर अश्विन, अक्षर पटेल और रविंद्र जडेजा के अलावा जयंत यादव कामयाब स्पिनर रहे. आर अश्विन ने तो चौथी बार कैलेंडर वर्ष में 50 विकेट पूरे किये.
जो भी हो भारत ने टी-20 और टेस्ट सिरीज़ तो जीत ली लेकिन उसकी परीक्षा पूरी तरह नहीं हो सकी.
अब चयनकर्ताओं के सामने आगामी दक्षिण अफ्रीका दौरे के लिए टीम चुनने की चुनौती है. वहां भारतीय टीम को तीन टेस्ट और तीन एकदिवसीय मैच खेलेने हैं. अजिंक्य रहाणे और चेतेश्वर पुजारा न्यूज़ीलैंड का फ़ायदा नहीं उठा सके इससे उनका चयन ख़तरे में है. देखना है कि रोहित शर्मा, केएल राहुल, जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद शमी और रविंद्र जडेजा की वापसी के बाद टीम में कौन-कौन शामिल होते हैं.
हालांकि, कोरोना वायरस के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन के फैलाव के चलते अभी इस सिरीज़ की तस्वीर साफ़ नहीं है.
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