ऋषभ पंत को टीम में जगह क्यों नहीं मिल पा रही?

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    • Author, विमल कुमार
    • पदनाम, खेल पत्रकार, न्यूज़ीलैंड से बीबीसी हिन्दी के लिए
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ये शख़्स न्यूज़ीलैंड 'क्रिकेट की आवाज़' (Voice of cricket) के नाम से मशहूर हैं, ठीक उसी तरह से जैसे रिचो बेनो ऑस्ट्रेलिया के लिए, टोनी कोज़ियर वेस्ट इंडीज़ के लिए या फिर मौजूदा समय में माइकल आर्थटन और नासिर हुसैन इंग्लैंड की आवाज़ हैं.

भारत-न्यूज़ीलैंड सिरीज़ के दौरान मैनें कई बार उन्हें फ़ैंस के साथ हंसते-मिलते और घुलते देखा.

वर्ल्ड कप फ़ाइनल में सुपर ओवर के दौरान उनकी कमेंट्री ने पूरी दुनिया में उनकी हस्ती को बदल दिया है, लेकिन 1980-90 के दशक में एक खिलाड़ी के तौर पर भी उनकी पहचान किसी से कम नहीं थी.

हम बात कर रहें हैं न्यूज़ीलैंड के महान विकेटकीपर इयन स्मिथ की जो 28 फरवरी को 63 साल के हो जायेंगे.

स्मिथ ने न्यूज़ीलैंड के लिए उस दौर में 63 टेस्ट और 98 वन-डे मैच खेले. विकेटकीपर के तौर पर उनके अतंर्राष्ट्रीय करियर में 260 शिकार हैं.

तो उनसे मुलाक़ात होने पर मेरा पहला सवाल भारत के विकेटकीपर्स पर ही रहा. और यह एक ऐसा सवाल है जिसे न्यूज़ीलैंड में हर फ़ैन भारतीय मीडिया से पूछ रहा है कि 'एम एस धोनी क्यों नहीं आये न्यूज़ीलैंड?'

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फ़िनिशर धोनी

स्मिथ को भी धोनी की कमी खल रही है.

वे कहते हैं, "आप कैसे नहीं धोनी को किसी भी क्रिकेट टीम में मिस नहीं करेंगे. वे अपनी हर भूमिका में महानतम खिलाड़ियों मे से एक रहें हैं. चाहे उनकी कप्तानी की बात करें या फिर फ़िनिशर के तौर पर. 2019 वर्ल्ड कप सेमीफ़ाइनल में तो वे भारत को लगभग जिता चुके थे. निजी तौर पर मुझे उनसे बात करना बहुत अच्छा लगता है. लेकिन कभी ना कभी आपको दूसरी प्रतिभा के लिए जगह छोड़नी पड़ती है और वे ऐसा कर रहें हैं."

ऐसा नहीं है कि धोनी ही फ़िनिशर की भूमिका निभा रहें है. स्मिथ भी अपने ज़माने में अपनी टीम के लिए ऐसा ही कमाल किया करते थे.

अगर आप तीन दशक पीछे जायेंगे तो ऑकलैंड में भारत के ख़िलाफ एक टेस्ट मैच में उनकी टीम के 7 विकेट महज़ 131 रन पर गिर गये थे और स्मिथ ने 136 गेंदों पर 173 रनों की धुँआधार पारी खेली थी.

वो दौर आईपीएल वाला नहीं था लेकिन उस पारी के दौरान भारतीय तेज़ गेंदबाज़ अतुल वासन के एक ओवर में स्मिथ ने 24 रन ठोके थे.

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स्मिथ कहते हैं, "देखिये हमारे ज़माने से तो अब कोई तुलना हो नहीं सकती क्योंकि जो बदलाव एडम गिल्क्रिस्ट लेकर आये उसका कोई सानी नहीं. अब आप विकेटकीपिंग में थोड़ी बहुत चूक को अपने रनों से ढंक देते हैं."

भारत ने न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ 5 मैचों की टी20 और तीन मैचों की वन-डे सिरीज़ में स्पेशलिस्ट विकेटकीपर ऋषभ पंत को एक भी मैच में मौक़ा ना देकर के एल राहुल को यह ज़िम्मेदारी दी.

न्यूज़ीलैंड के पूर्व दिग्गज विकेटकीपर बल्लेबाज़ भारत के इस फ़ैसले से बहुत खुश नहीं दिखे.

उन्होंने कहा, "के एल राहुल ने टी20 और वन-डे सिरीज़ में अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन अगर पिच में थोड़ा टर्न या बाउंस हो तो उन्हें कीपिंग इतनी सहज़ नहीं लगेगी."

पिछले दो सालों में पंत के करियर ने असाधारण उछाल से लेकर बेहद निराशाजनक उतार भी देखें हैं.

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पंत का करियर

सिर्फ़ 22 साल की उम्र में पंत ने वो कमाल दिखाया जो आज तक किसी भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज़ ने नहीं दिखाया है. धोनी ने भी नहीं.

और वो है एशिया के बाहर इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट शतक लगाना. बावजूद इसके पंत का न्यूज़ीलैंड दौरे पर पहले टेस्ट में खेलना मुश्किल दिखता है क्योंकि अब रिद्दीमान साहा सीनियर विकेटकीपर और टीम मैनेजमेंट की पहली पसंद हैं.

दरअसल अब तक पंत का करियर अपने आप में अद्भुत रहा है. साल 2018 में भारत-ए के इंग्लैंड दौरे के लिए लिए वो साहा, पार्थिव पटेल और दिनेश कार्तिक को तो छोडिये के एस भारत से भी पीछे चल रहे थे.

लेकिन अचानक वो टेस्ट सिरीज़ के लिए पहुंचते हैं और टेस्ट क्रिकेट में पहली ही गेंद पर छक्का लगा देतें हैं.

एक साल बाद वर्ल्ड कप के लिए टीम दोबारा इंग्लैंड जाती है तो उनका चयन नहीं होता है लेकिन शिखर धवन के चोटिल होने से उन्हें फिर मौक़ा मिलता है.

वो न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ सेमीफ़ाइनल में काफ़ी सब्र दिखाते हुए 32 रन की पारी खेलते हैं, जब टीम इंडिया ने सिर्फ़ 24 रनों पर 4 विकेट खो दिये थे.

लेकिन जब वे मुश्किल वक्त पार कर चुके थे तो उन्होंने जोश में फिर से होश खोया और आउट हो गये.

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सब्र की परीक्षा

दरअसल कई मौक़ों पर पंत इसकी झलक दिखा चुके हैं और शायद यही वजह है कि फ़िलहाल टीम मैनेजमेंट उन्हें सब्र से काम लेने का पाठ पढ़ा रहा है.

"ऋषभ पंत के बारे में हम काफ़ी कुछ सुनेंगे. इस दौरे पर वे नेट्स पर काफ़ी मेहनत करते दिखे हैं. मुझे लगता है कि भारतीय टीम मैनेजमेंट उन्हें थोड़ा इंतज़ार करवा रहा है ताकि वे अपने खेल की शैली में थोड़ा बदलाव करें." ऐसा कहते हुए आप इयन स्मिथ की आँखों में पंत के लिए ज़बर्दस्त सहानुभूति और समर्थन देखतें हैं.

स्मिथ भावुक होकर कहते हैं कि "क्रिकेट का मतलब सिर्फ़ खेलना नहीं है, बल्कि इस खेल को जीना भी है. आप खेलने के अलावा बाकी चीज़ें कैसे करते हैं. शायद इस दौरे पर टीम मैनेजमेंट उन्हें कई चीज़ें सीखा रहा है जो वे टीम के साथ रहते हुए अनुभव से सीख रहें हैं. उनकी भूख को बढ़ाने की कोशिश की जा रही है. ये मत भूलिये कि आने वाले वक्त में पंत भारतीय क्रिकेट का ही नहीं बल्कि दुनिया में एक बड़ा नाम होगा. इस बात का मुझे पूरा यक़ीन है."

बहरहाल मुद्दे को बदलते हुए हमने चलते-चलते न्यूज़ीलैंड क्रिकेट के बड़े जानकारों में से एक स्मिथ से टेस्ट सिरीज़ के बारे में भी पूछा.

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उन्होंने कहा, "भारत को थोड़ी चिंता इस बात की ज़रूर होगी कि उनके कुछ अहम खिलाड़ी जैसे विराट कोहली और जसप्रीत बुमराह बहुत अच्छे फ़ॉर्म के साथ टेस्ट सिरीज़ में नहीं जा रहें हैं. लेकिन पुजारा, रहाणे और अश्विन जैसे खिलाड़ियों के आने से फ़र्क पड़ेगा. भारत टेस्ट सिरीज़ में जीत का दावेदार होगा जिसकी वजह उनकी रैकिंग (आईसीसी रैंकिगं में नंबर 1) और जिस स्तर के खिलाड़ी उनके पास हैं, पहले भारत के ख़िलाफ़ पिच क्यूरेटर टेस्ट मैचों में हरी घास आराम से छोड़ सकते थे क्योंकि भारत की ताकत पारंपरिक तौर पर स्पिन गेंदबाज़ी थे लेकिन अब उनके पास बुमराह, शमी, ईशांत, उमेश के तौर पर एक बेहतरीन तेज़ गेंदबाज़ों का आक्रमण है. न्यूज़ीलैंड के हालात में भारत का कभी भी कोई दूसरा आक्रमण इतना शानदार नहीं रहा है. ये सबसे मंझा हुआ अटैक है."

अब स्मिथ के साथ बातचीत ख़त्म करने के अलावा कोई चारा नहीं था क्योंकि स्काई स्पोर्ट्स के प्रड्यूसर उन्हें इशारे से फिर से कमेंट्री बॉक्स में वापस लौटने का इशारा करने लगे थे.

स्पोर्ट्स विमेन ऑफ़ द ईयर

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