ISWOTY बाला देवी: भारतीय फुटबॉल में इतिहास रचने वालीं खिलाड़ी

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जब नगंगोम बाला देवी ने स्कॉटिश फुटबॉल क्लब, रेंजर्स एफसी के साथ 18 महीने का अनुबंध साइन किया था तो वो पहली भारतीय प्रोफेशनल फुटबॉलर बन गई थीं.
बीबीसी मराठी की जाह्नवी मुले ने बाला देवी के अब तक के सफर और आगे की योजनाओं के बारे में बात की.
29 साल की बाला देवी महिला फुटबॉल टीम की पूर्व कप्तान और सबसे ज़्यादा स्कोर करने वाली खिलाड़ी रही हैं. लेकिन, अब वो एक नई चुनौती की तैयारी कर रही हैं.
फॉरवर्ड के तौर पर खेलने वालीं बाला देवी ने बीबीसी से उनके मैनेजर के ज़रिए बात की. उन्होंने बताया, ''मैं भारत का गौरव बढ़ाना चाहती हूं.''
बाला देवी कहती हैं कि भले ही वो भारत के लिए 15 साल की उम्र से खेल रही हैं लेकिन वो अब भी हर एक मैच को अपना पहला मैच मानकर ही खेलती हैं.
उन्हें उम्मीद है कि रेंजर्स एफसी में उनके जाने से आने वाली पीढ़ी के (भारतीय) खिलाड़ियों को प्रेरणा मिलेगी.
29 जनवरी को बाला देवी ने इतिहास रच दिया जब रेंजर्स एफसी ने उनके साथ हुए अनुबंध की घोषणा की.
इससे पहले गोलकीपर अदिति चौहान ने 2015 में वेस्ट हैम यूनाइटेड के लिए खेला था लेकिन पेशेवर अनुबंध करने वालीं बाला देवी पहली खिलाड़ी हैं.
उन्होंने अपने देश के लिए खेलते हुए 58 मैचों में 52 गोल किए और घरेलू मैचों में 100 से ज़्यादा गोल किए.

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मणिपुर से हैं बाला देवी
बाला देवी मणिपुर में ही जन्मीं और पली-बढ़ी हैं जहां पर फुटबॉल काफ़ी लोकप्रिय है और पूरे जोश के साथ खेला जाता है.
मणिपुर की टीम ने 1991 से 25 में से 20 राष्ट्रीय चैम्पियनशिप जीता है.
बाला देवी कहती हैं, ''मणिपुर में हमारे लिए ये अच्छी बात है कि लड़कियों को खेलने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है. हमें भी बुरी बातें सुनने को मिलती हैं लेकिन उसके चलते मैं रुकी नहीं बल्कि मेरे अंदर ख़ुद को साबित करने की चाह पैदा हुई.''
उन्होंने बहुत छोटी उम्र में ही खेलना शुरू कर दिया था क्योंकि उनके परिवार की भी खेलों में दिलचस्पी रही है. वह टेनिस और हैंडबॉल भी खेलती थीं.
बाला देवी को अपने पिता से फुटबॉल खेलने की प्रेरणा मिली थी. उनके पिता शौक़िया तौर पर फुटबॉल खेलते थे.
वह कहती हैं, ''मुझे फुटबॉल बहुत पसंद था. मैं हर दिन पड़ोस के लड़कों के साथ खेला करती थी और उन्हें हराती भी थी.''
11 साल की उम्र में बाला देवी स्थानीय फुटबॉल क्लब आईसीएसए से जुड़ गईं थीं और ज़िला स्तर पर मैच खेलने शुरू कर दिए थे.
वह बताती हैं कि बड़े होने पर वो ब्राज़ील के महान खिलाड़ियों रोनाल्डो और रोनाल्डीनो के खेल की क़ायल थीं. अभी उनके पसंदीदा खिलाड़ियों में अमरीकी महिला फुटबॉल टीम की उप-कप्तान व मिडफील्डर मेगन रोपिनो और पुरुषों में पुर्तगाल के विंगर क्रिस्टियानो रोनाल्डो शामिल हैं.
अपने देश में वो मणिपुर की एक महिला फुटबॉलर ओईनम बेमबेम देवी को अपना आदर्श मानती हैं. बेमबेम देवी को, ''भारतीय फुटबॉल की दुर्गा'' कहा जाता है.
2002 में बाला देवी की ख़ुशी का तब कोई ठिकाना नहीं था जब उन्हें बेमबेम देवी के साथ खेलने का मौक़ा मिला. वह कहती हैं, ''मुझे लगा था कि मैं उनके साथ कभी नहीं खेल पाऊंगी.''
लगातार अच्छा प्रदर्शन करने के बाद साल 2005 में बाला देवी को अंडर-17 टीम के लिए चुना गया. तब वो 15 साल की थीं.

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रेंजर्स एफसी का रास्ता
इसके बाद से बाला देवी ने कभी मुड़कर नहीं देखा.
उनकी उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें मणिपुर पुलिस में 2010 में नौकरी भी दी गई. उन्होंने इंडियन विमेन्स लीग में तीन अलग-अलग क्लबों का प्रतिनिधित्व किया है. इसमें मणिपुर पुलिस स्पोर्ट्स क्लब के दो सीज़न भी शामिल हैं.
उन्होंने पिछले दो सीज़न से लीग में सबसे ज़्यादा स्कोर किया है. साथ ही उन्हें साल 2015 और 2016 में विमेन्स प्लेयर ऑफ़ द ईयर भी चुना गया.
जब उन्हें रेंजर्स एफसी का मौक़ा मिला तब वो मणिपुर पुलिस स्पोर्ट्स क्लब के लिए खेल रही थीं. नवंबर में कोच को उनका ट्रायल काफ़ी पसंद आया.
ये ऐतिहासिक अनुबंध बैंगलोर एफसी के ज़रिए हुआ जिसकी अपनी कोई महिला टीम नहीं है लेकिन उसकी रेंजर्स एफसी के साथ साझेदारी है.
बाला देवी कहती हैं कि वो इतनी उत्साहित हैं कि रेंजर्स के साथ खेलने के लिए इंतज़ार नहीं कर पा रही हैं. वो 10 नंबर की जर्सी पहनने के लिए बेक़रार हैं. भारत के लिए भी वो यही नंबर पहनती हैं.
बाला देवी नए देश में जाने को लेकर भी परेशान नहीं हैं.
वह कहती हैं, ''मैं सबकुछ खाती हूं. साथ ही मुझे मौसम से भी कोई दिक्क़त नहीं होगी क्योंकि मणिपुर भी ठंडी जगह है. मेरे सामने बस एक चुनौती है, वो है और बेहतर खेलना.''

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एक नया दौर
बाला देवी को उम्मीद है कि रेंजर्स में उनके खेलने से भारत में महिला फुटबॉल खिलाड़ियों को और ज़्यादा मौक़ा मिलेंगे.
वह कहती हैं कि दुनियाभर में महिला फुटबॉल में लोगों की दिलचस्पी बढ़ रही है. उन्होंने कहा, ''पिछले साल हुआ महिला वर्ल्ड कप सबसे ज़्यादा देखा गया स्पोर्ट्स ईवेंट था.''
फीफा के अनुमान के अनुसार 2019 में एक अरब से ज़्यादा लोगों ने फ्रांस में हुआ ये टूर्नामेंट देखा था. फ्रांस, अमरीका, जर्मनी और चीन सहित दुनियाभर में टीवी देखने के रिकॉर्ड टूट गए थे.
उन्हें उम्मीद है कि इस साल भारत में होने वाला अंडर-17 वर्ल्ड कप और ज़्यादा लड़कियों को फुटबॉल में आने के लिए प्रोत्साहित करेगा.
भारत में होने वाली मौजूदा फुटबॉल लीग को देखते हुए बाला देवी चाहती हैं कि यहां भी एक मज़बूत लीग हो जिसमें ''बहुत सारी युवा लड़कियां फुटबॉल खेलें''.
वह भावी महिला फुटबॉलरों को सलाह देती हैं, ''आसमान छूने की सोचो.''
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