नेहा गोयल: फ़ैक्ट्रियों में काम कर मां ने बनाया सफल महिला हॉकी खिलाड़ी

नेहा गोयल

इमेज स्रोत, BBC Hindi

इमेज कैप्शन, महिला हॉकी टीम की मिड फील्डर नेहा गोयल, 2018 में एशियाई खेलों में जीते रजत पदक के साथ.
    • Author, सूर्यांशी पांडेय
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
News image

छोटा सा घर, घर में बीमार मां और हाथ में भारत के लिए जीते बड़े-बड़े मेडल.

कहानी को कम और सरल शब्दों में कहें तो यही है 23 साल की महिला हॉकी टीम की मिड फील्डर नेहा गोयल की कहानी का सार.

लेकिन नेहा गोयल की कहानी का दायरा शब्दों के बांध तोड़ देता है और हमें मजबूर करता है कि हम इस खिलाड़ी की ज़िंदगी में झांकें और जानें आख़िर वो कौन हैं.

नेहा इस साल जुलाई के महीने में शुरू होने जा रहे 2020 टोक्यो ओलंपिक में भारतीय महिला हॉकी टीम के साथ खेलती नज़र आएंगीं.

नेहा गोयल

इमेज स्रोत, BBC Hindi

इमेज कैप्शन, सोनीपत हरियाणा में स्थित नेहा गोयल का घर

हम जब नेहा गोयल से मिलने उनके घर हरियाणा के सोनीपत पहुंचे, तो यकीन मानिए उनका घर देखकर कोई अंदाज़ा भी नहीं लगा सकता कि यहां रहने वाली लड़की ओलंपिक में भारत की ओर से खेल रही होगी.

1 नवंबर साल 2019 को भारतीय महिला हॉकी टीम ने अमरीका की टीम को एफ़आईएच क्वालीफ़ायर में 6-5 से हरा कर ओलंपिक के लिए क्वालीफ़ाई किया था.

हॉकी इंडिया

इमेज स्रोत, HOCKEY INDIA

छठी कक्षा से शुरू किया हॉकी खेलना

क्वालीफ़ायर मुक़ाबले में मिली एक ट्रॉफ़ी को दिखाते हुए नेहा गोयल की आंखों की चमक उनके हालातों से हमें एक पल के लिए पराया कर गईं.

हॉकी कब और कैसे उनके जीवन का हिस्सा बन गई, इस सवाल पर नेहा याद करती हैं कि जब वह छठी कक्षा में थीं, तब उनकी एक सहेली ने उन्हें हॉकी स्टिक थमा दी.

नेहा गोयल

इमेज स्रोत, BBC hindi

इमेज कैप्शन, नेहा गोयल की 3 बहनें हैं और वह परिवार में सबसे छोटी हैं.

नेहा बताती हैं, '' मेरी तीन बहनें हैं और मैं परिवार में सबसे छोटी हूं. पिता शराब बहुत पीते थे जिसके चलते घर का माहौल अच्छा नहीं रहता था. पिता की तरफ़ से आर्थिक मदद भी ज़्यादा नहीं मिल पाती थी. इस बीच मेरी एक दोस्त ने बताया कि हॉकी खेलने से मुझे अच्छे जूते, कपड़े पहनने को मिलेंगे.''

नेहा ने उस वक़्त अच्छे कपड़े-जूतों के लिए हॉकी खेलना शुरू किया. फिर एक ज़िला स्तर का मुक़ाबला जीतने के बाद उन्हें दो हज़ार रुपए का ईनाम मिला जिसके बाद उन्हें लगा कि शायद इस खेल के ज़रिए वह अपने घर की आर्थिक हालत सुधार सकती हैं.

नेहा गोयल

इमेज स्रोत, BBC Hindi

इमेज कैप्शन, नेहा गोयल ने समाज के तानों को नहीं, दिल की आवाज़ को सुनने का जज़्बा रखा

पिता इस खेल में नेहा को बढ़ावा नहीं देना चाहते थे, पर मां ने अपनी बेटी का पूरा साथ दिया.

वह बताती हैं कि उनके घर के आसपास रहने वाले लोगों ने मां को बहुत बार हिदायत दी कि 'बेटी को यूं बाहर मत निकालों, कहीं कोई उठाकर कभी ले जाए तो?'

मां ने समाज के तानों से ऊपर अपनी बेटी और उसके खेलने के जज़्बे को रखा.

पिता की मौत के बाद मां ने किया फ़ैक्ट्रियों में काम

धीरे-धीरे वह इस खेल को जीने लगीं और उन्हें नेशनल टीम में जगह मिली.

नेहा को इसी खेल के ज़रिए साल 2015 में रेलवे में नौकरी भी मिली.

नेहा गोयल के पिता

इमेज स्रोत, BBC

इमेज कैप्शन, नेहा गोयल के पिता की लंबी बीमारी के चलते 2017 में मौत हो गई.

नेहा घर संभालने की स्थिति में आई ही थीं कि साल 2017 में लंबी बीमारी के चलते उनके के पिता का निधन हो गया.

घर खर्च केवल नेहा के पैसों से तो पूरा हो नहीं सकता था और फिर नौकरी करते हुए हॉकी किट से लेकर खेल से जुड़ी हुई कई ज़रूरते भी सामने थीं.

नेहा गोयल
इमेज कैप्शन, नेहा गोयल की मां सावित्री देवी ने पति के मौत के बाद बेटी का सपना पूरा किया

पिता की मौत के बाद नेहा की मां ने फ़ैक्ट्रियों में काम करना शुरू किया. कभी जूतों की फ़ैक्ट्री में काम करतीं, तो कभी साइकिल के कारखाने में एक घंटे का 4 रुपए मेहनताना कमातीं.

नेहा ने कहा कि उन दिनों वो प्रैक्टिस के बाद अपनी दोनों बहनों के साथ अपनी मां की घर और फ़ैक्ट्री के काम में हाथ बटातीं.

कोच बनीं नेहा की आर्थिक ढाल

नेहा ने बताया कि उनकी कोच प्रीतम रानी सिवाच ने उनकी आर्थिक मदद की. उनकी कोच नेहा के जूते ख़राब होने पर उन्हें पैसे देतीं ताकि वह नए जूते ख़रीद सके.

नेहा गोयल
इमेज कैप्शन, नेहा गोयल अपनी कोच प्रीतम रानी सिवाच के साथ.

नेहा ने खेल के साथ-साथ अपने घर को जिस तरह से संभाला, उसकी उम्मीद 23 साल की लड़की से करना मुश्किल ही होगा.

नेहा कहती हैं कि अपनी दोनों बहनों की शादी भी उन्होंने ही कराई थी.

घर के हालातों से समझौता करने की बजाए नेहा गोयल ने हर मुश्किल का सामना डटकर किया. अपने खेल में भी उतनी ही मेहनत की.

अब ओलंपिक पदक पर है नज़र

रेलवे में सीनियर नेशनल की प्रतियोगिताओं में नेहा भाग लेतीं रहीं और हर बार उनकी टीम गोल्ड मेडल जीतती.

नेहा के मुताबिक उनकी हॉकी के मैदान में सबसे बड़ी उपलब्धि रही साल 2018 के एशियाई खेलों में भारतीय महिला हॉकी टीम के लिए फ़ाइनल के मुक़ाबले में गोल दागना जिसने भारत को एशियाई खेल में रजत पदक जिताया.

हालांकि नेहा के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि हासिल करने का मौका टोक्यो में उनका इंतज़ार कर रहा है जहां भारतीय महिला हॉकी टीम ओलंपिक पदक के लिए लड़ाई लड़ेगीं.

बीबीसी स्पोर्ट्स वूमन, BBC SPORTSWOMAN

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)