एशिया कपः भारत-पाकिस्तान मुक़ाबले का यादगार इतिहास

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- Author, तुषार त्रिवेदी
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
भारत पाकिस्तान मैच हमेशा क्रिकेट प्रशंसकों के लिए ख़ास होता है और जब दुबई या शारजाह में खेला जा रहा हो, तब तो ये थ्रिलर मैच हो जाता है. भारत पाकिस्तान मैच का भारतीयों के लिए मतलब होता है कि या तो भारत जीता या भारत हारा क्योंकि वो ये कहना नहीं चाहते कि पाकिस्तान मैच जीत गया.
पाकिस्तान में भी ऐसा ही है. इसी से पता चलता है कि भारत-पाकिस्तान मैच की क्या ख़ासियत है.
1947 में दोनों देशों के बंटवारे के बाद भारत और पाकिस्तान ने न केवल सीमाओं पर बल्कि स्टेडियम में भी तनाव महसूस किया है. चाहे क्रिकेट हो, हॉकी या कबड्डी, अगर भारत और पाकिस्तान के बीच खेला जा रहा है तो दोनों देशों के प्रशंसकों में भारी उत्साह होता है.
अब एक और मैच में भारत और पाकिस्तान की टीमें एक दूसरे का सामना करने जा रही हैं. दोनों टीमें दुबई में 19 सितंबर यानी बुधवार को एकदिवसीय मैच खेलेंगे जहां एशिया कप 2018 खेला जा रहा है.
2008 में मुंबई में आतंकवादी हमलों के बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच कोई द्विपक्षीय क्रिकेट श्रृंखला नहीं हुई है. हालांकि उन्होंने एक-दूसरे के ख़िलाफ़ अन्य देशों में कुछ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टूर्नामेंट में मैच खेले हैं.

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पिछले साल इंग्लैंड में खेली गई आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी में भारत और पाकिस्तान के बीच दो बार मैच हुआ. लीग मैच में भारत ने 124 रनों के साथ जीत हासिल की लेकिन इससे अधिक महत्वपूर्ण फ़ाइनल मैच में भारत 180 रनों से हार गया.
पिछले 11 सालों में दोनों टीमों ने एक-दूसरे के ख़िलाफ़ केवल आठ टी20 मैच खेले हैं. और आखिरी बार 2016 टी20 वर्ल्ड कप में दोनों टीमें आपस में भिड़ी थीं.
दोनों के बीच 2007 के बाद से कोई टेस्ट मैच नहीं खेला गया क्योंकि टेस्ट मैच में कोई वर्ल्ड कप या अंतरराष्ट्रीय सिरीज़ नहीं होती है.
अब जब पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर इमरान ख़ान वहां प्रधानमंत्री बन गए हैं तो क्रिकेट प्रशंसकों में एक उम्मीद जगी है कि दोनों देशों के बीच क्रिकेट को लेकर रिश्ते सुधरेंगे लेकिन उन्हें थोड़ा इंतज़ार करना पड़ेगा.

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इमरान ख़ान की कप्तानी में पाकिस्तान ने भारत के ख़िलाफ़ कई यादगार मैच खेले हैं और दोनों में कड़ा मुक़ाबला रहा है.
1983-84 में पहले एशिया कप से लेकर अब तक दोनों टीमों के बीच इस टूर्नामेंट में 11 मैच खेले गए थे और दोनों में से कोई टीम भारी पड़ती नहीं दिख रही थी क्योंकि दोनों टीमों ने 5-5 मैच जीते और एक ड्रॉ रहा.
हालांकि भारत थोड़ा आगे है क्योंकि उसने चार एशिया कप टूर्नामेंट जीते हैं और पाकिस्तान ने दो. जो एशिया कप पाकिस्तान ने जीते, दोनों बार वो एशिया कप बांग्लादेश में खेले गए थे.
लेकिन नतीजों के हिसाब से कुल मिलाकर दोनों देश लगभग बराबरी पर हैं. एशिया कप में भारत की सफलता का दर 61.90 फ़ीसदी है और पाकिस्तान की सफलता दर 62.50 फ़ीसदी है.

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चलिए इन दोनों प्रतिद्वंद्वी टीमों के बीच कुछ यादगार पलों पर एक नज़र डालते हैं-
जावेद मियांदाद का यादगार छक्का
भारत-पाकिस्तान मैचों के इतिहास में, शारजाह का एक विशेष स्थान है. ऐसा कहा जाता था कि शुक्रवार के दिन शारजाह में हो रहे मैच में पाकिस्तान टीम को हराना किसी भी टीम के लिए मुश्किल है और यहां तक कि भारत के लिए भी जीतना मुश्किल होता.
ऐसा ही एक शुक्रवार, अप्रैल 1986 का था जब मैच में भारतीय टीम ने 245 रन बनाए. ये वो दिन थे जब 225 से ऊपर का स्कोर किसी टीम को भी जीता सकता था.
सुनील गावस्कर के 92 रनों के चलते भारत मजबूत स्थिति में पहुंच गया था. रनों को पीछा करते हुए पाकिस्तान टीम ने 206 रनों के स्कोर पर 6 विकेट खो दिए थे लेकिन जावेद मियांदाद अभी भी मैदान में थे.
मैच का अंतिम ओवर आने तक भारतीय कप्तान कपिल देव के सभी दस ओवर खत्म हो चुके थे. मदन लाल और मनिंदर सिंह की भी गेंदबाज़ी ख़त्म हो चुकी थी और सिर्फ़ रवि शास्त्री ही बचे थे.

रवि शास्त्री के बजाय चेतन शर्मा को आखिरी ओवर डालने का मौका दिया गया.
पाकिस्तान को जीतने के लिए चार रन चाहिए थे. लेकिन जावेद मियांदाद ने चेतन शर्मा की गेंद पर बल्ले को हवा में उठाया और पेविलियन की तरफ़ भागने लगे.
मियांदाद का वो छक्का आज भी भारतीय प्रशंसकों को याद है.
राजेश चौहान ने किया हैरान
भारत ने मियांदाद के उस छक्के का बदला 1997 में कराची में लिया. भारत 266 रनों के स्कोर का पीछा कर रहा था.
विनोद कांबली मज़बूती से मैदान में डटे थे और भारत की बल्लेबाज़ी बढ़िया चल रही थी.
लेकिन सभी के लिए हैरानी का पल रहा जब स्पिनर सक़लैन मुश्ताक़ की गेंद पर छक्का लगा कर भारत को जीत दिलाई.

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जडेजा-वक़ार और प्रसाद-सोहेल की टक्कर
यह 1996 का विश्व कप क्वार्टर फ़ाइनल था और बैंगलोर के एम चिन्नासामी स्टेडियम के मैदान पर दोनों टीमें सेमीफ़ाइनल में जाने के लिए मुक़ाबला कर रही थीं.
पाकिस्तानी टीम भारत में खेली हुई सभी टीमों की तुलना में काफ़ी मज़बूत थी.
भारतीय बल्लेबाज़ी संघर्षरत थी. आखिरी कुछ ओवर ही बचे थे और 250 रनों तक ही पहुंचने की उम्मीद थी. लेकिन अजय जडेजा के पिच पर आते ही बाज़ी पलट गई.
जडेजा ने आखिरी 3-4 ओवर्स में 25 गेंदों पर 45 रन बना डाले. उन्होंने वक़ार यूनुस के ओवर में 22 रन बना लिए और भारत का स्कोर 287 पर पहुंच गया.

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इसके बाद पाकिस्तान के आमिर सोहेल ने आक्रामक बल्लेबाज़ी करते हुए स्कोर का पीछा करना शुरू किया. वेंकेटेश प्रसाद के ओवर में उन्होंने कई चौके लगाए और वेंकेटेश प्रसाद को कई बार पेवेलियन की तरफ़ इशारा भी किया लेकिन अगले ही ओवर में उन्हें आउट कर दिया. प्रशंसकों में मैच के लिए उत्साह देखते ही बनता था.
ये वही मैच था जिसमें जावेद मियांदाद रन आउट हुए थे, जबकि मियांदाद विकेटों के बीच तेज़ भागने के लिए जाने जाते थे.
जब बिशन सिंह बेदी ने टीम को वापस बुला लिया
यह वो वक्त था जब एक दिवसीय मैच लोकप्रिय हो रहे थे और उन दिनों भारत-पाकिस्तान एक दिवसीय श्रृंखला खेल रहे थे. नवंबर 1978 में पाकिस्तान को उसी की सरज़मीं पर साहिवाल स्टेडियम में मैच जीतने के लिए 22 रनों की ज़रूरत थी और सिर्फ़ दो विकेट बचे थे.
अंशुमन गायकवाड़ और गुंडप्पा विश्वनाथ मज़बूती से भारत के लिए बल्लेबाज़ी कर रहे थे लेकिन दबाव में पाकिस्तान के गेंदबाज़ इमरान ख़ान और सरफराज़ नवाज़ ने बाउंसर फेंकने शुरू किये.

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भारतीय टीम 16 साल के अंतराल के बाद पाकिस्तान गई थी और सभी की नज़रें भारत पर टिकी थीं. राजनीतिक संबंध तनावपूर्ण चल रहे थे.
लेकिन बहुत दबाव की वजह से पाकिस्तानी गेंदबाज़ हार मानने को तैयार नहीं थे.
पाकिस्तानी गेंदबाज़ों के बाउंसर की वजह से भारतीय कप्तान बिशन सिंह बेदी ने अपनी टीम को मैदान से पवेलियन में वापस बुला लिया और अंपायरों ने पाकिस्तान को विजेता घोषित कर दिया.

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वर्ल्ड कप में भारत रहा हमेशा आगे
भारत हमेशा पाकिस्तान के ख़िलाफ़ विश्व कप में सफल रहा है. विश्व कप में दोनों टीमों के बीच खेले गए सभी मुक़ाबले भारत की झोली में गए हैं.
शायद 1996 में बैंगलोर के क्वार्टर फ़ाइनल और 2003 में सेंचुरियन का मुक़ाबला कभी ना भूले जाने वाले मैच हैं.
सेंचुरियन में अनवर सईद के शतक के साथ पाकिस्तान ने 273 रन बनाए. लेकिन भारतीय सलामी बल्लेबाज़ सचिन तेंदुलकर और वीरेंद्र सहवाग ने हमलावर तरीके से खेला और पाकिस्तानी गेंदबाज़ों वकार यूनुस, वसीम अकरम और शोएब अख़्तर को थका दिया.
सचिन तेंदुलकर ने तो वकार की गेंद पर थर्डमैन की तरफ़ छक्का मारा. हालांकि सचिन अपना शतक पूरा नहीं कर सके लेकिन उनके 75 गेंदों में 98 रनों की बदौलत भारत को आसान जीत हासिल हुई.
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(तुषार त्रिवेदी 'नवगुजरात समय' में स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हैं)
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