प्रियंका चोपड़ा ईरान की महिलाओं का समर्थन कर ख़ुद निशाने पर आईं

प्रियंका चोपड़ा

इमेज स्रोत, Leigh Vogel/POOL/EPA-EFE/REX/Shutterstock

ईरान में हिजाब के ख़िलाफ़ महिलाओं के विरोध-प्रदर्शन को समर्थन देने के बाद अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा ख़ुद ही निशाने पर आ गई हैं. हालांकि कई लोग प्रियंका की प्रशंसा भी कर रहे हैं.

बीते शुक्रवार को प्रियंका चोपड़ा ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट डाली थी, जिसमें उन्होंने ईरान में महसा अमीनी की मौत के बाद हो रहे विरोध प्रदर्शनों में शामिल महिलाओं के नाम एक संदेश लिखा था.

अब सोशल मीडिया पर एक तबक़ा प्रियंका चोपड़ा को 'पाखंडी' कह रहा है तो वहीं एक पक्ष उन्हें ग़लत काम के ख़िलाफ़ खड़ी होने वाली महिला बता रहा है.

लेखक एंड्री बोर्गेस ट्वीट करते हैं कि 'ईरानी महिलाओं के लिए प्रियंका चोपड़ा के बोलने को पूरी तरह सराहा जाना चाहिए लेकिन उसी समय भारत में इसी तरह की दुर्दशा से जूझ रही महिलाओं और ख़ासकर मुस्लिम महिलाओं के लिए न बोलना पाखंड को भी दिखाता है.'

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पत्रकार राणा अय्यूब ने ट्वीट किया है कि 'ईरानी महिलाओं को लेकर प्रियंका चोपड़ा की चिंताओं की प्रशंसा की जानी चाहिए लेकिन बिलकिस बानो और मुसलमानों के सरकारी उत्पीड़न ख़ासकर के उनके अपने देश में हाशिए पर पड़ी महिलाओं को लेकर चुप्पी पर उन्हें आत्मविश्लेषण नहीं करना चाहिए?'

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वहीं सामाजिक कार्यकर्ता नाबिया ख़ान ट्वीट करती हैं कि 'प्रियंका चोपड़ा आपका एक्टिविज़म सुविधाजनक है. इसका कोई मतलब नहीं है कि जब आप भारत की हिजाबी महिलाओं की दुर्दशा से नज़र फेर लेती हैं, जिन्हें अपने सिर पर दुपट्टा रखने के लिए पढ़ाई से महरूम कर दिया जाता है और हिंदुत्व के गुंडे और सरकार उनका उत्पीड़न करते हैं. आप एक पाखंडी हैं.'

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मुकर्रम नामक एक यूज़र ट्वीट करते हैं कि 'प्रियंका चोपड़ा ने भारत में बलात्कारियों की रिहाई पर चुप्पी बनाए रखी. वो बेहद पाखंडी और अवसरवादी महिला हैं.'

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पत्रकार सैयद ज़फर मेहदी ट्वीट करते हैं कि 'प्रियंका चोपड़ा को नरेंद्र मोदी के साथ फोटो खिंचवाने और उन्हें अपनी शादी के रिसेप्शन में आमंत्रित करने पर कोई हिचक नहीं है बावजूद इसके कि बीजेपी सरकार भारत में हिजाब के ख़िलाफ़ क्रूर कार्रवाई कर रही है, लेकिन उनमें सुदूर ईरान में एंटी-हिजाब प्रदर्शनों का समर्थन करने का उतावलापन ज़रूर है.'

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प्रियंका की तारीफ़ भी कर रहे हैं लोग

बीबीसी हिंदी

वहीं एक धड़ा वो भी है जो खुलकर ईरान में प्रदर्शनकारी महिलाओं का समर्थन करने पर प्रियंका चोपड़ा की तारीफ़ कर रहा है.

फ़िल्म निर्माता अशोक पंडित ने ट्वीट किया है कि 'महसा अमीनी की मौत के बाद प्रदर्शन कर रहीं ईरानी महिलाओं के समर्थन में आने के लिए प्रियंका चोपड़ा जी को बधाई. आपने एक बार फिर साबित कर दिया कि आप में ग़लत काम के ख़िलाफ़ खड़े होने का जज़्बा है. उम्मीद है कि फ़िल्म और टीवी इंडस्ट्री में आपको लोग फ़ॉलो करेंगे.'

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चर्चित लेखक तारिक फ़तेह ने ट्वीट किया है कि 'प्रियंका चोपड़ा सत्य और महिला अधिकारों की तरफ़ हैं. उन पर कोई हमला तभी करेगा जब वो महिलाओं को पूरा इंसान नहीं मानता होगा.'

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पहले भी विवादों में रह चुकी हैं प्रियंका

बीबीसी हिंदी

26 फ़रवरी 2019 को बालाकोट में भारतीय वायु सेना की एयर स्ट्राइक के बाद प्रियंका चोपड़ा ने ट्वीट किया था जिसमें उन्होंने सिर्फ़ जय हिंद लिखा था और साथ में हैशटैक इंडियन आर्म्ड फ़ोर्सेज़ इस्तेमाल किया था.

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इसके बाद कई लोगों ने सोशल मीडिया पर प्रियंका चोपड़ा पर आरोप लगाए कि यूएन की गुडविल ऐम्बैस्डर होते हुए वो युद्ध को बढ़ावा दे रही हैं जबकि उन्हें शांति की अपील करनी चाहिए.

लॉस एंजिलिस में एक इंटरव्यू के दौरान एक पाकिस्तानी महिला ने प्रियंका चोपड़ा पर युद्ध को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए सवाल पूछा था.

इस पर प्रियंका चोपड़ा ने जवाब दिया कि उन्हें नहीं लगता है कि इस बारे में बात करने का यह उपयुक्त समय है.

उन्होंने कहा कि जो कुछ हुआ वो बहुत दुर्भाग्यपूर्थ था और वो कभी भी युद्ध समर्थक नहीं रही हैं और न ही उनके बयान में ऐसा कुछ था.

इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि इन सभी सालों में उनका काम ही इसका प्रमाण है और उन्हें नहीं लगता है कि उन्हें ये सब दोहराने की ज़रूरत है.

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प्रियंका चोपड़ा ने अब क्या कहा?

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अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा ने शुक्रवार को इंस्टाग्राम पर विरोध प्रदर्शनों में अपनी आवाज बुलंद करने वाली महिलाओं के नाम एक संदेश लिखा था.

उन्होंने लिखा था, "ईरान और दुनिया भर में महिलाएं खड़ी हो रही हैं और अपनी आवाज़ उठा रही हैं. महिलाएं सार्वजनिक तौर पर अपने बाल काटने से लेकर कई अलग-अलग तरीकों से विरोध प्रदर्शन कर रही हैं. ये सब महसा अमीनी के लिए हो रहा है. उनकी जान ईरान की मॉरेलिटी पुलिस ने हिजाब ठीक से ना पहनने के कारण ले ली. जिन आवाज़ों को ज़बर्दस्ती दशकों तक चुप रखा जाता है, जब वे बोलती हैं तो ज्वालामुखी की तरह फूटती हैं और उन्हें रोका नहीं जा सकता."

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"मैं आपके साहस और जो आप पाना चाहती हैं उसे देखकर हैरान हूँ. पितृसत्तात्मक व्यवस्था को चुनौती देना और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना, अपनी जान जोखिम में डालना आसान नहीं है, लेकिन आप साहसी महिलाएं हैं जो हर दिन ऐसा कर रही हैं. चाहे इसके लिए कितनी भी क़ीमत क्यों ना चुकानी पड़े."

उन्होंने लिखा था, "यह तय करने के लिए कि इस आंदोलन का दूर तक क्या प्रभाव होगा, हमें उनकी आवाज़ों को सुनना चाहिए, मुद्दों को समझना चाहिए और फिर अपनी सामूहिक आवाज़ों के साथ जुड़ना चाहिए. हमें उन सभी को भी शामिल करना चाहिए जो दूसरों को इसमें शामिल करने के लिए प्रभावित कर सकें."

"इस ज़रूरी लड़ाई में अपनी आवाज़ को शामिल करें. जानकारी लेते रहने के साथ मुखर रहें, ताकि इन आवाज़ों को अब चुप रहने के लिए मजबूर न किया जा सके. मैं आपके साथ हूं."

महसा अमीनी

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कौन थीं महसा अमीनी?

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ईरान में 22 साल की महसा अमीनी को कथित तौर पर हिजाब पहनने के नियम के उल्लंघन के लिए 13 सितंबर को हिरासत में लिया गया था.

तीन दिन बाद कुर्दिस्तान प्रांत के शहर साक़िज़ की रहने वाले कुर्द महिला महसा अमीनी ने तेहरान में एक अस्पताल में दम तोड़ दिया. वे तीन दिनों तक कोमा में रही थीं.

ईरानी अधिकारियों का दावा है कि महसा अमीनी के साथ किसी तरह का अमानवीय व्यवहार नहीं किया गया और कस्टडी में लिए जाने के बाद 'अचानक हार्ट फ़ेलियर' के कारण उनकी मौत हो गई.

लेकिन महसा के पिता अमजद का कहना है कि महसा का 17 साल का भाई आराश वहीं पर था और उसे बताया गया कि पुलिस ने महसा को पीटा था.

वो कहते हैं, "मेरा बेटा उसके साथ था. कुछ चश्मदीदों ने मेरे बेटे को बताया महसा को वैन में और पुलिस स्टेशन में पीटा गया."

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