ईरान: महसा अमीनी के पिता ने कहा- बेटी को देखना चाहता था, लेकिन अंदर नहीं जाने दिया

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22 साल की महसा अमीनी की मौत के बाद ईरान में देशव्यापी विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. उनके पिता ने अधिकारियों पर झूठ बोलने का आरोप लगाया है.
बीबीसी फ़ारसी सेवा के साथ एक इंटरव्यू में महसा अमीनी के पिता अमज़द अमीनी ने कहा कि उन्हें अपनी बेटी की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तक नहीं दी गई. उन्होंने इस बात से भी इनकार किया कि उनकी बेटी की तबीयत ठीक नहीं थी.
उन्होंने कहा कि चश्मदीदों ने उनके परिवार को बताया है कि महसा को पुलिस कस्टडी में पीटा गया था. हालांकि अधिकारियों ने इससे इनकार किया है.
महसा को कथित तौर पर हिजाब पहनने के नियम के उल्लंघन के लिए हिरासत में लिया गया था. ईरान के कुर्दिस्तान प्रांत के शहर साक़िज़ की रहने वाले कुर्दी महिला महसा अमीनी ने शुक्रवार को तेहरान में एक अस्पताल में दम तोड़ दिया. वो तीन दिनों तक कोमा में रही थीं.

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क्या है पूरा मामला?
ईरान के कुर्दिस्तान प्रांत की 22 वर्षीया महसा अमीनी की पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी.
महसा को तेहरान में 'हिजाब से जुड़े नियमों का कथित तौर पर पालन नहीं करने के लिए' गिरफ़्तार किया गया था.
तेहरान की मोरैलिटी पुलिस का कहना है कि 'सार्वजनिक जगहों पर बाल ढकने और ढीले कपड़े पहनने' के नियम को सख़्ती से लागू करने के सिलसिले में महसा को हिरासत में लिया गया था.
इसे लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अगर आज उन्होंने विरोध नहीं किया तो कल कोई और इसका शिकार हो सकता है.
फ़्रांस के विदेश मंत्रालय ने इसे शर्मनाक घटना कहा है और इस मामले की जांच की मांग की है.
यूरोपीय संघ के विदेश संबंधों की परिषद ने भी इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है.
अमेरिका ने महसा अमीनी की मौत के लिए ज़िम्मेदारी तय करने की मांग की है.

गिरफ़्तारी

ईरानी अधिकारियों का दावा है कि महसा अमीनी के साथ किसी तरह का अमानवीय व्यवहार नहीं किया गया और कस्टडी में लिए जाने के बाद 'अचानक हार्ट फ़ेलियर' के कारण उनकी मौत हो गई
लेकिन महसा के पिता अमज़द का कहना है कि महसा का 17 साल का भाई आराश वहीं पर था और उसे बताया गया कि पुलिस ने महसा को पीटा था.
वो कहते हैं, "मेरा बेटा उसके साथ था. कुछ चश्मदीदों ने मेरे बेटे को बताया महसा को वैन में और पुलिस स्टेशन में पीटा गया.
"मेरे बेटे ने उनसे महसा को न ले जाने की गुज़ारिश की, लेकिन उसे भी मारा-पीटा गया. उसके कपड़े फाड़ दिए गए. मैंने उन्हें कहा कि मुझे सिक्योरिटी अफ़सर के बॉडी कैम का फ़ुटेज दिखाएं. लेकिन उन्होंने कहा कि उसकी बैटरी ख़त्म हो गई थी."
ईरानी अधिकारियों का कहना है कि गिरफ़्तारी के समय महसा ने अभद्र कपड़े पहने थे. हालांकि उनके पिता का कहना है कि महसा ने एक लंबा ओवरकोट पहना था.

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डॉक्टरों ने रोका

अमज़द का कहना है कि मेडिकल स्टाफ़ ने उन्हें अपनी बेटी के शव के पास नहीं जाने दिया. उन्होंने कहा, "मैं अपनी बेटी को देखना चाहता था, लेकिन वो मुझे अंदर नहीं जाने दे रहे थे."
अमज़द के मुताबिक़ जब उन्होंने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मांगी, तो डॉक्टर ने कहा, "मुझे जो लिखने का मन होगा, मैं लिखूंगा. इसका आपसे कोई लेना-देना नहीं है."
अमज़द के मुताबिक़ महसा की अटॉप्सी से जुड़ी कोई भी जानकारी परिवार को नहीं दी गई है. अमज़द ने अपनी बेटी का शव तभी देखा जब उसे दफ़नाने के लिए पूरी तरह से ढक दिया गया था और केवल तलवे दिख रहे थे.
उनके मुताबिक़, "महसा के तलवों पर चोट के निशान थे. मैंने डॉक्टर से कहा कि वो उसके पांवों की जांच करें."
अमज़द के मुताबिक़ अधिकारियों ने उनसे कहा कि वो चोट के कारणों की जांच करेंगे, लेकिन उनकी तरफ़ से कोई जवाब नहीं आया. उन्होंने कहा, "उन्होंने नज़रअंदाज़ किया. अब वो झूठ बोल रहे हैं."
इससे पहले तेहरान प्रांत के फ़ोरेंसिक मेडिसिन के डायरेक्टर जनरल ने एक बयान जारी कर कहा था, "महसा के सिर या चेहरे या आंखों के आसपास चोट के कोई निशान नहीं मिले हैं. महसा के सिर पर किसी तरह का फ़्रैक्चर नहीं पाया गया है."
अधिकारियों के मुताबिक़ किसी तरह के आंतरिक चोट के निशान भी नहीं मिले हैं.
स्वास्थ्य से जुड़े आरोप

अमज़द ने इस बात की भी आलोचना की कि कहा जा रहा है कि उनकी बेटी को स्वास्थ्य समस्याएं थीं जो उसकी मौत का कारण हो सकती हैं.
तेहरान प्रांत के फ़ोरेंसिक मेडिसिन के डायरेक्टर जनरल का कहना है कि महसा की आठ साल की उम्र में ब्रेन सर्जरी हुई थी.
हालांकि अमज़द का आरोप है कि ये झूठ है. वो कहते हैं, "पिछले 22 सालों में ख़ांसी सर्दी जैसी मामूली बीमारियों के अलावा महसा को कोई दूसरी बीमारी नहीं हुई.
बीबीसी ने महसा की दो क्लासमेट से भी बात की. उन्होंने भी कहा कि उन्हें महसा के कभी भी अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी नहीं थी.
महसा के बारे में ये भी दावा किया गया कि वो बार-बार बेहोश हो जाती थीं और हाल में ही एक दुकान में काम करते समय गिर गई थीं. अमज़द ने इसे ग़लत बताया है.

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अधूरा सपना

महसा के परिवार के मुताबिक़, वो अगले ही महीने से यूनिवर्सिटी में पढ़ाई शुरू करने वाली थीं और कोर्स शुरू होने से पहले तेहरान की यात्रा पर थीं.
अमज़द कहते हैं, "वो माइक्रोबायोलॉजी पढ़ना चाहती थी, डॉक्टर बनना चाहती थी. उसका ये सपना कभी पूरा नहीं हो पाया."
वो कहते हैं, "उसकी मां बीमार है. उसकी कमी महसूस होती है. इसी सप्ताह उसका 23वां जन्मदिन था."
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मोरैलिटी पुलिस क्या है?

बीबीसी मॉनिटरिंग की एक रिपोर्ट के अनुसार, साल 1979 की क्रांति के बाद से ही ईरान में सामाजिक मुद्दों से निपटने के लिए 'मोरैलिटी पुलिस' कई स्वरूपों में मौजूद रही है.
इनके अधिकार क्षेत्र में महिलाओं के हिजाब से लेकर पुरुषों और औरतों के आपस में घुलने-मिलने का मुद्दा भी शामिल रहा है.
लेकिन महसा की मौत के लिए ज़िम्मेदार बताई जा रही सरकारी एजेंसी 'गश्त-ए-इरशाद' ही वो मोरैलिटी पुलिस है जिसका काम ईरान में सार्वजनिक तौर पर इस्लामी आचार संहिता को लागू करना है.
'गश्त-ए-इरशाद' का गठन साल 2006 में हुआ था. ये न्यायपालिका और इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स से जुड़े पैरामिलिट्री फ़ोर्स 'बासिज' के साथ मिलकर काम करता है.
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