कर्नाटक के महमूद गवां मदरसे में किसने की पूजा और लगाए नारे?

महमूद गवां मदरसे में ज़बर्दस्ती घुसकर पूजा करते लोग

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    • Author, इमरान क़ुरैशी
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए

कर्नाटक के बीदर ज़िले में भारतीय पुरातत्व विभाग की ओर संरक्षित ऐतिहासिक स्मारक महमूद गवां मदरसे में कुछ लोगों के जबरन घुसकर पूजा करने के मामले में चार लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.

ये घटना बुधवार और गुरुवार की दरमियानी रात लगभग दो बजे की है जब कुछ लोग हिंदू देवी की मूर्ति को विसर्जन के लिए ले जा रहे थे.

हालांकि, ये बताया जा रहा है कि साल में दो बार कुछ लोगों का इस इमारत में घुसकर पेड़ की पूजा करना सामान्य माना जाता है.

कर्नाटक के एडीजीपी (क़ानून-व्यवस्था) आलोक कुमार ने बीबीसी हिंदी को बताया है, "पहले ये आम बात हुआ करती थी कि कुछ लोग मदरसा परिसर में घुसकर एक पेड़ की पूजा करते थे. इस बार भारी संख्या में लोग मदरसे में घुसे और मीनार के बगल में पूजा की क्योंकि जिस पेड़ की पूजा की जाती थी वो गिर गया है."

पुलिस ने बताया है कि इस मामले में कुछ लोगों को गिरफ़्तार किया गया है. इसके साथ ही मदरसे में स्थित मस्जिद में जुमे की नमाज़ के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा के इंतज़ाम किए गए हैं.

ऐतिहासिक इमारत

इस मदरसे को ईरानी व्यापारी महमूद गवां ने छह सौ साल पहले बनवाया था. वह मौजूदा तुर्कमेनिस्तान और मंगोलिया की ओर से होते हमलों से बचकर बहमनी साम्राज्य के दौर में भारत पहुंचे थे. यह उस दौर में शिक्षा का केंद्र हुआ करता था.

कर्नाटक की सेंट्रल यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर अब्दुल माजिद मनियार ने बीबीसी हिंदी को बताया, "इस मदरसे में सिर्फ़ धार्मिक शिक्षा ही नहीं दी जाती थी. ये एक विश्वविद्यालय था जहां रसायन, भूगर्भ शास्त्र से लेकर दर्शनशास्त्र आदि पढ़ाया जाता था. इसके साथ ही यहां अलग-अलग तरह के हुनर हासिल करने की ट्रेनिंग भी दी जाती थी."

इस इमारत की सबसे ख़ास बात इसकी वास्तुकला है जो भारतीय और इस्लामिक वास्तुकला का मिश्रण है. स्मारक का सबसे ख़ास हिस्सा सौ फ़ीट ऊंची मीनार है जिसे आम लोग चमकते टाइल्स की वजह से 'कांच का खंबा' कहते हैं.

महमूद गवां मदरसा

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साल 2005 में इस इमारत को स्मारक घोषित करके भारतीय पुरातत्व विभाग के सुपुर्द कर दिया गया था. लेकिन एक स्थानीय नागरिक ने नाम न बताने की शर्त पर कहा है कि केंद्र सरकार ने स्मारक की सुरक्षा के लिए ज़रूरी इंतज़ाम नहीं किए हैं.

ये मदरसा और मस्जिद बहमनी साम्राज्य की निशानी है जिसने दक्कन पर शासन किया था और उसकी राजधानी बीदर थी.

मदरसा बोर्ड के सदस्य मोहम्मद शम्सुद्दीन की शिकायत पर दर्ज की गई एफ़आईआर में बताया गया है कि भीड़ जब ताला बंद गेट के पास पहुंची तो वहां कुछ सुरक्षाकर्मी खड़े थे जिन्हें भीड़ धक्का देकर मदरसा परिसर में घुस गई और वहां पूजा की.

शम्सुद्दीन ने बीबीसी हिंदी को बताया, ''वे ज़बर्दस्ती मदरसा परिसर में घुस गए थे और मस्जिद के गेट पर चंदन फेंका और नारेबाज़ी की. पहले कुछ लोग आकर पेड़ की पूजा किया करते थे.''

एफ़आईआर में बताया गया है कि कुछ लोग शहर में शांति और सौहार्द बिगाड़कर हिंसा फैलाने के लिए चौबारा परिसर में मूर्ति एवं तस्वीरें लगा रहे हैं और धार्मिक और सरकारी स्मारकों में घुसकर नारेबाज़ी कर रहे हैं.

एफ़आईआर में ये भी लिखा है "आपकी जानकारी में ये बात भी लाई जा रही है कि इन लोगों ने देश के ख़िलाफ़ नारे लगाकर दूसरे समुदायों को भड़काने की कोशिश की ताकि वे भी देश-विरोधी नारेबाज़ी करें. इन लोगों ने एएसआई संरक्षित इमारत महमूद गवां मदरसा और मस्जिद में कूड़ा फेंककर उसे नुक़सान पहुंचाया है."

इस एफ़आईआर में उन लोगों के नाम भी दर्ज किए गए हैं जो कथित रूप से उस वक़्त मदरसा परिसर में घुसे थे जब एक पुलिस जीप धार्मिक जुलूस के साथ चल रही थी.

पुलिस ने आईपीसी की धाराओं 143, 147, 153, 295ए और 149 के तहत मामला दर्ज किया है.

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