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बुधवार, 22 अक्तूबर, 2008 को 08:20 GMT तक के समाचार
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'मानव सहित यान भेजने और ऊर्जा क्षेत्र में आगे बढ़ेंगे...'

चंद्रायन
चंद्रयान-1 चंद्रमा की सतह से सौ किलोमीटर ऊपर स्थित रहेगा
भारत के मानवरहित चंद्रयान-1 के कक्षा में सफ़लतापूर्वक स्थापित हो जाने के बाद भारत न सिर्फ़ चाँद पर मानव सहित यान भेजने में सफल होगा बल्कि चाँद पर ऊर्जा के क्षेत्र में भी अहम अनुसंधान कर सकने में कामयाब होगा.

ऐसा मानना है भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष जी माधवन नायर का, जो अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में इसे एक अहम उपलब्धी को तौर पर देखते हैं.

सफल प्रक्षेपण के बाद जी माधवन नायर ने अपनी पहली प्रतिक्रिया देते हुए कहा है, "पहले चरण का उद्देश्य था कि चंद्रयान को सफलता के साथ प्रक्षेपित किया जा सके और अपनी पहली कक्षा में स्थपित हो सके. ऐसा हो गया है और हम अपने पहले और सबसे कठिन उद्देश्य में सफल हो गए."

इस समय क्यों?
 साठ के दशक में अमरीका में वैज्ञानिक चाँद को जानना चाहते थे कि मिट्टी और जलवायु कैसी है. इसके बाद कुछ और चीज़ों को लेकर शोध होते रहे हैं. हाल के वर्षों में ऊर्जा संकट को देखते हुए चंद्रयान पर हिलियम-3 और अन्य ऊर्जा विकल्पों की खोज के काम में तेज़ी आई है और दुनिया के देशों में इसी की प्रतिस्पर्धा है. ऐसे में भारत का चंद्रयान मिशन सही समय पर कई मायनों में, कई दिशाओं में अच्छा रहेगा
इसरो अध्यक्ष माधवन नायर

नायर का कहना था, "पिछले दिनों हम लोग कई प्रतिकूल चुनौतियों से जूझ रहे थे - बारिश, बिजली और तेज़ हवा जैसी चुनैतियाँ हमारे सामने रहीं, फिर भी हम चंद्रयान 1 का प्रक्षेपण सफलतापूर्वक कर पाए."

'यह तो शुरुआत है'

इसरो के अध्यक्ष ने बीबीसी को बताया कि प्रक्षेपण के तुरंत बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से उनकी बात हुई. बातचीत में प्रधानमंत्री ने वैज्ञानिकों और अन्य लोगों को धन्यवाद दिया और देश के लोगों को इस सफल प्रक्षेपण की बधाई दी.

नायर के अनुसार चंद्रमा की ओर भारत के अभियान की दिशा में चंद्रयान-1 का प्रक्षेपण एक शुरूआत है.

उनका कहना था, "अगले दस वर्षों के भीतर ही भारत अंतरिक्ष में मानव सहित अंतरिक्ष यान का प्रक्षेपण कर पाने में सफल होगा. वर्ष 2009 में आधुनिक तकनीक वाले जीएसएलवी लॉंचर की मदद से चंद्रयान-2 का भी प्रक्षेपण किया जाएगा."

चंद्रयान
भारत दुनिया का छठा ऐसा देश है जिसे ये उपलब्धी हासिल हुई

जब उनसे पूछा गया कि अंतरिक्ष कार्यक्रम के संदर्भ में भारत की निर्भरता अन्य देशों पर कितनी है, तो अन्होंने कहा, "भारत पूरी तरह से अपने पैर पर खड़े होने लिए के लिए तैयार है और तमाम चुनौतियों के बावजूद हम आधुनकि तकनीक पैदा कर पाने में सफल रहे हैं."

पत्रकारों ने जब ये सवाल उठाया कि ग़रीबी रेखा के नीचे रह रहे करोड़ों लोगों वाले देश में कई करोड़ो की अंतरिक्ष परियोजनाओं की क्या सार्थकता है तो अन्होंने कहा, "अंतरराष्ट्रीय जगत में भारत ही ऐसा देश है जिसका अंतरिक्ष अनुसंधान कार्यक्रम सबसे ज़्यादा आम लोगों के हित में काम कर रहा है."

'80 प्रतिशत आम जनता पर'

नायर ने बताया कि इसरो को मिल रहे अर्थिक अनुदान का 80 प्रतिशत देश के आम लोगों की बेहतरी पर खर्च किया जाता है और इसरो सरकार से मिलने वाले अनुदान की तुलना में 1.5 गुणा देश के लोगों को दे रहा है.

 अगले दस वर्षों के भीतर ही भारत अंतरिक्ष में मानव सहित अंतरिक्ष यान का प्रक्षेपण कर पाने में सफल होगा. वर्ष 2009 में आधुनिक तकनीक वाले जीएसएलवी लॉंचर की मदद से चंद्रयान-2 का भी प्रक्षेपण किया जाएगा
इसरो अध्यक्ष माधवन नायर

एक वरिष्ठ वैज्ञानिक के अनुसार अंतरिक्ष यान में किसी मानव को भेजने के लिए वर्तमान आधारभूत मॉडल में कुछ परिवर्तन करने की ज़रूरत है जैसे आकार, डिज़ाईन और गुणवत्ता में सुधार. उनका कहना था कि ये सुधार क्या होगा इसके अध्ययन का काम पूरा कर लिया गया है और अब इनको योजनाबद्ध तरीक़े से साकार करने की दिशा में काम किया जा रहा है.

बीबीसी की तरफ़ से इसरो के अध्यक्ष माधवन नायर से सवाल किया गया कि दुनिया के कई देश चाँद पर अपनी-अपनी तरह से अनुसंधान कर रहे हैं तो भारत अलग क्या कर रहा है?

नायर का जवाब था, "साठ के दशक में अमरीका में वैज्ञानिक चाँद को जानना चाहते थे कि मिट्टी और जलवायु कैसी है. इसके बाद कुछ और चीज़ों को लेकर शोध होते रहे हैं. हाल के वर्षों में ऊर्जा संकट को देखते हुए चंद्रयान पर हिलियम-3 और अन्य ऊर्जा विकल्पों की खोज के काम में तेज़ी आई है और दुनिया के देशों में इसी की प्रतिस्पर्धा है. ऐसे में भारत का चंद्रयान मिशन सही समय पर कई मायनों में, कई दिशाओं में अच्छा रहेगा. "

भारतीय रॉकेटभारत का अंतरिक्ष सफ़र
भारत ने वर्ष 1963 में अंतरिक्ष में अपनी पहली दस्तक दी थी.
पीएसएलवीभारत की ऊँची उड़ान
सूचना प्रौद्योगिकी में भारत पहचान बना चुका है. अब अंतरिक्ष बाज़ार की बारी है.
चाँद चाँद पर उपकरण
एक भारतीय यान यूरोपीय अनुसंधान उपकरणों को चंद्रमा पर ले जाएगा.
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