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इसरो के यान का सफल परीक्षण | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का कहना है कि अंतरिक्ष यान के दोबारा पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने से जुड़ी तकनीक का उसने सफलतापूर्वक परीक्षण किया है. ये अंतिरक्ष यान सोमवार को पृथ्वी के वायुमंडल में लौट आया और बंगाल की खाड़ी में जाकर गिरा. इसरो के अधिकारियों का कहना है कि ये परीक्षण सफल रहा है. इस यान को तीन अन्य यानों समेत 10 जनवरी को श्रीहरिकोटा से रॉकेट के ज़रिए अंतरिक्ष में भेजा गया था. यान को बंगाल की खाड़ी से निकालने की कोशिश में भारतीय तटरक्षक बल इसरो की मदद कर रहा है. अंतरिक्ष यान का पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश करना और फिर उस यान को ढूँढना किसी भी मानवसंचालित अंतरिक्ष अभियान का अहम हिस्सा है. ये पहली बार है जब भारत ने इस तरह का परीक्षण किया है ताकि ये पता चलाया जा सके कि तापमान में बदलाव कैसे होता है और उसका यान पर क्या असर पड़ता है. इस परीक्षण के बाद भारत अमरीका, फ़्रांस, रूस, चीन और जापान जैसे देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है जिनके पास ये तकनीक है. भारत वर्ष 2008 में चाँद पर एक मानवरहित अंतरिक्ष अभियान भेजने के तैयारी कर रहा है. भारत ने देश में ही बने रॉकेटों से सफलतापूर्वक कई उपग्रह प्रक्षेपित किए हैं. विश्व में उपग्रह प्रक्षेपण के लिए करीब दो अरब डॉलर का बाज़ार है और भारत का इरादा उस बाजा़र में बड़ी हिस्सेदारी हासिल करने का है. | इससे जुड़ी ख़बरें चीन के मिसाइल परीक्षण से बढ़ी चिंता19 जनवरी, 2007 | पहला पन्ना चार उपग्रहों का एक साथ प्रक्षेपण10 जनवरी, 2007 | विज्ञान अमरीका ने अंतरिक्ष नीति कड़ी की18 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना रॉकेट फटा, इनसैट-4सी का प्रक्षेपण नाकाम10 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस इनसैट-4ए का सफल प्रक्षेपण22 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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