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रॉकेट फटा, इनसैट-4सी का प्रक्षेपण नाकाम | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय प्रक्षेपण यान जीएसएलवी के रास्ता भटकने और इसमें विस्फोट के साथ ही संचार उपग्रह इनसैट-4सी का प्रक्षेपण असफल हो गया है. आँध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से संचार उपग्रह इनसैट-4सी को सोमवार शाम भारतीय समयानुसार 5.37 बजे छोड़ा गया. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो के मुताबिक़ प्रक्षेपण के 17 वें सेकेंड में यह हादसा हुआ. इसे ले जाने वाला रॉकेट जीएसएलवी निर्धारित दिशा से भटक गया और हवा में ही इसमें विस्फोट हो गया. इसरो के मुताबिक़ रॉकेट से उपग्रह के अलग होने की प्रक्रिया के पहले चरण में ही यह हादसा हुआ. विस्फोट के बाद लगभग 404 टन मलबा बंगाल की खाड़ी में गिरा है. किसी भी आशंका से निपटने के लिए आपात सेवाएँ बहाल कर दी गई थी. इससे पहले इसरो से संचालित 11 प्रक्षेपण सफल रहे थे. क्षमता स्वदेशी तकनीक से जीएसएलवी विकसित करने वाला भारत दुनिया का छठा देश है और इसके वाणिज्यिक इस्तेमाल को बढ़ाने की योजना थी. इसके अलावा देश के चंद्र अभियान में भी इस रॉकेट की अहम भूमिका होगी. इस हादसे से इन दोनों लक्ष्यों को ठेस पहुँचा है. लगभग 2168 किलोग्राम या 2.4 टन वजन वाला इनसैन-4सी की आयु 10 वर्ष निर्धारित की गई थी. इसे दूरसंचार सेवाओं के विस्तार को लक्ष्य बना कर विकसित किया गया था. जीएसएलवी की लंबाई 49 मीटर थी और इसमें रूसी तकनीक से बनी नियंत्रण प्रणाली लगाई गई थी . हलाँकि सारे उपकरण स्वदेशी तकनीक से बनाए गए थे. भारतीय वैज्ञानिक जीएसएलवी की प्रक्षेपण क्षमता को बढ़ा कर चार टन से अधिक करने की कोशिश कर रहे हैं. अभी भारत के नौ संचार उपग्रह अंतरिक्ष में सफलतापूर्वक काम कर रहे हैं. संचार उपग्रह प्रणाली के मामले में एशिया प्रशांत क्षेत्र में भारत पहले नबंर पर है. भारतीय वैज्ञानिक दो तीन साल के भीतर चांद पर मानव खोजी दल उतारने की तैयारी कर रहे हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें 'आकाश' मिसाइल के दो सफल परीक्षण28 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस 'पृथ्वी' का एक और सफल परीक्षण 11 जून, 2006 | भारत और पड़ोस अग्नि III के परीक्षण में तकनीकी गड़बड़ी09 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस मौसम का मिज़ाज समझने की पहल20 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस इनसैट-4ए का सफल प्रक्षेपण22 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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