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मौसम का मिज़ाज समझने की पहल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एक साल से प्रकृति की मार झेल रहे तमिलनाडु में एक स्वयंसेवी संस्था ने स्थानीय लोगों को मौसम का हाल बताने के लिए एक नायाब शुरूआत की है. कडलूर में सुनामी से सबसे बुरी प्रभावित हुए गाँव देवानामपट्टनम के मछुआरों को समुद्र की लहरों की ऊँचाई, हवा का रूख़ और ख़राब मौसम आदि की चेतावनी दिन में तीन बार दी जाती है. आधुनिक तकनीक के ज़रिए गरीब मछुआरों की मदद करने की यह पहल दो महीने पहले पांडिचेरी मल्टी पर्पस सोशल सर्विसेज़ सोसाइटी(पीएमएसएसएस) ने की है. सूचना केंद्र लगभग दो लाख रूपए की लागत से देवानामपट्टनम में एक ऊँची इमारत की छत पर लाउडस्पीकर लगाए गए हैं जिसकी आवाज़ पूरे गाँव में सुनी जा सकती है. इमारत के अंदर दो आधुनिक कंप्यूटर लगे हैं जो बिजली जाने पर भी बैटरी से चलते रहते हैं. इन कंप्यूटरों पर तीन प्रशिक्षित महिलाएँ बैठती हैं जो कई वेबसाइटों के ज़रिए मौसम में होने वाले फेरबदल और उपग्रह से आने वाले ताज़ा चित्रों पर नज़र रखती हैं. वे सुबह नौ बजे, दोपहर एक बजे और शाम को छह बजे एक माइक्रोफ़ोन के ज़रिए पूरी जानकारी देती हैं. स्वागत देवानामपट्टनम में पीएमएसएसएस के प्रमुख कार्यकर्ता हेनरी लॉरेंस कहते हैं कि स्थानीय लोगों ने इस सेवा का दिल खोलकर स्वागत किया है और वे हमारी घोषणाओं को बहुत ध्यान से सुनते हैं.
अगली सुबह मछली पकड़ने के लिए जाने वाले वेंकटरामन को पता था कि वे सुबह तक इंतज़ार नहीं कर सकते इसलिए वे शाम के सात बजे ही अगले दिन का हाल पूछने इस सूचना केंद्र पर चले आए. वेंकट बताते हैं, "मौसम की वजह से हम मछुआरों की जान हमेशा जोखिम में रहती है लेकिन यह सुविधा तो कमाल की है, इसकी भविष्यवाणी हमेशा सही होती है. मैं और मेरे कई साथी यहाँ से जानकारी लिए बिना समुंदर में कभी नहीं जाते." वेंकट के एक और साथी रामसुंदरम इसे बहुत ही उपयोगी योजना मानते हैं, "पिछले दिनों कई समुद्री तूफ़ानों के आने की ख़बर मिल रही थी,इस सूचना केंद्र की वजह से हमें सही-सही जानकारी मिलता रही है." हेनरी बताते हैं कि अब सिर्फ़ मछुआरे ही नहीं बल्कि स्थानीय प्रशासन और पुलिस के लोग भी उनसे मौसम का हाल पूछने लगे हैं. लेकिन साथ ही वे ये भी स्पष्ट करते हैं कि इस व्यवस्था के तहत सुनामी या भूकंप की जानकारी दे पाना संभव नहीं है,वे सिर्फ़ ख़राब मौसम की चेतावनी दे सकते हैं. कंप्यूटरों के ज़रिए मौसम पर नज़र रखने वाली पुत्तुअम्मन का कहना है कि "कम पढ़े-लिखे मछुआरे टीवी नहीं देखते और अगर देखते भी हैं तो उसकी पूरी बात नहीं समझते, हम स्थानीय तरीक़े से उन्हें पूरी जानकारी देते हैं." फ़ायदा भी मौसम के हाल के अलावा,उपग्रह की मदद से यह सूचना केंद्र स्थानीय मछुआरों को यह भी बता सकता है कि अधिक मछलियाँ कहाँ पकड़ी जा सकती हैं. हेनरी बताते हैं, "कुछ उपग्रह ऐसे हैं जो समुद्र की सतह से नीचे भी नज़र रखते हैं, वे बताते हैं कि मछलियाँ कहाँ अधिक हैं,हम लोगों को समुद्र तट से मछलियों के झुंड की दूरी और दिशा के बारे में बताते हैं." वेंकटरामन का कहना है कि इस जानकारी से उन्हें काफ़ी फ़ायदा हो रहा है, हालाँकि वे ये शिकायत भी करते हैं कि देवानामपट्टनम के सारे मछुआरे सूचना सुनकर एक ही दिशा में चले जाते हैं. कडलूर के कलक्टर गगनदीप सिंह बेदी ने इस योजना को 'आधुनिक तकनीक और सेवा भाव के संगम की सफलता' करार दिया है. सुनामी चेतावनी प्रणाली पर अभी काम चल रहा है. ऐसी स्थिति में स्थानीय लोगों के लिए यह योजना किसी वरदान से कम नहीं है. पीएमएसएसएस का कहना है कि वे 20 और तटवर्ती गाँवों में यह योजना जल्द ही शुरू करने जा रही है. | इससे जुड़ी ख़बरें 'दो तिहाई लोग काम पर लौट चुके हैं'20 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस एक साल बाद भी नहीं हो पाई पहचान19 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस सूनामी का दर्द, उस पर बाढ़ की मार19 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस चेतावनी प्रणाली बनाने की दिशा में प्रगति14 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस सूनामी से हुए अनाथों की हालत08 जनवरी, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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