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सूनामी से हुए अनाथों की हालत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सूनामी लहरों से सबसे बुरी तरह प्रभावित होने वालों में है वो बच्चे जिनके माता पिता की मौत हुई है. अनाथ होने वाले बच्चों की कुल संख्या का पता नहीं चला है लेकिन अनुमान है कि ऐसे बच्चों की संख्या हज़ारों में होगी. अंतरराष्ट्रीय संगठन, राहत एजेंसियांऔर सरकारें मिलजुलकर ऐसे बच्चों की सुरक्षा करने में लगी हुई हैं. हालांकि ऐसे बच्चों की संख्या का अनुमान लगाना काफी मुश्किल काम है. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष यूनीसेफ के अनुसार प्रभावित बच्चों की संख्या दस लाख से ऊपर है. बच्चों की गिनती श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में यूनीसेफ के प्रवक्ता मार्टिन डेविस ने माना कि बच्चों की गिनती करना और उनकी पहचान करना बहुत ही मुश्किल काम है. डेविस ने बीबीसी से कहा " हम श्रीलंका में 700 राहत शिविरों में सर्वेक्षण कर रहे हैं लेकिन इसमें काफी समय लगेगा क्योंकि बच्चों की संख्या हज़ारों में है." सूनामी के बाद बचे हुए स्कूलों और हॉलों की इमारतों में राहत शिविर बना दिए गए हैं. अकेले गाले में ही 25 से अधिक अनाथ बच्चे मिले हैं जबकि 200 ऐसे हैं जिनके माता या पिता में से एक की मौत हुई है.
ब्रिटेन की संस्था सेव द चिल्ड्रेन का कहना है कि वो सूचना प्रबंधन विशेषज्ञों की एक टीम प्रभावित इलाक़ों में भेज रही है ताकि ऐसे बच्चों की सूची बनाई जा सके. सुरक्षा बच्चों की संख्या के बारे में भ्रामक स्थिति के बीच अधिकारियों ने बच्चों की निगरानी शुरु कर दी है क्योंकि पिछले दिनों ख़बरें आई थी कि अपराधी इन बच्चों को निशाना बना रहे हैं. इंडोनेशिया में अधिकारियों ने 16 साल से कम के बच्चों को कहीं भी ले जाने पर प्रतिबंध लगा दिया है. श्रीलंका में सूनामी प्रभावित बच्चों को गोद लेने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. सेव द चिल्ड्रेन के आपात मामलों के प्रमुख रिचर्ड मावर कहते हैं कि ऐसे कदमों का वह स्वागत करते हैं. उन्होंने कहा " प्राकृतिक आपदाओं के बाद बच्चों के साथ कैसा व्यवहार हो इस पर अंतरराष्ट्रीय मानदंड स्पष्ट हैं. गोद लेने पर लगी रोक बिल्कुल सही है. " हालांकि अधिकतर राहत संस्थाओं का कहना है कि इन बच्चों के लिए सबसे अच्छा विकल्प उन्हें उनके समुदाय और परिवारजनों के साथ मिलाना ही हो सकता है. |
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