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सूनामी प्रभावितों की सहायता का भरोसा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका के विदेश मंत्री कॉलिन पॉवेल ने एक बार फिर कहा है कि सूनामी प्रभावितो की लगातार सहायता की जाएगी और उन्हें मझधार में छोड़ा नहीं जाएगा. इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता पहुंचे पॉवेल ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि अमरीका लंबे समय तक सूनामी प्रभावितों की मदद का इरादा रखता है. उन्होंने कहा कि पुनर्वास और राहत कार्यों में पूरी मदद दी जाएगी. पॉवेल ने राहत सहायता को आतंकवाद के ख़िलाफ लड़ाई से भी जोड़ा और उम्मीद जताई कि असंतोष समाप्त हो सकेगा. उनका कहना था कि असंतोष से आतंकवाद को बढावा मिलता है. पॉवेल ने कहा कि अमरीका सहायता अमरीका के जीवन मूल्यों को दर्शाती है. उन्होंने कहा कि अमरीका मुस्लिम समुदाय का विरोधी बिल्कुल नहीं है बल्कि एक ऐसा समाज है जो सभी धर्मों का सम्मान करता है. इंडोनेशिया में राहत इधर सूनामी से सबसे अधिक प्रभावित इंडोनेशिया के मेवलाबोह शहर के अधिकारियों ने राहत सहायता में तेज़ी लाने की मांग की है. नौ दिन पहले जब भूकंप के बाद सूनामी लहरें आईं तो आचे प्रांत बुरी तरह घिर गया और यहां भारी तबाही हुई. मेवलाबोह शहर और असापास के इलाके में 40 हज़ार लोग मारे गए. घायलों को बीमारियां हो रही हैं और ख़राब मौसम ने राहत कार्य में बाधाएं खड़ी कर दी हैं. राहत सहायता ला रहे विमान आचे के एकमात्र हवाई अड्डे पर सामग्री उतारने में लगे हुए हैं. इससे पहले इसी हवाई अड्डे को एक दुर्घटना के कारण बंद करना पड़ा था. बांदा आचे स्थित इस हवाई अड्डे को मंगलवार की सुबह उस समय बंद करना पड़ा था जब राहत सामग्री लेकर आया एक विमान हवाई पट्टी पर एक गाय से टकरा गया. इस हवाई अड्डे के बंद होने से राहत कार्यों पर ज़रूर असर पड़ा लेकिन ज़ोर-शोर से हुए काम के बाद इसे दोबारा खोल दिया गया. दूसरी ओर संयुक्त राष्ट्र ने आशंका व्यक्त की है कि नुक़सान का पूरी तरह आकलन होने के बाद मरने वालों की संख्या और बढ़ सकती है. प्रभावित इलाक़ों के दौरे पर गए अमरीका के विदेश मंत्री कॉलिन पॉवेल ने कहा है कि अमरीका राहत कार्य में अपनी ओर से पूरी मदद देगा.
इस हादसे से पहले इंडोनेशिया, अमरीका, ऑस्ट्रेलिया और मलेशिया के सैनिक विमान कई दिनों की रुकावट के बाद आख़िरकार अपना काम शुरू कर पाए थे. दरअसल भारी बारिश के साथ-साथ सड़कों को हुए नुक़सान के कारण राहत सामग्री उन इलाक़ों तक नहीं पहुँच पा रही थी जहाँ सबसे ज़्यादा नुक़सान हुआ है. संयुक्त राष्ट्र के राहत समन्वयक जैन एगलैंड ने बताया कि पहले ये सोचा जा रहा था कि बांदा आचे सबसे ज़्यादा प्रभावित हुआ है लेकिन अब ये जानकारी मिल रही है कि मेवलाबोह शहर में उससे भी ज़्यादा नुक़सान हुआ है. भूकंप और उसके बाद सूनामी लहरों के तांडव में सबसे ज़्यादा 94,000 लोग इंडोनेशिया में मारे गए हैं. श्रीलंका की स्थिति इधर श्रीलंका में भारी वर्षा के कारण राहत कार्य में बाधाएं आ रही हैं. भूकंप और लहरों से बुरी तरह प्रभावित पूर्वी श्रीलंका में तेज़ बारिश ने राहत कार्य पूरी तरह रोक दिया है. बचे हुए लोग अपने घरों की ओर लौट रहे हैं लेकिन कोई सुविधा नहीं है. घरों में पानी घुस गया है. लिट्टे के अधिकार क्षेत्र वाले मुलाइतीवू में राहत एजेंसियों का कहना है कि राहत सामग्री लेकर सिर्फ एक ट्रक यहां पहुंचा है. |
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