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मरने वालों की संख्या लगभग सवा लाख | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दुनिया भर के नेता सूनामी लहरों से तबाह हुए लाखों लोगों को राहत पहुँचाने की योजनाओं को तेज़ करने में लगे हुए हैं. भारत सहित दुनिया भर के कई देशों में नए साल के स्वागत की पार्टियों को या तो रद्द कर दिया गया है या फिर उन्हें सादगी से मनाए जाने की बातें कही जा रही हैं. संयुक्त राष्ट्र के महासचिव कोफ़ी अन्नान और अमरीका के विदेश मंत्री कॉलिन पॉवेल शुक्रवार को मुलाक़ात करके राहत योजनाओं पर विचार विमर्श कर रहे हैं. सूनामी लहरों की चपेट में आकर मरने वाले लोगों की संख्या अब एक लाख चौबीस हज़ार के क़रीब आँकी जा रही है, इस संख्या और बढ़ने की आशंका अभी बरकरार है क्योंकि भारत, श्रीलंका और इंडोनेशिया सहित कई देशों में हज़ारों लोग अब भी लापता हैं. सूनामी लहरों के कहर के बाद तबाह हुए लगभग पचास लाख लोगों को तत्काल राहत की ज़रूरत है, इन लोगों तक अगर पानी, राशन और दवाइयाँ नहीं पहुँचीं तो इनकी हालत बहुत ख़राब हो सकती है. भारत, इंडोनेशिया और श्रीलंका में राहत सामग्री तो पहुँचने लगी है लेकिन अभी भी बहुत कुछ किए जाने की ज़रूरत है, अमरीकी विदेश मंत्री कॉलिन पॉवेल ने कहा है कि राहत और पुनर्वास के लिए अरबों डॉलर की ज़रूरत पड़ेगी. इंडोनेशिया के बाद सबसे अधिक तबाही झेलने वाले देश श्रीलंका में एक दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई है, देश की सरकारी इमारतों पर झंडे झुका दिए गए हैं. देश भर में हिंदू, ईसाई, मुस्लिम और बौद्ध धार्मिक नेताओं ने मरने वालों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना सभाओं का आयोजन किया है. रविवार को अमरीकी विदेश मंत्री कॉलिन पॉवेल सूनामी प्रभावित इलाक़ों का दौरा करेंगे. इस बीच दुनिया भर से आर्थिक सहायता की घोषणाओं का सिलसिला जारी है, अनेक संस्थाओं ने सूनामी से प्रभावित लोगों की सहायता करने की घोषणा की है. नक्शे में देखिए भूकंप और उसके बाद का प्रभाव
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