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चेतावनी के बाद तटवर्ती इलाक़ों में दहशत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के तटवर्ती राज्यों में गृह मंत्रालय की एक चेतावनी के बाद दहशत फैल गई है मगर गृह मंत्री का कहना है कि सरकार ने बस एहतियात के लिए ये चेतावनी जारी की थी. चेतावनी के बाद एक घबराहट का माहौल पैदा हो गया और लोग सुरक्षित इलाक़ों की तरफ़ भागने लगे. इन राज्यों में अफ़रा-तफ़री मचने के बाद गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा,"महासागर विकास मंत्रालय और कैबिनेट सेक्रेटेरिएट को ये सूचना मिली कि जिन इलाक़ों में ज़मीन के भीतर हलचल हो रही है वहाँ भूकंप हो सकते हैं और इसलिए सतर्क रहने की आवश्यकता है". उन्होंने कहा,"अगर इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर सात से ऊपर रही तो सूनामी लहरें आ सकती है. ये नहीं भी आ सकती है मगर हमें लोगों से ये बताने की आवश्यकता है कि वे सतर्क रहें". पाटिल ने कहा,"दहशत की कोई ज़रूरत नहीं है. दहशत और सतर्कता दो अलग चीज़ें हैं". भारत सरकार के महासागर विकास मंत्री कपिल सिबल ने कहा है कि भारत सरकार स्थिति पर नज़र रखे हुए है और एशियाई क्षेत्र में कहीं बड़ा भूकंप आता है तो लोगों को सतर्क किया जाएगा. कपिल सिबल ने बीबीसी से कहा,"अगले 48 घंटे तक सतर्क रहना चाहिए लेकिन अगर कोई ये कहता है कि अगले 12 घंटे में सूनामी आ सकता है तो ये बिल्कुल अवैज्ञानिक बात होगी." दहशत दोबारा सूनामी लहरें आने के बारे में ख़बरें आने के बाद तमिलनाडु, अंडमान निकोबार और केरल समेत तमाम तटवर्ती क्षेत्रों में लोगों में अफ़रा-तफ़री फैल गई. ये चेतावनी जारी की गृहमंत्रालय ने जिसने कहा कि भारत से बाहर के देशों के कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ये भूकंप ऑस्ट्रेलिया से लगे क्षेत्र के पास आ सकता है. गृहमंत्रालय में संयुक्त सचिव सरोज झा ने इस चेतावनी की जानकारी देते हुए कहा कि ये जानकारी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो से मिली मगर इसरो ने इसकी पुष्टि करने से इनकार किया है. अंडमान निकोबार के उपराज्यपाल रामचंद्र गणेश कापसे ने भी ये बयान दे डाला कि ऐसी वैज्ञानिक सूचना मिली है कि दोबारा सूनामी लहरें आ सकती हैं. जब इस बारे में कपिल सिबल से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि भूकंप की आशंका के बारे में ये जानकारी अमरीका के ओरेगॉन राज्य की एक संस्था टेरर रिसर्च से आई. कपिल सिबल ने कहा,"ये चार लोगों की संस्था है जो ऐसे शोध करती है मगर जब हमने प्रशांत क्षेत्र में भूकंप पर नज़र रखने वाले 26 देशों के संगठन से संपर्क किया तो उन्होंने ऐसी किसी आशंका से इनकार किया". लेकिन तमिलनाडु के नागपट्टनम शहर में मौजूद बीबीसी संवाददाता का कहना है कि चेतावनी के बाद तटवर्ती इलाक़ों से लोग भयभीत होकर भागने लगे हैं. तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने भी प्रभावित इलाक़ों का अपना दौरा रद्द कर दिया है. मगर भारतीय प्रधानमंत्री ने गुरूवार को तमिलनाडु में कुछ इलाक़ों का दौरा किया है. चेतावनी गृह मंत्रालय ने कहा है कि आशंका को ध्यान में रखकर राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों से तटवर्ती इलाक़ों में प्रशासन को सतर्क रहने और समुद्र में किसी तरह की हलचल पर नज़र रखने का अनुरोध किया गया है. साथ ही कहा है कि आवश्यकता पड़ने पर लोगों को सुरक्षित जगहों तक पहुँचाने के भी प्रबंध किए जा सकते हैं. इसके अलावा तटवर्ती सीमा पर समुद्र से दो किलोमीटर के भीतर तक के इलाक़े में आम लोगों को जाने से रोकने की भी सलाह दी गई है. उल्लेखनीय है कि रविवार को इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप के पास आए भूकंप के बाद से अंडमान निकोबार में ऐसे 50 से भी अधिक झटके महसूस किए गए हैं. इन झटकों से वैसे तो समुद्र में कोई सूनामी लहर तो पैदा नहीं हुई मगर लोग डर रहे हैं कि वहाँ फिर से समुद्री लहरें द्रीप की ओर आ सकती हैं. प्रधानमंत्री का दौरा भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गुरूवार को तमिलनाडु के कन्याकुमारी शहर में कुछ राहत कैंपों और अस्पतालों का दौरा किया. केंद्रीय मंत्री दयानिधि मारन और शरद पवार भी प्रधानमंत्री के साथ थे. प्रधानमंत्री सिंह ने राहत शिविरों में लोगों से कहा,"सभी प्रभावित लोगों के आत्मसम्मान से रहने की व्यवस्था के लिए क़दम उठाए जाएँगे. महिलाओं और बच्चों के पुनर्वास के लिए विशेष कार्यक्रम चलाए जाएँगे". प्रधानमंत्री का तमिलनाडु के सबसे अधिक प्रभावित नागपट्टनम ज़िले के हवाई सर्वेक्षण का भी कार्यक्रम है जिसके बाद वे केरल की राजधानी तिरूअनंतपुरम लौट जाएँगे. |
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