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मदद के प्रयास हुए तेज़ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दक्षिण पूर्व एशिया में आए भूकंप और समुद्री तूफान से प्रभावित लोगों को मदद पहुंचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयास तेज हो रहे हैं. दुनिया भर के राहत संगठनों और आपात संस्थाओं ने अपने अपने स्तर पर कोशिशें शुरु कर दी हैं. इस प्राकृतिक आपदा से तक़रीबन दस देशों के लोग प्रभावित हुए हैं और मरने वालों की संख्या बढ़कर 60 हज़ार तक जा पहुंची है. अमरीका के एक प्रवक्ता ने कहा है कि अमरीका ने सहायता राशि दोगुनी कर के साढे तीन करोड़ डॉलर करने का वादा किया है. अधिकारियों का कहना है कि इस संकट को बहुत गंभीरता से लिया जा रहा है और आने वाले दिनों में अमरीकी मदद और बढ़ सकती है. इससे पहले अमरीका ने अपने दो युद्धपोतों अब्राहम लिंकन और बोनहोम रिचर्ड को भी मदद के लिए प्रभावित इलाक़ों की ओर रवाना कर दिया था. इन दोनों पोतों पर अत्याधुनिक विमान, पानी साफ करने के यंत्र और उपकरण हैं. साथ ही क़रीब 15 हज़ार अमरीकी सैनिक भी जो लोगों की मदद करने वाले हैं. अमरीकी वायु सेना ने अपने कुछ कारगो विमानों के ज़रिए थाईलैंड में तंबू, खाने का सामान और अन्य चीज़ें भी भिजवाई हैं. दुनिया भर से मदद संयुक्त राष्ट्र की मानवीय सहायता प्रमुख जैन इगलैंड का कहना है कि पूरी दुनिया ने इस मामले में तुरंत मदद की पेशकश की है और मदद की जा रही है. यूरोपीय संघ के राहत आयुक्त लुई मिशेल ने बताया कि पैसों की कोई कमी नहीं है लेकिन समस्या ये है कि राहत किस तरह से उपलब्ध कराई जाए ताकि वो अधिक से अधिक प्रभावी हो. संयुक्त राष्ट्र ने पहले कहा था कि राहत सहायता में कई अन्य तरह की मुश्किलें भी आ रही है. इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित होने वाले दस देशों में भारत, श्रीलंका, इंडोनेशिया, थाईलैंड, मलेशिया, बर्मा, बांग्लादेश और मालदीव शामिल हैं. मृतकों की संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है और ताज़ा अनुमान हैं कि 60 हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए हैं, अन्य कई हज़ार लापता हैं. लाखों बेघर हुए इसके अतिरिक्त कई लाख लोग इस प्रकृतिक आपदा से विस्थापित हुए हैं और उनके घर और जीवन भर की संपत्ति नष्ट हो गई है. यही नहीं, जो लोग इस त्रासदी से जीवित बच निकले, उन्हें राहत सामग्री और विशेष तौर पर पीने का पानी मुहैया करवाना बड़ी चुनौती बनी हुई है.
नमकीन और खारा समुद्री पानी जब इन क्षेत्रों में दाख़िल हुआ तो पीने का पानी के स्रोत ख़राब हो गए हैं. श्रीलंका की सरकार का कहना है कि 18 हज़ार लोग मारे गए हैं लेकिन पीड़ित लोगों के रिश्तेदारों का मानना है कि लगभग 25 हज़ार लोग मारे गए होंगे. भारत में साढे आठ हज़ार लोग मारे गए हैं लेकिन ये संख्या भी ऊपर जा सकती है क्योंकि ताज़ा ख़बरों के अनुसार केवल एंडेमान-निकोबार द्वीप समूह में ही पाँच हज़ार लोग मारे गए हैं.
श्रीलंका में एक राहतकर्मी ने कहा कि हालाँकि बहुत सी राहत सामग्री पहुँच रही है लेकिन यह बहुत ज़रूरी है कि उसे वितरित करने में समन्वय बिठाया जाए अन्यथा अव्यवस्था फैल सकती है. संपर्क बनाने की मुश्किल इंडोनेशिया के उपराष्ट्रपति यूसुफ़ कल्ला ने कहा कि सुमात्रा के बहुत से इलाकों में अब भी कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है और मृतकों की संख्या 25 हज़ार से भी ज़्यादा हो सकती है. अधिकारी मृतकों की संख्या सिर्फ़ शव गिनकर कर रहे हैं जबकि हो सकता है कि बहुत से शव पानी में बह गए होंगे जिससे मृतक संख्या बढ़ने की दलील दी जा रही है. सोमालिया के तटवर्ती इलाक़ों में भी इस प्राकृतिक आपदा से कुछ मौतें होने की ख़बरें हैं.
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