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मरने वालों की संख्या लाख से ऊपर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नए आँकड़ों से पता चलता है कि रविवार के समुद्री उफान में मरने वालों की संख्या कम से कम एक लाख 17 हज़ार हो गई है. इंडोनेशिया में अधिकारियों का कहना है कि उनके यहाँ मृतकों की तादाद लगभग 80 हज़ार है और यह संख्या और बढ़ने की आशंका है. उधर, तबाही से प्रभावित लोगों तक पहुँच पाने में राहतकर्मियों को दिक़्क़तें आ रही हैं. प्रभावित इलाक़ों में राहत दल और राहत सामग्रियाँ तो पहुँच गई हैं मगर सबसे अधिक प्रभावित इलाकों तक जाने में कठिनाई हो रही है. अमरीका, ऑस्ट्रेलिया, जापान और भारत ने राहत कार्य के लिए एक गठबंधन बनाया है. राहत कार्य के लिए विभिन्न देशों की सरकारों ने 22 करोड़ डॉलर की मदद देने का वादा किया है जिसमें से साढ़े तीन करोड़ डॉलर अमरीका देगा. मगर संयुक्त राष्ट्र की ओर से राहत कार्य की देख-रेख कर रहे अधिकारी जान एगेलैंड ने कहा है कि अभी भी राहत कार्य का ज़ोर पकड़ना बाक़ी है और इसमें अभी दो-तीन दिन लगेंगे और तब तक काफ़ी देर हो जाएगी. उन्होंने कहा,"हम अभी काफ़ी कम ही कुछ कर पा रहे हैं और मुझे लगता है कि आनेवाले दिनों और हफ़्तों में लोगों में नाराज़गी बढ़ेगी". अभी कई जगहों से राहत सामग्रियों के वितरण के दौरान झड़प होने की ख़बरें आ रही हैं. राहत और मृतक संख्या
भूकंप से सबसे अधिक प्रभावित इंडोनेशिया के आचे प्रांत में 45,000 से भी अधिक लोग मारे गए हैं और संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि वहाँ अलग-अलग तरह की सहायता की आवश्यकता है. इंडोनेशियाई सैनिक विमानों से आकस्मिक सामग्रियाँ पहुँचा रहे हैं और संयुक्त राष्ट्र भी एक लाख लोगों तक आकस्मिक सामग्रियाँ पहुँचाने की तैयारी कर रहा है. श्रीलंका में भी प्रभावित इलाक़ों में अंतरराष्ट्रीय सहायता पहुँचनी शुरू हो गई है और सड़कों और संचार के संपर्कों को दुरूस्त करने के लिए सेना की सहायता ली जा रही है. श्रीलंका में 24,000 से भी अधिक लोग मारे गए हैं जबकि और 4500 लोग लापता हैं. इस बीच भारत में मरनेवालों की संख्या अब 13,000 से अधिक हो गई है. थाईलैंड में अधिकारियों ने कहा है कि वे मान रहे हैं कि वे सभी 6,000 लोग जो लापता थे उनके जीवित बचने की कोई संभावना नहीं है. यहाँ बड़ी संख्या में विदेशी सैलानी मारे गए हैं और उनकी पहचान के लि ऑस्ट्रेलिया से फ़ोरेंसिक विशेषज्ञ वहाँ पहुँच गए हैं और ब्रिटेन भी अपने विशेषज्ञ भेज रहा है. नक्शे में देखिए भूकंप और उसके बाद का प्रभाव
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