|
'बच्चों को संभालना सर्वोच्च प्राथमिकता' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र की बाल आपदा कोष संस्था यूनिसेफ़ ने आगाह किया है कि सूनामी आपदा से बच्चों को हुए नुक़सान को कम करके नहीं देखा जाना चाहिए. यूनिसेफ़ ने कहा है कि इस आपदा में जो क़रीब डेढ़ लाख लोग मारे गए हैं उनमें से एक तिहाई यानी क़रीब पचास हज़ार बच्चे ही हैं. इनके अलावा अन्य बहुत से बच्चे बुरी तरह प्रभावित हुए हैं जिन्हें तुरंत व्यापक सहायता की ज़रूरत है. इसमें उन्हें हादसे के प्रभाव से उबारना और उनका पुनर्वास प्राथमिकता पर होना चाहिए. यूनिसेफ़ की एक प्रवक्ता ने जेनेवा में कहा है कि जिन बच्चों ने अपने माता-पिता और अभिभावक खो दिए हैं वे भारी सदमे में हैं और उन्हें मनोवैज्ञानिक सहायता की भी सख़्त ज़रूरत है. यूनिसेफ़ की कार्यकारी निदेशक कैरोल बिलैमी ने श्रीलंका का दो दिन का दौरा करने के बाद इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में मंगलवार को कहा कि इस आपदा से बच्चों को उबारने के लिए मुख्य रूप से चार बिंदुओं पर ज़ोर देना चाहिए. यूनिसेफ़ के अनुसार पहला ये है कि प्रभावित बच्चों को जीवित रखने की कोशिश की जाए और इसके लिए उन्हें साफ़ पानी, साफ़-सफ़ाई, बुनियादी पौष्टिक भोजन और दवा वग़ैरा वक़्त पर सुनिश्चित की जाए. उन्होंने कहा कि इसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता. दूसरा ये कि जो बच्चे अपने अभिभावकों और माता - पिता से बिछड़ गए हैं उनकी समुचित देखभाल की जाए. कैरोल बिलैमी ने कहा कि खोए बच्चों को उनके परिवारों से मिलाना सर्वोच्च प्राथमिकता पर होना चाहिए.
तीसरा ये कि राहत कार्यों के दौरान यह सुनिश्चित हो कि बच्चों का कोई शोषण नहीं हो. ऐसे क्षेत्रों में जहाँ परिवार बिखर गए हैं वहाँ उम्मीदें टूट चुकी हैं और लोगों की आमदनी रुक गई है ऐसे में बच्चों को आसानी से शिकार बनाया जा सकता है. कैरोल ने कहा कि राहत कार्यों में बच्चों को शोषण के ख़तरे से बचाया जाए. और चौथा ये कि प्रभावित बच्चों को जितना जल्दी हो सके, सामान्य जीवन की पटरी पर लाया जाए और इसके लिए ज़रूरी है कि उन्हें स्कूल भेजने की यथासंभव जल्दी कोशिश हो. बच्चों को हादसे से उबारने के लिए अध्यापकों और अन्य स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को व्यापक प्रयास करने होंगे. केरोल ने कहा, "सीखने के माहौल में बच्चों को सकारात्मक सोच मिलती है और वे ख़ुद को वयस्कों के बीच पाकर अपना आत्मविश्वास फिर से इकट्ठा करने की कोशिश में लग जाते हैं. हालाँकि सभी प्रभावित इलाक़ों में स्कूल भी तबाह हो गए हैं लेकिन सीखने के माहौल को जितना जल्दी हो सके, फिर से स्थापित करना होगा. अपील संयुक्त राष्ट्र की मानवीय सहायता के कार्यों में समन्वय करने वाली एजेंसी ने अपील की है कि सुनामी आपदा से प्रभावित इलाक़ों में राहत सामग्री पहुँचाने के लिए बड़े पैमाने पर परिवहन विमानों की ज़रूरत है.
संस्था ने कहा है कि एक सी-17 परिवहन विमान की ज़रूरत है और इसे सिर्फ़ अमरीका और ब्रिटेन की मुहैया करा सकते हैं. संयुक्त राष्ट्र ने यह भी कहा है कि कई हेलीकॉप्टर और उन्हें ढोने वाले बड़े जहाज़, बिजली बनाने वाले उपकरण और पानी साफ़ करने वाली मशीनों की भी सख़्त ज़रूरत है. संयुक्त राष्ट्र की एक अन्य संस्था अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन ने कहा है कि वह प्रभावित देशों में ऐसे विशेषज्ञों के दल भेज रहा है जो वहाँ की अर्थव्यवस्थाओं को इस हादसे से उबरने में मदद करेंगे. संगठन का कहना है कि यह बहुत महत्वपूर्ण है कि लोग जितना जल्दी हो सकें, अपने काम पर वापस लौटें ताकि हालात और ख़राब होने से बचा जा सके. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||