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'पीड़ित देशों को पूरी सहायता दी जाएगी' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी विदेश मंत्री कॉलिन पॉवेल ने एशियाई देशों को आश्वासन दिया है कि राहत और पुनर्वास के काम में उनकी पूरी मदद की जाएगी. थाईलैंड के दौरे पर गए अमरीकी विदेश मंत्री ने कहा कि "अमरीका अपने फ़र्ज़ से मुँह नहीं मोड़गा और ज़रूरतमंद लोगों की हर हालत में मदद की जाएगी." कॉलिन पॉवेल के साथ अमरीकी राष्ट्रपति बुश के छोटे भाई जेब बुश भी हैं जो फ़्लोरिडा के गवर्नर हैं. कॉलिन पॉवेल ने कहा कि सूनामी से हुई तबाही पूरी दुनिया के लिए एक त्रासदी है. उन्होंने वादा किया कि अमरीका एशियाई देशों को सूनामी की चेतावनी देने वाली प्रणाली लगाने में हरसंभव सहायता देगा. इससे पहले अमरीकी राष्ट्रपति जार्ज बुश और दो पूर्व राष्ट्रपति बुश सीनियर एवं बिल क्लिंटन ने अमरीकी जनता से सूनामी प्रभावितों के लिए सहायता जुटाने की अपील की है. ये तीनों नेता एक साथ व्हाइट हाउस के रुजवेल्ट रुम में इकट्ठा हुए और अमरीका के लोगों एवं व्यवसायियों से मदद देने की साझा अपील की. प्रभावित इलाकों में अभी भी 5000 अमरीकी लापता हैं. राष्ट्रपति बुश ने कहा, " मैं हर अमरीकी से अपील करता हूं कि वो राहत में अपना योगदान करें. " बुश प्रशासन ने अपनी ओर से 350 करोड़ डालर की मदद देने का वादा कर दिया है. अमरीकी रेड क्रास को अभी तक लोगों की ओर से आठ करोड़ डालर मिल चुके हैं. तबाही का मंज़र सुमात्रा से सोमालिया तक अपना प्रभाव छोड़ने वाली विनाशकारी सूनामी लहरों से प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने का काम जोरों पर है.
इन इलाकों में अभी भी दस लाख से अधिक लोगों को मदद की ज़रुरत है. पिछले सप्ताह आए भूकंप और सूनामी लहरों से हुई तबाही में मृतकों की संख्या एक लाख चालीस हज़ार से ऊपर पहुँच गई है. अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां और सरकारें राहत सहायता में लगी हुई हैं और अब ज्यादातर लोगों तक राहत सामग्री का कुछ हिस्सा पहुंच रहा है. हालांकि राहत एजेंसियों के अनुसार हर प्रभावित गांव एवं लोगों तक पहुंचने में अभी भी काफी समय लगेगा. इन लहरों ने सड़कें बर्बाद कर दी हैं जिससे राहत सामग्री पहुंचाने में दिक्कत हो रही है. हेलीकाप्टरों और विमानों के जरिए राहत दी जा रही है. सूनामी से बुरी तरह प्रभावित इंडोनेशिया के बांदा आचे में अब दवाईयां साफ पानी आदि पहुंच रहा है. इंडोनेशिया सरकार ने कहा है कि इस प्राकृतिक आपदा से वहाँ मृतक संख्या लगातार बढ़ रही है और अभी तक 94 हज़ार मौतों की पुष्टि हो गई है. राहत और पुनर्वास प्रयासों ने तेज़ी पकड़ी है और संयुक्त राष्ट्र ने आशा व्यक्त की है कि दुनिया इस आपदा से उठी चुनौती पर जल्दी ही पार पाने में कामयाब होगा और जीवित बचे लोगों तक समुचित सहायता पहुँच सकेगी. इंडोनेशिया, श्रीलंका, भारत, थाईलैंड, मालदीव, बांग्लादेश सहित इस क्षेत्र के सभा प्रभावित देशों में क़रीब 18 लाख लोगों को मदद की सख़्त ज़रूरत है और उन्हें खाना और पानी तुरंत चाहिए. अनुमान लगाया गया है कि इस हादसे में क़रीब पचास लाख लोग बेघर हो गए हैं.
उधर अमरीकी विदेश मंत्री कॉलिन पॉवेल एशिया के प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने निकले हैं. संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों की वरिष्ठ अधिकारी मारग्रेटा वॉलस्टॉम का कहना है कि श्रीलंका में मृतकों की संख्या 30 हज़ार हो गई है. वहाँ लगभग इतने ही लोग बाढ़ के कारण बेघर भी हो गए हैं. विस्थापित उधर संयुक्त राष्ट्र के आपदा राहत प्रबंधन के अध्यक्ष जान ईग्लैंड का कहना है कि सबसे ज़्यादा प्रभावित क्षेत्र - आचे तक राहत पहुँचाने में अब भी बहुत मुश्किलें आ रही हैं. उनका कहना है कि अधिकतर मुश्किलें दूर-दराज़ के इलाक़ों में पेश आ रही हैं जहाँ सड़कें और हवाई पट्टियाँ या तो नष्ट हो गई हैं या फिर क्षतिग्रस्त हैं. सरकार का ये भी कहना है कि मुश्किलें इसलिए भी बढ़ गई हैं क्योंकि राहत कार्यों को अंजाम देने वाले कई अधिकारी भी सूनामी की चपेट में आ गए हैं. |
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