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संभलने में वर्षों लग सकते हैं: अन्नान | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने कहा है कि सूनामी लहरों से प्रभावित देशों को संभलने में 10 साल तक लग सकते हैं. अमरीकी टेलिविज़न पर अन्नान ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को पहली बार इतनी बड़ी त्रासदी से निपटना पड़ रहा है. गुरुवार को अन्नान सबसे ज़्यादा प्रभावित देश इंडोनेशिया का दौरा करेंगे. यहाँ दुनिया के कई देश राहत कार्यों पर बैठक कर रहे हैं. अन्नान भी इस बैठक में मौजूद रहेंगे. इस बीच संयुक्त राष्ट्र के राहत समन्वयक जैन एलगैंड ने कहा है कि मरने वालों की संख्या डेढ़ लाख से भी ज़्यादा हो सकती है. उन्होंने माना कि सहायता कोष में बढ़ोत्तरी हो रही है लेकिन तत्काल और सहायता की ज़रूरत है. ख़ासकर हेलिकॉप्टर, मालवाहक विमान और ट्रक ताकि राहत सामग्री प्रभावित इलाक़ों तक पहुँचाई जा सके. एगलैंड ने कहा कि राहत कार्यों को लेकर सबसे ज़्यादा चिंता है. सहायता राशि संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि अभी तक दो अरब डॉलर की सहायता राशि इकट्ठा हो गई है और इसमें सबसे बड़ा योगदान अकेले जापान कर रहा है.
जापान ने दक्षिण एशिया में तबाही के बाद राहत कार्यों के लिए अकेले 50 करोड़ डॉलर तक देने का वचन दिया है. जापान के प्रधानमंत्री जुनिचिरो कोईज़ुमी ने कहा है कि जापान एशियाई देश होने के नाते अपना फ़र्ज़ निभा रहा है. अभी तक 40 देश राहत कार्यों के लिए मदद देने के लिए आगे आए हैं. साथ ही विश्व बैंक ने भी अपनी ओर से पेशकश की है. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को वादा करना चाहिए कि वे लंबे समय तक प्रभावित देशों को सहायता देंगे जिसमें वर्षों लग सकते हैं. स्थिति इस बीच भूकंप से प्रभावित इंडोनेशिया के आचे प्रांत में सहायता सामग्री बड़े पैमाने पर पहुँचनी शुरू हो गई है. सहायता सामग्री पहुँचाने में विमान, जहाज़ और ट्रक लगे हुए हैं. अमरीका, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर के सैनिक राहत कार्यों में जी-जान से जुटे हैं. इंडोनेशिया की सरकार ने राहत कार्यों में समन्वय स्थापित करने के लिए एक कैबिनेट मंत्री की नियुक्ति की है.
सरकार का कहना है कि देश में मरने वालों की संख्या एक लाख तक हो सकती है. लेकिन वास्तविक संख्या बता पाना मुश्किल है क्योंकि कई बार मृतकों का तुरंत सामूहिक दाह संस्कार कर दिया जा रहा है. उधर भारत में सरकार ने माना है कि अंडमान निकोबार में प्रभावित लोगों तक सहायता पहुँचाने में मुश्किलें आ रहीं हैं. अंडमान के चीफ़ कमांडर जनरल बीएस ठाकुर ने बताया कि सैनिक और नागरिक राहत कार्यों को अब एकीकृत कर दिया गया है. अभी तक अंडमान में आधिकारिक तौर पर छह हज़ार लोगों के मारे जाने की बात कही जा रही है. लेकिन जानकारों का कहना है कि संख्या इससे भी ज़्यादा है. पड़ोसी देश श्रीलंका में पूर्वी और दक्षिणी इलाक़ों में भारी बारिश और बाढ़ के कारण सहायता कार्यों में बाधा आ रही है. |
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