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इंटरनेट बना सहायता का प्रमुख ज़रिया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भूकंप और सूनामी लहरों से प्रभावित इलाक़ों में राहत कार्य के लिए धन और संसाधन जुटाने में सहायता संस्थाओं को इंटरनेट वेबसाइटों से भारी मदद मिल रही है. हज़ारों की संख्या में लोग विभिन्न वेबसाइटों के सहारे दान दे रहे हैं. इंटरनेट से उन लोगों को भी सहायता मिल रही है जो राहत प्रयासों से जुड़ना चाहते हैं. गूगल, याहू, ईबे और अमेज़न जैसी नामी-गिरामी वेबसाइटें सहायता संस्थाओं के इंटरनेट-लिंक को प्रमुखता से प्रकाशित कर रही हैं. इसके लिए इन वेबासाइटों ने अपने मुख्य पृष्ठ के डिज़ायन तक में फेरबदल किया है. गूगल ने अपने होमपेज पर जो इंटरनेट-लिंक दिया है उसके ज़रिए 17 प्रमुख सहायता संस्थाओं तक पहुँचा जा सकता है. इस तरह के प्रयासों के चलते सहायता संस्थाओं से जुड़ी कुछ वेबसाइटों तक इतने लोग पहुँचे कि उन्हें सँभालना मुश्किल हो गया. ब्रिटेन में 12 सहायता संस्थाओं की शीर्ष संस्था डिज़ास्टर्स इमरजेंसी कमेटी (डीईसी) की वेबसाइट के ज़रिए हर घंटे 11 हज़ार लोग भूकंप और सूनामी लहरों से प्रभावित लोगों के लिए दान दे रहे हैं. शुक्रवार तक इस वेबसाइट के ज़रिए 80 लाख पाउंड की राशि जुटाई जा चुकी थी. सहायता संस्थाएँ लोगों से चेक और टेलीफ़ोन के बजाय इंटरनेट के ज़रिए दान देने की अपील कर रही हैं क्योंकि इसके पैसा उन तक अपेक्षाकृत जल्दी पहुँचता है. इस बीच इंटरनेट जालसाज़ी पर नज़र रखने वाले विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि भूकंप और सूनामी लहरों से तबाह लोगों को सहायता देने के लिए भारी संख्या में लोगों को आगे आता देख कई जालसाज़ों ने भी ईमेलों के ज़रिए लोगों को फँसाना शुरू किया है. विशेषज्ञों ने लोगों को आगाह किया है कि वे सहायता की अपील वाले किसी तरह के व्यक्तिगत ईमेल संदेश को संदेह की नज़र से देखें. |
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