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भारत में नौ हज़ार से अधिक मौतें | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सूनामी लहरों ने भारत में कम से कम नौ हज़ार लोगों की जान ले ली है. भारत सरकार के अधिकारियों का कहना है कि इनके अलावा हज़ारों लोग अब भी लापता हैं जिनके जीवित बचे होने की संभावना कम ही है. भारत में जिस स्थान पर सबसे अधिक जान-माल का नुक़सान हुआ है वह है तमिलनाडु का नागपत्तनम, यहाँ कम से कम साढ़े पाँच हज़ार लोग मारे गए हैं. नागपत्तनम के एक गाँव में एक हज़ार बच्चों के मारे जाने की ख़बर है, इन लोगों ने समुद्र के पानी से बचने के लिए एक स्कूल में शरण ली थी लेकिन सूनामी की लहरों ने उन्हें लील लिया. तमिलनाडु में कम से कम डेढ़ लाख लोग राहत शिविरों में रहने को विवश हैं इनमें से ज़्यादातर मछेरे हैं जिनका घर-बार पूरी तरह तबाह हो चुका है.
इन लोगों को भारत सरकार और निजी राहत एजेंसियों की तरफ़ से सहायता मिल रही है लेकिन बीबीसी संवाददाता का कहना है कि सहायता को पर्याप्त नहीं कहा जा सकता. अंडमान निकोबार द्वीप समूह की हालत भी काफ़ी ख़राब है, जहाँ हज़ारों लोग अब भी लापता हैं, राजधानी पोर्ट ब्लेयर में राहत शिविर बनाए गए हैं जहाँ बड़ी संख्या में लोगों रखा गया है. अंडमान निकोबार में राहत कार्यों के ठीक से न चलने की शिकायतें मिली हैं, पीड़ित लोगों का कहना है कि उन तक राहत सामग्री नहीं पहुँच रही है जबकि सरकार का कहना है कि वह अपनी तरफ़ से पूरे प्रयास कर रही है. अंडमान में सबसे बड़ी समस्या पीने के पानी की है, अंडमान में एक स्थान पर तो उग्र भीड़ ने खाने-पानी की माँग करते हुए एक सरकारी अधिकारी पर हमला कर दिया. अंडमान में लापता होने वाले लोगों की कुल संख्या पौने चार हज़ार तक बताई जा रही है जबकि वहाँ सात सौ से अधिक लाशें मिल चुकी हैं |
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