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गुरुवार, 30 दिसंबर, 2004 को 23:49 GMT तक के समाचार
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सूनामी से बड़ी प्राकृतिक आपदाएं
प्रभावित लोग
सबसे भयंकर प्राकृतिक आपदाओं का इतिहास चीन में है.
दुनिया भर के आपदा विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद महासागर में आए समुद्री तूफान को विश्व की सबसे भयंकर प्राकृतिक आपदाओं में गिना जा सकता है.

रविवार ( 26दिसंबर) को सूनामी लहरों की विनाशलीला में अब तक एक लाख से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और इसका प्रभाव एशिया में ही नहीं बल्कि सात हज़ार किलोमीटर दूर अफ्रीका तक पड़ा है.

इस विभीषिका में छुट्टियां मना रहे सैकड़ों विदेशी भी प्रभावित हुए हैं और टेलीविजन चैनलों पर पर्यटकों द्वारा की गई वीडियो रिकार्डिंग से विनाश का पता चल सकता है.

सूनामी लहरों से ऐसी ही एक त्रासदी 1896 में हुई थी जो जापान के तट पर आया था. गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स के अनुसार इसमें 27000 लोग मारे गए थे.

चक्रवात और सूखा

दुनिया भर में सूनामी लहरों के अलावा भी और प्राकृतिक आपदाएं हुई हैं जिसमें हज़ारों लोग मारे गए है.
1970 में बांग्लादेश में आए चक्रवात में पांच लाख से अधिक लोग मारे गए थे. इस समय 250 किलोमीटर से अधिक रफ्तार से हवाएं चली थी जिसमें गांव के गांव तबाह हो गए थे.

बाम के प्रभावित
ईरान में पिछले साल ही भूकंप आया था.

चीन के तंगशान प्रांत में 1976 में रिक्टर पैमाने पर 8.3 तीव्रता का भूकंप आया था जिसमें लाखों लोग मारे गए थे. आधिकारिक तौर पर मरने वालों की संख्या ढाई लाख बताई गई जबकि कुछ विशेषज्ञों के अनुसार यह संख्या साढे सात लाख से अधिक थी.

1984 और 1985 में अफ्रीकी देश इथियोपिया में अकाल पड़ा जिसमें नौ लाख लोग मारे गए थे.

हालिया आंकड़े

हालिया आंकड़े देखें तो पिछले साल ईरान के बाम शहर में आए भूकंप में 26 हज़ार से अधिक लोगों की मौत हुई थी.

दक्षिण अमेरिका के होंडूरास और निकारागुआ देशों में 1998 में मिच नामक तूफान में दस हज़ार लोगों की मौत हो गई थी और दो लाख से अधिक लोग बेघर हो गए थे.

दस साल पहले 1988 में आर्मेनिया में आए भूकंप में 25 हज़ार लोगों की मौत हई थी.

1983 में थाईलैंड में आए मानसून की यादें भी लोगों के ज़ेहन में ताज़ा होंगी जिसमें तीन महीने के अंतराल में दस हज़ार से अधिक लोग मारे गए थे और एक लाख से अधिक लोगों को बीमारियों का सामना करना पड़ा था.

केवल भूकंप और तूफान ही नहीं, प्रकृति के तरकश में और भी तीर हैं. बर्फीली तूफानों, जंगल की आग और भू स्खलन में भी लोगों की जानें गई हैं. पेरु में 1970 में भूस्खलन में 18 हज़ार लोग मारे गए थे.

सौ साल पहले

अगर सौ साल पहले की बात करें तो 1887 में चीन के येलो नदी में बाढ़ आई थी जिसमे नौ लाख लोगों की मौत हुई थी.

इंडोनेशिया के माउंट तंबोरा में 1815 में ज्वालामुखी फटा था जिसमें 90 ह़ज़ार लोग मारे गए थे. बहते हुए गरम लावा ने गांवों, खेतों और जंगलों को अपनी चपेट में ले लिया था.

चीन के शांक्सी प्रांत में 1556 में एक खतरनाक भूकंप आया था जिसमें साढे आठ लाख लोगों के मारे जाने की बात कही जाती है. इतिहास के पन्नों में इसे अब तक के सबसे बड़े भूकंप के रुप में जाना जाता है.

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