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अभूतपूर्व उपाय करे दुनिया : संयुक्त राष्ट्र | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफी अन्नान ने पूरी दुनिया से अपील की है कि वो सूनामी विनाश का सामना करने के लिए अभूतपूर्व तरीके से मदद करें. अन्नान ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस संकट के बाद मदद के लिए पर्याप्त कदम उठाए लेकिन देशों को लंबे समय के लिए मदद करनी होगी. विश्व बैंक, विभिन्न देशों और नागरिकों ने कुल मिलाकर पचास करोड़ डालर की सहायत राशि का वादा किया है. दुनिया भर से आ रही मदद के बीच अब भी इस विनाश में मरने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है. मरने वालों की संख्या एक लाख 17 हज़ार तक पहुंच चुकी है. अभी भी कुछ देशों में लापता लोगों की संख्या सैकड़ों में है जिससे अंदाज़ा लगाया जा रहा है कि मरने वालों की संख्या बढ़ेगी. राहत एजेंसियों को सहायता पहुंचाने में दिक्कतों का भी सामना करना पड़ रहा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि कम से कम पचास लाख लोग पानी, भोजन और आवास की समस्या से जूझ रहे हैं. ख़ासी मुश्किलें
न्यूयार्क में संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों के साथ एक बैठक के दौरान अन्नान ने कहा कि पूरा संयुक्त राष्ट्र प्रभावित परिवारों के साथ है. हालांकि उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के कर्मचारियों पर काफी दबाव है क्योंकि यह विनाशलीला काफी भयंकर है. इसका सामना कोई भी देश या राहत एजेंसी अकेले नहीं कर सकती. उन्होंने कहा " यह एक अभूतपूर्व संकट है और इसका सामना करने के लिए पूरी दुनिया को अभूतपूर्व प्रयास भी करने होंगे. " अन्नान ने कहा " हमें लंबे समय तक इन क्षेत्रों में प्रभावित लोगों की मदद करनी होगी क्योंकि इस आपदा का प्रभाव लंबे समय तक रहेगा. " राहत एवं सहायता विश्व बैंक ने प्रभावितों के लिए पच्चीस करोड़ डालर मदद की घोषणा की है जबकि ब्रिटेन ने सहायता राशि बढ़ाकर क़रीब दस करोड़ डालर कर दी है. अंतरराष्ट्रीय रेड क्रास ने आपदा से निपटने के लिए एक विशेष वेबसाइट भी बनाया है जहां जाकर लोग मदद के लिए राशि दे सकते है. दुनिया भर में इस बात के लिए भी समर्थन बढ़ रहा है कि अगर प्रभावित देशों पर कोई कर्ज़ है तो उसे माफ कर दिया जाए. इस संबंध मे फ्रांस ने जर्मनी के एक प्रस्ताव का समर्थन किया है जबकि इटली जी आठ देशों कि बैठक बुलाने की मांग की है. एएफपी संवाद समिति के अनुसार अमरीकी विदेश मंत्री कोलिन पावेल ने जर्मनी के प्रस्ताव में रुचि दिखाई है. राहत सामग्री का ढेर पावेल ने कहा है कि आपदा के लिए राहत कार्यों का समन्वय करना संयुक्त राष्ट्र की बड़ी ज़िम्मेदारी है. हालांकि दूसरी तरफ अमेरिका ने आस्ट्रेलिया, जापान और भारत के साथ मिलकर एख कोर समूह बनाया है. इन सबके बावजूद राहत सामग्री को लोगों तक पहुंचाने में आ रही मुश्किलें दूर नहीं हुई हैं. क्योंकि प्रभावित देशों में आधारभूत सुविधाएं नष्ट हो चुकी हैं. हवाई अड्डों और सामग्री वितरण केंद्रों पर सामग्रियों का ढेर लग रहा है लेकिन इन्हें लोगों तक पहुंचाना मुश्किल हैं क्योंकि प्रभावित इलाकों में न तो सड़कें हैं और न दूरसंचार का कोई साधन. नक्शे में देखिए भूकंप और उसके बाद का प्रभाव
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