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शहर में सूनामी के बाद सन्नाटा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
तमिलनाडु में इसाईयों के लिए पवित्र शहर माने जाने वाले वेलानगनी में सूनामी की तबाही के बाद सन्नाटा छा गया है. आम तौर पर क्रिसमस के बाद इस शहर में कम से कम 15000 लोग आते थे यहां के चर्चों को देखने. रविवार को सूनामी की लहरों नें 2000 लोगों की जान ले ली जिसके बाद इक्का दुक्का लोग ही यहां रुके हैं. बैसीलिका चर्च के सेल्वानथन कहते हैं " हमने नए साल की संध्या पर एक प्रार्थना सभा का आयोजन किया था लेकिन उसमें बहुत कम लोग आए. " राज्य के नागपट्टनम शहर से थोड़ी ही दूर बसे वेलानगनी की दुकानों में ईसा मसीह और वर्ज़न मैरी की मूर्तियां , लोबान आदि बेचे जाते थे लेकिन सूनामी ने सबकुछ तबाह कर दिया. समुद्र तट पिछले हफ्ते तक शहर के समुद्र तट पर कई दुकानें थीं और लोगों का गुजर बसर होता था लेकिन अब सिर्फ टूटे हुए बांस के टुकडे दिखाई पड़ते हैं. दुकानदार षण्मुग्म बताते हैं " जब ईसाई तीर्थयात्री यहां आते थे तो एक दिन में 2000 रुपए कमा लेते थे लेकिन अब यहां कौन आएगा. "
वो कहते हैं " मुझे अपनी जीविका तलाश करनी होगी. सबकुछ ठीक होने में पता नहीं कितना समय लगे." ऐसी ही हालत पूरे शहर की है. साल के इस समय तीर्थयात्रियों से भरे रहने वाले होटल बिल्कुल खाली हैं. समुद्र तट पर दुकान लगाने वालों को सूनामी लहरों से बचने का मौका नहीं मिला और उनमें से कई मारे गए. कई दुकानदार अभी भी लापता है. कई ईसाई तीर्थयात्री जो तट पर नहा रहे थे, लहरों में गुम हो गए. तट पर लाशों को बिना पहचान के ही दफना दिया गया है. |
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