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अंडमान निकोबार के लिए विशेष कार्यदल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अंडमान निकोबार द्वीप समूह में राहत कार्यों के लिए विशेष कार्यदल बनाने की घोषणा की है. आंध्र प्रदेश के शहर विजयवाड़ा में पत्रकारों से बातचीत करते हुए प्रधानमंत्री ने एकीकृत कार्यदल राहत, बचाव और पुनर्वास के सभी कामों की निगरानी करेगा. इस कार्यदल में अंडमान निकोबार के उप राज्यपाल, उस क्षेत्र में तैनात सेना के वरिष्ठतम अधिकारी और केंद्र शासित प्रदेश के मुख्य सचिव सहित कई केंद्रीय अधिकारी भी शामिल होंगे. प्रधानमंत्री ने बताया कि दो केंद्रीय मंत्रियों की ड्यूटी भी पोर्ट ब्लेयर में लगाई गई है ताकि वे राहत और पुनर्वास के काम की पूरी निगरानी कर सकें और केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के रूप में ज़रूरी निर्णय कर सकें लेकिन उन्होंने अभी इन मंत्रियों के नामों की घोषणा नहीं की है. उन्होंने सूनामी से तबाह हुए आँध्र प्रदेश के इलाक़ों के लिए आर्थिक सहायता की भी घोषणा की. उन्होंने बताया कि भारत के सभी प्रभावित राज्यों को पाँच अरब रूपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी जिसमें से एक अरब रूपए आंध्र प्रदेश को मिलेंगे. प्रधानमंत्री ने कहा कि अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों से विचार विमर्श के बाद उन्हें दी जाने वाली सहायता राशि की घोषणा की जाएगी. प्रधानमंत्री के साथ यात्रा कर रहे एक वरिष्ठ अधिकारी ने बाद में पत्रकारों को बताया कि तमिलनाडु को ढाई अरब और केरल को एक अरब रूपए दिए जाएँगे जबकि पाँडिचेरी को पचास करोड़ रूपए. मनमोहन सिंह ने सूनामी से हुई तबाही पर गहरा दुख प्रकट करते हुए कहा कि भविष्य में ऐसी आपदाओं के प्रबंधन के लिए एक स्थायी एजेंसी के गठन किया जाएगा. प्रधानमंत्री ने सूनामी को राष्ट्रीय आपदा बताते हुए कहा कि वे दो-एक दिन में सभी राजनीतिक दलों की एक बैठक बुलाएँगे जिसमें राहत और पुनर्वास के बारे में चर्चा की जाएगी. |
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