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राहत कार्य से लोग असंतुष्ट | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सूनामी लहरों की तबाही के बाद सभी देशों की सरकारें व्यापक स्तर पर राहत और बचाव के काम में लगी हुईं हैं. कहीं धन के ज़रिए तो कहीं सैन्य सहायता दे कर. आम लोग भी पीछे नहीं हैं. पोर्ट ब्लेयर के लेफ्टिनेंट गवर्नर प्रोफेसर राम कापसे ने पत्रकारों से कहा कि उन्हें म्यूनिसिपल अधिकारियों ने बताया है कि गुरूवार रात तक पानी की सप्लाई एकदम सामान्य हो जाएगी. इलाक़े में बिजली की सप्लाई भी एक-दो दिन से ठीक-ठाक है. अंडमान से लाए गए क़रीब 3000 लोगों को यहाँ विभिन्न स्कूलों में राहत कैम्पों में रखा गया है. लेकिन शिकायतें आ रही हैं कि इनके पास सरकार की तरफ से कोई सामग्री नहीं पहुँच रही है. जो भी आम ज़रूरत की चीज़ें है, वह जनता पहुँचा रही है. इससे सरकार के ख़िलाफ काफी नाराज़गी है. हालाँकि सरकार का कहना है कि कई द्वीपों पर खाने-पीने का सामान गिराया जा रहा है. लेकिन इन कैम्पों में आने वाले लोगों की बात सुनने के बाद सरकार के ये दावे ग़लत लग रहे हैं. बे द्वीप और कार-निकोबार से आए लोगों का कहना था कि पिछले चार-पाँच दिन से उन्हें खाने-पीने के लिए कुछ भी नसीब नहीं हुआ था. सरकार का ध्यान ज़्यादातर बचाव की तरफ है, इसलिए लापता लोगों के रिश्तेदारों को भी कुछ ख़ास मदद नहीं मिल पा रही है. लेफ्टिनेंट गवर्नर के घर के सामने इकट्ठे हुए कुछ लोगों ने बताया कि वे तो बाहर आ गए लेकिन 700 से ज़्यादा लोग अभी भी एयरपोर्ट पर फंसे हैं. मगर सरकार अब कह रही है कि उनको वहाँ से नहीं लाया जाएगा. इन लोगों का कहना था कि वहाँ हालात बदतर होते जा रहे हैं और वह जगह रहने लायक नहीं रह गई है. जंगलों में लोगों के शव पड़े हुए हैं. पूरे इलाक़े में दुर्गंध फैल चुकी है. जो लोग वहाँ फंसे हुए हैं वे बीमार है - उन्हें डायरिया हो गया है, उल्टियाँ भी हो रही हैं. |
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