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अंडमान के लिए विशेष कार्यदल गठित | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अंडमान निकोबार में राहत कार्यों की निगरानी के लिए भारत सरकार ने एक विशेष कार्यदल का गठन किया है. अंडमान में पीड़ितों ने शिकायत की थी कि उन तक राहत सामग्री नहीं पहुँच पा रही है जिसके बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस कार्यदल के गठन की घोषणा शुक्रवार को की थी. इस कार्यदल के गठन की संभावना पिछले कुछ दिनों से व्यक्त की जा रही थी क्योंकि स्थानीय प्रशासन स्थिति से निबटने में नाकाम दिखाई दे रहा था. अंडमान निकोबार के उप राज्यपाल इस कार्यदल के अध्यक्ष होंगे लेकिन जानकारों का कहना है कि व्यावहारिक स्तर पर अगुवाई लेफ़्टिनेंट जनरल बीएस ठाकुर करेंगे जो अंडमान क्षेत्र में सेना के सबसे बड़े अधिकारी हैं. इसे एक तरह से स्थानीय प्रशासन के हाथ से लेकर सेना को कमान सौंपने के रूप में देखा जा रहा है, सेना के काम की स्थानीय लोगों ने काफ़ी सराहना भी की है. कई स्थानों से हैजा फैलने की ख़बरें मिली हैं क्योंकि वहाँ पीने के साफ़ पानी की किल्लत अभी भी बनी हुई है लेकिन स्थानीय प्रशासन ने बीमारी फैलने की ख़बर को ग़लत बताया है. राहत अधिकारियों का कहना है कि अंडमान निकोबार द्वीप समूह के ज़्यादातर टापुओं पर राहत सामग्री पहुँच गई है लेकिन कुछ स्थानों पर पुलों और सड़कों के टूटने के कारण समस्याएँ आ रही हैं. लोगों की शिकायतों का सिलसिला जारी है कि उन तक समय पर और पर्याप्त मात्रा में राहत सामग्री नहीं पहुँच रही है. अंडमान में सबसे बड़ी समस्या पीने के पानी की है, अंडमान में एक स्थान पर तो उग्र भीड़ ने खाने-पानी की माँग करते हुए एक सरकारी अधिकारी पर हमला कर दिया. अंडमान में लापता होने वाले लोगों की कुल संख्या पौने चार हज़ार तक बताई जा रही है जबकि वहाँ सात सौ से अधिक लाशें मिल चुकी है. |
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