BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
बुधवार, 29 दिसंबर, 2004 को 13:26 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौत से आँखें मिलाकर गुज़ारी रातें

लोयला स्कूल के बच्चे
ये स्कूली बच्चे छुट्टियाँ मनाने अंडमान गए थे
झारखंड राज्य के जमशेदपुर शहर स्थित लोयला हाईस्कूल के छात्रों को अपने जीवन के पहले ही स्कूली दौरे में कुछ ऐसे दौर से गुज़रना पड़ा जिसे भुला सकना उनके लिए असंभव होगा.

अंडमान निकोबार द्वीप समूह की राजधानी पोर्टब्लेयर से इंडियन एरलाइंस के एक विशेष विमान से कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर पहुँचे ये छात्र कहते हैं -

"हमने खुले आसमान के नीचे दो रातें मौत की आंखों में आंखे डालकर गुजारी हैं.अपने जीवन के पहले स्कूली दौरे पर पहुंचने के बाद लगा कि जीवन की एक तमन्ना पूरी हो गई है. यह दौरा अविस्मरणीय होगा, यह तो सोचा था. लेकिन जो कुछ हुआ, उसकी तो कल्पना तक नहीं की थी."

स्कूल के एक छात्र यश करण कहते हैं,"होटल में हमारा बिस्तर झूले की तरह हिल रहा था. एक पल को लगा कि हम अभी जहाज़ पर ही हैं. उसके बाद अचानक दोस्तों के चीखने की आवाजें आईं और मैं होटल से बाहर भागा."

इन छात्रों ने अपने शिक्षकों के साथ 26 दिसंबर की रात तो बाहर शिविर में गुज़ारी और अगली रात हवाईअड्डे के बाहर.

छात्रों का यह दल चेन्नई होते हुए 24 दिसंबर की शाम को पोर्टब्लेयर पहुँचा था और इसे नए साल में लौटना था.

मौत से सामना

 इससे पहले उसने हॉलीवुड की फ़िल्मों में ही ऐसा मंज़र देखा था
अंगद सोनी

एक अन्य छात्र अधीरथ राय ने कहा,"मैं बहुत डर गया था. हिलती इमारतें, शवों के ढेर. चारों ओर तबाही का मंजर, न तो बिजली थी और न ही पीने का पानी."

उसने आगे कहा,"रविवार तड़के हुई तबाही के बाद दो रातें व दो दिन बिना सोए ही गुज़ार दीं."

रितूजा दे ने कहा,"संकट की उस घड़ी में हम सब एक साथ थे. इससे हमें काफी आत्मबल मिला. हम सारी रात प्रार्थना करते रहे."

अंगद सोनी ने इस दिन को ऐसे याद किया,"इससे पहले उसने हॉलीवुड की फ़िल्मों में ही ऐसा मंज़र देखा था. लेकिन सब कुछ अपनी आँखों के सामने घटते देखना एक ऐसा अनुभव है जिसे जीवन भर भुलाया नहीं जा सकता."

एक नई समझ

हमें पता चल गया है कि यह जीवन कितना कीमती है. इस हादसे ने हमें सही अर्थों में एक दूसरे का सुख-दुख बांटते हुए जीना सीखा दिया है
करण भारद्वाज

लेकिन इस हादसे ने जहाँ छात्रों को समय से पहले लौटने को मजबूर कर दिया, वहीं जीवन के प्रति एक नया नज़रिया भी समझा दिया.

करण भारद्वाज नामक एक अन्य छात्र का कहना था,"एक तरह से हमारा पुनर्जन्म हुआ है. हमें पता चल गया है कि यह जीवन कितना कीमती है. इस हादसे ने हमें सही अर्थों में एक दूसरे का सुख-दुख बांटते हुए जीना सीखा दिया है."

इन छात्रों के साथ जाने वाली स्कूल की शिक्षिका शर्मिष्ठा राय का कहना था,"उनके छात्रों का जीवित बचना एक सुखद आश्चर्य है."

स्कूल के वाइस-प्रिसिंपल फ़ादर सेबेस्टियन कहते हैं,"इस प्राकृतिक आपदा ने छात्रों को चारित्रिक तौर पर काफी मज़बूत बना दिया है. इससे वे जीवन में आने वाली चुनौतियों का सहजता से सामना कर सकते हैं. वे कहते हैं कि छात्रों को जीवन की अहमियत का पता चल गया है."

अंडमान निकोबार द्वीपसमूह ख़ासकर पश्चिम बंगाल के लोगों के लिए पसंदीदा पर्यटन स्थल रहा है.

वहाँ से विशेष विमानों से सुरक्षित लौटने वाले सभी पर्यटकों की ज़ुबान पर लगभग ऐसी ही कहानियाँ हैं.

अब भी हादसे को बयान करते वक्त इस खौफ़नाक मंज़र की छाया उनकी आँखों से झाँकने लगती है.

वे ख़ुद को भाग्यशाली मानते हैं.

इससे जुड़ी ख़बरें
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>