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विदेशी एजेंसियों के काम करने पर रोक | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में अंडमान निकोबार के प्रशासन ने सूनामी प्रभावित इलाक़ों में विदेशी राहत एजेंसियों के काम करने पर रोक जारी रखी है. मेडीसिन साँ फ्रंटिए यानी एमएसएफ़ और ऑक्सफ़ैम जैसी कई बड़ी स्वयंसेवी संस्थाओं ने अंडमान में स्थानीय प्रशासन के साथ सहयोग करने की पेशकश की थी लेकिन उन्हें मना कर दिया गया. केंद्र शासित प्रदेश अंडमान निकोबार के अधिकारियों का कहना है कि राहत सामग्री का स्वागत है लेकिन उनके वितरण का काम स्थानीय प्रशासन ही करेगा. पोर्ट ब्लेयर से बीबीसी के संवाददाता सुबीर भौमिक ने बताया है कि प्रशासनिक अधिकारी सेना के सहयोग से राहत सामग्री का वितरण कर रहे हैं और विदेशी एजेंसियों के लोगों को इस काम में हाथ बँटाने की अनुमति नहीं दी गई है. एमएसएफ़ का एक प्रतिनिधि पोर्ट ब्लेयर में मौजूद है जिसने अंडमान सरकार से अनुरोध किया है कि संगठन के डॉक्टरों को प्रभावित इलाक़ों में जाने की अनुमति दी जाए. एमएसएफ़ की प्रतिनिधि शर्ली मक्वीन ने कहा, "यह बहुत ही हताश करने वाला अनुभव था, अधिकारियों ने तो साफ़ शब्दों में इनकार किया और न ही अनुमति दी लेकिन हम कोशिश करते रहेंगे." पोर्ट ब्लेयर में मौजूद ऑक्सफ़ैम के प्रतिनिधि का अनुभव भी इससे कुछ अलग नहीं रहा. शिकायतें अंडमान निकोबार में लोग राहत और पुनर्वास को लेकर काफ़ी शिकायतें कर रहे हैं, ख़ास तौर पर पीने का पानी न मिलने के मामले में. लेकिन प्रशासन का कहना है कि सेना और स्थानीय प्रशासन के कर्मचारी राहत सामग्री के वितरण के लिए पर्याप्त संख्या में मौजूद हैं. विदेशी नागरिकों के राहत सामग्री बाँटने पर ही नहीं, बल्कि प्रभावित इलाक़ों में भी जाने पर रोक है जबकि भारतीय नागरिकों को प्रभावित इलाकों में जाने के लिए विशेष अनुमति लेने की आवश्यकता पड़ती है. अंडमान प्रशासन ने सेना से भी कहा है कि वे अपने उड़ानों में और पत्रकारों को लेकर प्रभावित इलाक़ों में न जाएँ. राज्य के मुख्य सचिव वीवी भट्ट ने बीबीसी से कहा कि "राहत सामग्री पहुँचाना सरकार की प्राथमिकता है लेकिन मीडिया कवरेज के लिए सुविधा देना नहीं." अंडमान निकोबार द्वीप समूह में मरने वालों की कुल संख्या आधिकारिक तौर पर 712 बताई गई है क्योंकि इतनी ही लाशें मिली हैं लेकिन इस केंद्र शासित प्रदेश मे तीन हज़ार से अधिक लोग लापता हैं जिनके जीवित बचने की संभावना कम ही बताई जा रही है. |
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