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रविवार, 02 जनवरी, 2005 को 13:31 GMT तक के समाचार
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सूनामी: क्यों मची इतनी तबाही
लहरें
किसी को जल्दी अंदाज़ा नहीं लगा था सूनामी की तेज़ी का
हिंद महासागर मे भूकंप आने के 15 मिनट बाद ही पास के एक शोध केंद्र ने रिपोर्ट दी थी लेकिन इसमें सूनामी का जिक्र नहीं था.

अब इस हादसे के हफ्ते भर बाद भूकंप विज्ञानियों ने एक खाका तैयार किया है जिसमें ये बताने की कोशिश की गई है कि हिंद महासागर के 4000 किलोमीटर के क्षेत्र में छह घंटों तक तबाही मचाने वाली सूनामी लहरों की हलचल कैसे और कहां से शुरू हुई.

समुद्र के भीतर धरती की जुड़ी हुई दो प्लेटों या जुड़ी हुई दरारें खिसक जाने से उत्तर से दक्षिण की तरफ पानी की लगभग 1000 किलोमीटर लंबी एक जबर्दस्त दीवार खड़ी हो गई जो कि भूकंप के केंद्र के चारों तरफ नहीं फैली बल्कि उसका रुख पूर्व से पश्चिम की तरफ हो गया.

इस भूकंप के पहले घंटे में ही 15 से 20 मीटर लंबी ऊंची सूनामी लहरों ने सुमात्रा के उत्तरी तट को तहस नहस कर डाला और साथ ही लपेट में आये आचेह प्रांत का तटीय इलाक़ा शहर पूरी तरह पानी में डूब गया.

उसके कुछ ही देर बाद भारत के निकोबार और अंडमान द्वीप पर सूनामी लहरों का कहर टूटा.

ज़बर्दस्त तेज़ी के साथ पूर्व की तरफ बढ़ रहे सूनामी के प्रवाह ने फिर थाईलैंड और बर्मा के तटों पर हमला बोला और आरंभिक झटकों के दो घंटों के अंदर अंदर ही पश्चिम की तरफ बढ़ती सूनामी लहरें श्रीलंका और दक्षिण भारत के समुद्र तटों पर हावी हो गईं.

लेकिन यहां तक आते आते सूनामी का प्रवाह कम हो गया था और तटों पर पहुंचते पहुंचते लहरें सामान्य समुद्री सतह से 5 से 10 मीटर तक ऊंची थीं.

भयंकर लहरें
बीस फुट ऊंची लहरें खतरनाक ही तो थी.

हालांकि इस स्तर पर आते आते कई समाचार एजेंसियों ने सूनामी से हो रही तबाही की रिपोर्टें देनी शुरू कर दी थी लेकिन ऐसा कोई सुनियोजित तंत्र नहीं था जिसके तहत हिंदमहासागर में पश्चिम की तरफ बढ़ती जा रही सूनामी के ख़तरों की सूचना संबंधित देशों की सरकारों तक पहुंचाने की कोई व्यवस्था की जा सके. जबकि उस वक्त के बाद कोई साढ़े तीन घंटे तक सूनामी की लहरों ने और भारी तबाही मचाई.

मालदीव और सेशल्स के समुद्र तटों ने इसी साढ़े तीन घंटे की अवधि में सूनामी के कहर को झेला, हालांकि इस वक्त तक प्रभावित एशियाई देशों के कूटनीतिज्ञों ने भूकंप विशेषज्ञों से संपर्क साध लिया था ये जानने के लिये कि कहीं सूनामी से और किसी और देश में तबाही का अंदेशा तो नहीं है.

लेकिन अजीब बात थी कि अफ्रीकी देशों को वहां आ रही सूनामी लहरों की चेतावनी नहीं दी गई. जबकि सूनामी में उस वक्त इतनी ताकत थी कि वो सोमालिया और केन्या के तटों पर भारी तबाही मचा सकती थी और वो तबाही वहां हुई.

इसके बाद जाकर कहीं सूनामी का प्रकोप शांत हुआ और वैज्ञानिकों का एक अंदाज़ा ये भी है कि इस सूनामी में 9000 परमाणु बमों जितनी ताकत थी.

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