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मंगलवार, 04 जनवरी, 2005 को 23:32 GMT तक के समाचार
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मुसीबतें पहले ही क्या कम थीं कि...
विशेषज्ञों के अनुसार बच्चे इन अपराधियों के षड्यंत्र का आसानी से शिकार हो सकते हैं
प्रभावित परिवार और बच्चे
सूनामी आपदा से बच गए कुछ लोगों की मुसीबतें अभी कम नहीं हुई हैं बल्कि मानव ही उनके लिए मुसीबतों की वजह बन रहा है.

कुछ लोग प्राकृतिक आपदा की मार सहने के बाद कुछ ऐसे अनुभवों से दो-चार हुए हैं जिसकी शायद कल्पना भी नहीं की जा सकती.

ये नया ख़तरा है अपराधियों और मौक़ापरस्त उन लोगों का जो अपनी बिखरी हुई ज़िंदगी को समेटने की कोशिश कर रहे इन लोगों के हालात से फ़ायदा उठाने की कोशिश में लगे हैं.

अपराध मनोवैज्ञानिक माइक बेरी का इस बारे में कहना है कि ऐसे अपराधियों और मौक़ापरस्त लोगों के लिए यह प्राकृतिक हादसा एक सुनहरे मौक़े जैसा हो गया है जो इसके ज़रिए धन बनाना चाहते हैं.

माइक बेरी ने बीबीसी को बताया कि ऐसे माहौल में कुछ लोग इतने हताश हो चुके हैं कि वे अपराधियों के चंगुल में आसानी से फँस सकते हैं.

वैसे जितने बड़े स्तर पर ये आपदा आई है उसके बाद अभी तक अपराध से जुड़े कुछ ही मामले सामने आए हैं मगर इस आपदा से टूट चुके लोगों के लिए इन अपराधों का असर काफ़ी भयानक हो सकता है.

कुछ देशों में तो लूटपाट की घटनाएँ सामने भी आने लगी हैं और आपदा का शिकार हुए घरों, दुकानों बल्कि यहाँ तक कि शवों को भी निशाना बनाया जा रहा है.

'यौन शोषण' के आरोप

श्रीलंका में शरणार्थी शिविरों में कुछ प्रभावितों ने तो कथित तौर पर यौन शोषण के आरोप भी लगाए हैं.

सूनामी प्रभावित बच्चे
सूनामी प्रभावित इलाक़ों में बच्चों के यौन व्यापार का ख़तरा बढ़ गया है

इसके अलावा ऐसे भी आरोप हैं कि अपराधियों के गैंग इस आपदा में अनाथ हुए बच्चों के साथ दोस्ती करके उन्हें यौन व्यापार में लगे लोगों को बेच रहे हैं.

इंडोनेशिया सरकार ने 16 वर्ष से कम के बच्चों को आचे प्रांत से दूसरी जगह ले जाने पर प्रतिबंध लगा दिया है.

संयुक्त राष्ट्र की बच्चों से जुड़ी संस्था यूनिसेफ़ के इंडोनेशिया में प्रवक्ता जॉन बड के अनुसार इस आपदा के बाद कुछ बच्चों को तो अच्छे घरों के लोगों ने गोद लिया है मगर यूनिसेफ़ इस बात को लेकर बहुत चिंतित है कि कुछ अन्य बच्चे अपराधियों का शिकार हो रहे हैं.

जॉन बड ने बताया कि यूनिसेफ़ आचे के आसपास ऐसे बच्चों की संख्या का ध्यान रखने के लिए पंजीकरण शिविर लगाया है.

मगर मामला सिर्फ़ इंडोनेशिया तक ही सीमित नहीं है. यूनिसेफ़ के अनुसार भारत में एक व्यक्ति एक बच्चे का रिश्तेदार बनकर आया मगर बाद में पता चला कि वह धोखेबाज़ था.

श्रीलंका में अधिकारी गॉल में दो लड़कियों के साथ हुए यौन दुर्व्यवहार के मामले की जाँच कर रहे हैं.

ये तो जीवितों का हाल है, कुछ स्थानों पर तो शव भी सुरक्षित नहीं हैं.

थाईलैंड में लोगों के शवों पर से गहने उतार लिए गए, जबकि उनके घरों और दुकानों में भारी लूटपाट भी हुई है.

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