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मंगलवार, 04 जनवरी, 2005 को 00:52 GMT तक के समाचार
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कैसे बचीं अंडमान की जनजातियाँ?
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कबीलों का सदियों पुराना ज्ञान काम आया
अंडमान निकोबार द्वीप समूह पर बसी पाँच आदिम जनजातियों को सूनामी की लहरों से कोई नुक़सान नहीं पहुँचा है क्योंकि लहरों के आने के समय वे उनसे दूर थे.

एंथ्रोपॉलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया यानी एएसआई के निदेशक डॉक्टर वीआर राव कहना है कि ये आदिम जनजातियाँ प्रकृति से निकटता और उसको समझने की सदियों की पुरानी अपनी तरकीबों के कारण जीवित बचे.

डॉक्टर राव का कहना है कि "जनजातियों को प्राकृतिक आपदा का अनुमान पहले से हो जाता है क्योंकि वे जीव-जंतुओं और प्रकृति के संकेतों को समझते हैं. यही वजह है कि इन जनजातियों में किसी को कोई क्षति नहीं पहुँची है."

 जनजातियों को प्राकृतिक आपदा का अनुमान पहले से हो जाता है क्योंकि वे जीव-जंतुओं और प्रकृति के संकेतों को समझते हैं. यही वजह है कि इन जनजातियों में किसी को कोई क्षति नहीं पहुँची है
डॉक्टर वीआर राव

एएसआई का कहना है कि पाँच जनजातियों--ओंगी, जारवा, शॉम्पनी, सेंटीनली और ग्रेट अंडमानीज़--के पुरखों ने आपदाओं की चेतावनी को समझने की पूरी प्रणाली विकसित की है जिनमें फल-फूलों, मिट्टी, जीव-जंतुओं के व्यवहार और पानी में आने वाले परिवर्तनों की निगरानी रखी जाती है.

डॉक्टर राव का कहना है कि ये जनजातियाँ दो हज़ार से छह हज़ार साल पहले से इन टापुओं पर रह रही हैं और अब तक अपनी प्रकृति के बारे में उनके ज्ञान को कलमबंद नहीं किया गया है.

वे कहते हैं कि "जनजातियों के इस दुर्लभ ज्ञान को दस्तावेज़ के रूप में एकत्र किया जाना चाहिए जिसके आधार पर तटीय इलाक़ों में सुरक्षा और चेतावनी के इंतज़ाम किए जा सकते हैं."

निकोबारी

एएसआई के मानव विज्ञानियों का कहना है कि निकोबारी ही एक ऐसी जनजाति है जिसके लोगों को कुछ नुक़सान पहुँचा है, निकोबारी सबसे बड़ी आबादी वाला कबीला (लगभग 30 हज़ार) है और ये लोग निकोबार के 12 टापुओं पर बसते हैं.

किसकी कितनी आबादी
निकोबारी--30 हज़ार
ओंगी--100
जारवा--270
ग्रेट अंडमानीज़--45
शॉम्पनी--200

वैज्ञानिकों का कहना है कि यह अभी पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता कि इस जनजाति को कितना नुक़सान हुआ है.

डॉक्टर राव का कहना है कि निकोबारी लोग एक तो सुनामी भूकंप के केंद्र के नज़दीक थे, दूसरे वे जंगलों से उस तरह नहीं जुड़े हैं जैसे दूसरी जनजातियाँ, निकोबारी आम तौर पर खेती-बाड़ी करते हैं.

अंडमान निकोबार की जनजातियों में शॉम्पनी (लगभग 200) अकेली जनजाति है जो मंगोल नस्ल की है जबकि बाक़ी सभी जनजातियाँ नीग्रोईड यानी अफ्रीकियों जैसी हैं.

जनगणना के ताज़ा आँकड़ों के मुताबिक़ जारवा कबीले के लोगों की जनसंख्या 270, ओंगी की लगभग 100 और ग्रेट अंडमानीज़ की 45 के करीब है.

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