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पोर्ट ब्लेयर में पानी सबसे बड़ी चुनौती | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अंडमान निकोबार द्वीपसमूह की राजधानी पोर्ट ब्लेयर में पीने के पानी की बेहद किल्लत है. सरकारी तौर पर इस केंद्र शासित प्रदेश में समुद्री तूफ़ान के कारण मरनेवालों की संख्या 700 से अधिक बताई जा रही है और लगभग 10,000 लोग लापता हैं. प्रशासन का कहना है कि वह भरसक प्रयास कर रहा है कि महामारी फैलने से रोका जा सके. पीने के पानी की कमी के कारण शहर में पानी के टैंकरों पर पानी के लिए धक्का-मुक्की हो रही है. दूकानों और होटलों में पानी पाँच गुना अधिक कीमत पर बेचा जा रहा है. सैनिक इलाक़ों में भी पानी के वितरण पर नियंत्रण लागू कर दिया गया है. पर्यावरणवादियों का कहना है कि जब तक यहाँ पानी की समस्या हल नहीं होती तब तक महामारी का ख़तरा बना रहेगा. चुनौती
पोर्टब्लेयर में एक लाख से भी अधिक लोग रहते हैं मगर केवल 13 पानी के टैंकरों से उनको पानी दे पाना बहुत मुश्किल साबित हो रहा है. शहर के निवासियों के अलावा गाँवों से आए 6,000 शरणार्थियों के लिए भी पानी की आवश्यकता होने के कारण समस्या और बड़ी हो गई है. दरअसल रविवार के सूनामी तूफ़ान के कारण शहर को पानी की आपूर्ति करनेवाली 14 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन टूट गई है और तेज़ लहरों के कारण उनकी मरम्मत में और समस्या आ रही है. एक मुश्किल और है कि मज़दूर ऊँची जगहों पर चले गए हैं और काम पर वापस आने के लिए तैयार नहीं हो रहे. |
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