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विमानों से राहत सामग्री गिराई गई | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय सेना ने कहा है कि अंडमान निकोबार के सुदूरवर्ती द्वीपों पर सूनामी लहरों से बचे लोगों तक राहत सामग्री पहुँचनी शुरू हो गई है. वायु सेना के विमानों ने वहाँ खाद्य सामग्री और पानी की बोतलें गिराई हैं. समाचार एजेंसी एपी के अनुसार भारत के गृह राज्य मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने अंडमान निकोबार की राजधानी पोर्ट ब्लेयर में कहा, "हम राहत सामग्री के साथ हर जगह पहुँच रहे हैं. मुझे अब भी उम्मीद है कि लापता लोगों में से अनेक जीवित होंगे." उन्होंने कहा कि सूनामी पीड़ितों के लिए चलाया जा रहा राहत अभियान भारतीय इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा है. पिछले रविवार को आए भूकंप और उसके बाद हिंद महासागर में पैदा हुई सूनामी लहरों की चपेट में आकर भारत में 9000 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं. अंडमान निकोबार के द्वीपों पर मरने वालों की संख्या 800 से ऊपर पहुँच चुकी है. सरकार की इस बात के लिए आलोचना की जा रही थी कि सुदूरवर्ती द्वीपों तक सहायता सामग्री पहुँचाने की कोई व्यवस्था नहीं की गई है. अंडमान निकोबार के दक्षिणी हिस्से में स्थित कैम्पबेल बे से बचाए गए अनूप घटक ने कहा, "वहाँ खाने के लिए कुछ नहीं है. कुछ दिनों में वहाँ भूख से मौतें होने लगेंगी." शुक्रवार को सुदूरवर्ती द्वीपों से 3000 लोगों को सुरक्षित निकाला गया. वहाँ क़रीब साढ़े पाँच हज़ार लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं. अंडमान निकोबार में पिछले सात दिनों में भूकंप के कई झटके महसूस किए गए हैं. |
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