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'दो तिहाई लोग काम पर लौट चुके हैं' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन के एक सहायता संगठन ऑक्सफ़ैम ने कहा है कि 26 दिसंबर 2004 को एशिया में समुद्री लहरों सूनामी से उठे समुद्री तूफ़ान में जिन लोगों ने अपना रोज़गार खो दिया था, एक साल बाद उनमें से क़रीब दो तिहाई लोग फिर से कामकाज करने लगे हैं. ऑक्सफ़ैम ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की है जिसमें कहा गया है कि ऐसा इसलिए संभव हो सका है कि लोगों ने तूफ़ान में हुई तबाही का कूड़ा-कचरा साफ़ करने के लिए जो योजनाएँ शुरू की गईं उनमें बड़ी संख्या में लोगों को रोज़गार मिल सका है. लेकिन ऑक्सफ़ैम का यह भी कहना है कि तूफ़ान में क़रीब दस लाख लोगों का रोज़गार छिन गया था और अभी सभी लोगों को को समुचित रोज़ी-रोटी मुहैया कराने के लिए बहुत कुछ किया जाना बाक़ी है. ऑक्सफ़ैम ने पिछले सप्ताह कहा था कि जिन लोगों के घर तबाह हो गए थे उनमें से क़रीब बीस प्रतिशत लोगों को उस तूफ़ान के एक साल पूरा होने तक एक संतोषजनक आवास सुविधा मिल जाएगी. कामकाज पर वापसी नाम की इस रिपोर्ट में ऑक्सफ़ैम ने कहा है कि साल 2006 के आख़िर तक क़रीब 85 प्रतिशत लोगों को फिर से रोज़गार मिल जाएगा. ऑक्सफ़ैम ने कहा है कि सूनामी से बुरी तरह से प्रभावित इलाक़ों में बेरोज़गारी की बहुत बुरी हालत हो गई थी. उनमें से श्रीलंका के इलाक़ों में क़रीब बीस प्रतिशत और इंडोनेशिया के आचे प्रांत में एक तिहाई लोग बेरोज़गारी का शिकार हो गए थे. कोशिश जारी है ऑक्सफ़ैम की रिपोर्ट के अनुसार सूनामी से जो लोग बुरी तरह प्रभावित हुए थे उनमें मछुआरों के परिवार, छोटे किसान, मज़दूर, पर्यटन उद्योग में लगे लोग और छोटा-मोटा कारोबार करने वाले लोग थे जिन पर आज भी उस तबाही का असर देखा जा सकता है.
ऑक्सफ़ैम के पर्यवेक्षकों के अनुसार सूनामी ने लगभग बीस लाख लोगों को ग़रीबी के गर्त में धकेल दिया था लेकिन एक अनुमान के अनुसार साल 2007 तक उनमें से क़रीब चौदह लाख लोग अपनी पहले जैसी हैसियत फिर से बना लेंगे. ऑक्सफ़ैम की निदेशक बारबरा स्टोकिंग ने कहा है कि लोगों में हालात ठीक करने की उल्लेखनीय हिम्मत देखी गई है. उन्होंने कहा, "एक साल पूरा होने पर लगभग आधे लोग फिर से कामकाज शुरू कर चुके हैं. तबाह हो चुकी नावों में से ज़्यादातर के बदले नई मिल गई हैं और खेती के लायक हज़ारों हैक्टेयर ज़मीन साफ़ करके फिर से खेती के लिए तैयार है." हालाँकि ऑक्सफ़ैम की रिपोर्ट में ज़ोर दिया गया है कि ग़रीबी के बहुत से कारण अब भी मौजूद हैं, ख़ासतौर से तटवर्ती इलाक़ों में, जहाँ मछली पकड़ने और पर्यटन जैसे कामकाज पर ज़्यादातर लोग निर्भर होते हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें दो पूर्व राष्ट्रपति सूनामी प्रभावित देशों में19 फ़रवरी, 2005 | पहला पन्ना सूनामी में मृतकों की संख्या बढ़ी19 जनवरी, 2005 | पहला पन्ना 'संयुक्त राष्ट्र को आधी रकम ही मिल पाई'26 जनवरी, 2005 | पहला पन्ना इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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