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चीन के मिसाइल परीक्षण से बढ़ी चिंता | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
चीन ने कथित रूप से अंतरिक्ष में पिछले हफ़्ते एक मिसाइल परीक्षण किया है जिसपर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के कई देशों ने उसकी आलोचना की है. चीन के इस परीक्षण पर चिंता जताने वाले देशों में जापान के साथ-साथ अमरीका और ऑस्ट्रेलिया भी शामिल हैं. माना जा रहा है कि चीन ने मौसम की जानकारी देने वाले एक उपग्रह को नष्ट करने के लिए पिछले हफ़्ते जमीन से मध्यम दूरी की बैलेस्टिक मिसाइल दागी. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि पिछले 20 से भी अधिक वर्षों में मिसाइल से उपग्रह को नष्ट करने का यह पहला परीक्षण है. हालाँकि यह तकनीक नई नहीं है, लेकिन इस परीक्षण ने चीन की बढ़ती सैन्य शक्ति को आलोचकों के निशाने पर ला दिया है. हथियारों की होड़ अमरीका के राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रवक्ता गॉर्डन जॉनड्रोई ने पत्रिका 'अमेरिकन एविएशन वीक एंड स्पेस टेक्नोलॉजी' में इस परीक्षण की पुष्टि की है. इस पत्रिका में छपी रिपोर्ट में कहा गया है कि 1999 में छोड़े गए चीन के फेंग युन 1 सी ध्रुवीय मौसम उपग्रह को 11 जनवरी को चीन के झिचांग अंतरिक्ष केन्द्र या इसके नजदीक से प्रक्षेपित की गई मिसाइल से नष्ट कर दिया गया. शिओज़ाकी ने कहा, "सबसे पहली हमारी चिंता अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग को लेकर है और दूसरे सुरक्षा के पहलू को लेकर." चीन को अभी इस परीक्षण की पुष्टि करनी है. माना जा रहा है कि ये परीक्षण ज़मीन से 865 किलोमीटर ऊपर अंतरिक्ष में किया गया. जापान के मुख्य कैबिनेट सचिव यसुहिसा शिओज़ाकी ने कहा कि उनकी सरकार ने चीन से इस परीक्षण की पुष्टि करने के लिए कहा है. साथ ही यह बताने के लिए भी कहा है इस परीक्षण के पीछे आख़िर उसकी मंशा क्या थी. जॉनड्रोइ ने कहा कि अमरीका मानता है कि चीन का ऐसे प्रक्षेपास्त्रों का परीक्षण दोनों देशों की अंतरिक्ष के असैन्य इस्तेमाल में सहयोग की भावना के ख़िलाफ़ है. ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री एलेक्जेंडर डोनर ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया नहीं चाहता कि 'बाहरी अंतरिक्ष' में हथियारों की होड़ बढ़े. अंतरिक्ष कचरा अगर चीन इस परीक्षण की पुष्टि कर देता है तो इसका सीधा मतलब यह होगा कि चीन सैद्धांतिक तौर पर अंतरिक्ष में छोड़े गए किसी दूसरे देश के 'जासूसी' उपग्रह को निशाना बना सकता है. 1980 के दशक में अमरीका और तत्कालीन सोवियत संघ ने अंतरिक्ष में काम कर रहे अपने उपग्रहों को नष्ट कर दिया था और इसके बाद से यह इस तरह का पहला परीक्षण है. इस परीक्षण से चिंता बढ़ने की एक वजह और है कि उपग्रह नष्ट होने से पैदा हुए कचरे से अंतरिक्ष में असैन्य और सैन्य उपग्रहों के संचालन में मुश्किलें आ सकती हैं. हालाँकि अमरीका चीन के इस परीक्षण को लेकर चिंता जता रहा है, लेकिन एक पहलू यह भी है कि हाल ही में चीन ने ही इस तरह के परीक्षणों पर रोक लगाने की अंतरराष्ट्रीय अपील का विरोध किया था. | इससे जुड़ी ख़बरें ईरानी मिसाइल की मारक क्षमता पर चिंता05 अक्तूबर, 2004 | पहला पन्ना मिसाइल प्रतिरक्षा कवच में ऑस्ट्रेलिया भी08 जुलाई, 2004 | पहला पन्ना ईरान ने फिर मिसाइल परीक्षण किया02 अप्रैल, 2006 | पहला पन्ना उत्तर कोरिया मिसाइल विवाद बढ़ा21 जून, 2006 | पहला पन्ना उत्तर कोरिया ने मिसाइलों का परीक्षण किया04 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना पैट्रियट मिसाइल पर भारत-अमरीका बैठक09 सितंबर, 2005 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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