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चंद्रयान के प्रक्षेपण के लिए उल्टी गिनती शुरु | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
चंद्रमा के लिए भारत का पहला मानवरहित अभियान चंद्रयान-1 के प्रक्षेपण के लिए उल्टी गिनती सोमवार को शुरु हो गई है. श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के सहयोगी निदेशक डॉक्टर एमवाईएस प्रसाद ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया, "सोमवार की सुबह 5.22 पर चंद्रयान-1 के प्रक्षेपण के लिए उल्टी गिनती शुरु कर दी गई है." चंद्रयान-1 श्रीहरिकोटा से बुधवार की सुबह छह बजकर 20 मिनट पर प्रक्षेपित किया जाएगा. प्रसाद ने बताया, " प्रक्षेपण के लिए जरुरी सभी कार्रवाई अच्छी तरह से आगे बढ़ रही है. 49 घंटे की इस उल्टी गिनती की अवधि के दौरान पीएस-2 और पीएस-4 जैसे प्रमुख ईंधन भरे जाने हैं." उन्होंने बताया कि इस अवधि में एक-दो प्रक्षेपण जाँच भी किए जाएँगे. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र का कहना है कि चंद्रयान के साथ ही 11 और उपकरण एपीएसएलवी-सी11 से प्रक्षेपित किए जा रहे हैं जिनमें से पाँच भारत के हैं और छह अमरीका और यूरोपीय देशों के. वैज्ञानिकों का कहना है कि चंद्रयान-1 पृथ्वी के उपग्रह चंद्रमा की सतह से सौ किलोमीटर ऊपर स्थापित कर दिया जाएगा. चंद्रयान-1 चंद्रमा की भौगोलिक परिस्थितियों और वहाँ मौजूद खनिज सामग्री के बारे में विस्तृत आँकड़े उपलब्ध करवाएगा. भारत मानता है कि यह अभियान अंतरिक्ष की खोज और अंतर-ग्रहीय अभियानों की दिशा में एक बड़ा क़दम है. महत्वाकांक्षी अभियान मानवरहित चंद्र मिशन के तहत चंद्रयान-1 नामक उपग्रह को चंद्रमा की ध्रुवीय कक्षा में स्थापित किया जाएगा. इस अभियान के लिए यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी और अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी (नासा) के बीच समझौता भी हुआ है. चंद्रयान-1 अपने साथ यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी और अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी के छह अनुसंधान उपकरण भी साथ ले जाएगा. ये उपकरण होंगे- ब्रिटेन में निर्मित एक्सरे स्पेक्ट्रोमीटर, जर्मनी में निर्मित नीयर इन्फ़्रारेड स्पेक्ट्रोमीटर और चाँद पर सौर आँधियों के प्रभाव के अध्ययन के लए स्वीडन में निर्मित एक वैज्ञानिक उपकरण. चंद्रयान-1 क़रीब 100 किलोमीटर दूर रह कर चंद्रमा की परिक्रमा करेगा. उल्लेखनीय है कि इसरो और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी और नासा पहले से ही विभिन्न परियोजनाओं में परस्पर सहयोग कर रहे हैं. |
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