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शुक्रवार, 02 मई, 2008 को 16:15 GMT तक के समाचार
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कंप्यूटर की-बोर्ड में कितने कीटाणु?
कंप्यूटर की-बोर्ड
कंप्यूटर टेबल पर खाना खाकर पूरी सफ़ाई नहीं करना महंगा पड़ सकता है
कंप्यूटर आज की दुनिया में जीवन का अटूट हिस्सा बनता नज़र आ रहा है मगर क्या हम उसे सुरक्षित रूप से इस्तेमाल करने की जागरूकता और आदत विकसित कर पाए हैं.

कंप्यूटर का इस्तेमाल करते हुए हम इतने बेपरवाह हो जाते हैं कि यह मशीन हमें किस तरह से नुक़सान पहुँचा सकती है, जिनका हमें अंदाज़ा भी नहीं होता.

अगर कोई यह कहे कि जिस मेज़ पर आपका कंप्यूटर रखा होता है वह कुछ मामलों में आपके शौचालय की सीट से भी ज़्यादा गंदा हो सकता है तो आपको या तो ग़ुस्सा आएगा या फिर आप चौकेंगे ज़रूर.

एक ताज़ा शोध के आधार पर दावा किया है कि कुछ कंप्यूटरों के की-बोर्ड पर शौचालय की सीट से कहीं ज़्यादा बैक्टीरिया मिल सकते हैं.

उपभोक्ता मामलों में सक्रिय एक संगठन 'व्हिच?' ने लंदन के अपने दफ़्तर में कंप्यूटरों के की-बोर्ड की जाँच कराई तो पाया कि इन पर कुछ ऐसे कीटाणु थे जो फूड प्वाइज़निंग यानी खाने-पीने की चीज़ों में पाई जाने वाली गंदगी या गड़बड़ी जैसी बीमारी का कारण हो सकते हैं.

व्हिच? संगठन ने 33 कंप्यूटरों के की-बोर्डों की जाँच-परख की. इनमें चार की-बोर्डों को स्वास्थ्य के ख़याल से ख़तरनाक माना गया जबकि एक ऐसा की-बोर्ड भी मिला जिस पर दफ़्तर के शौचालय की सीट से पाँच गुना ज़्यादा कीटाणु मौजूद थे.

माइक्रोबॉयलॉजिस्ट यानी सूक्ष्म जीवों का अध्ययन करने वाले एक वैज्ञानिक डॉ. पीटर विल्सन कहते हैं कि एक की-बोर्ड अक्सर इस बात का परिचायक होता है कि "आपकी नाक और आँत में क्या है."

जाँच के दौरान शोधकर्ताओं को एक ऐसा की-बोर्ड भी मिला जिस पर तय सीमा से 150 गुना ज़्यादा बैक्टीरिया मिले.

बैक्टीरिया की यह संख्या उसी समय दफ़्तर के शौचालय की सीट पर इन कीटाणुओं की संख्या से भी पांच गुना अधिक थी.

की-बोर्ड को साफ़ करने पर जो कीटाणु मिले उसमें ई-कोलाई और स्टैफायलौकोक्कस ओरियस भी शामिल थे. ये ऐसे कीटाणु हैं जो फूड प्वाइज़निंग की वजह बन सकते हैं.

'बीमारी का वाहक'

यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन अस्पताल में सलाहकार माइक्रोबॉयलॉजिस्ट विल्सन ने बीबीसी से कहा कि एक ही की-बोर्ड पर अलग-अलग लोगों का बैठना दफ़्तर के कर्मचारियों के बीच बीमारियों के फैलने का कारण हो सकता है.

माइक्रोस्कोप से दिखते बैक्टीरिया
शोधकर्ताओं की सलाह है कि कंप्यूटर की-बोर्ड की नियमित साफ़-सफ़ाई की जाए

विल्सन कहते हैं, "अगर आप देखें कि आपके की-बोर्ड पर क्या पल रहा है तो आप मानें या न मानें लेकिन ये वही चीज़ हैं जो आपकी नाक या आँत में होते हैं."

संगठन का कहना है कि की-बोर्ड पर इन कीटाणुओं के पलने का एक कारण तो यह है कि लोग इसी टेबल पर भोजन कर लेते हैं और वहाँ बची हुई भोजन सामग्री बैक्टीरिया को पनपने और विकसित होने में मदद करती है.

शौचालय से निकलने से पहले हाथों की अच्छे से सफ़ाई न करना भी की-बोर्ड के गंदा होने में अहम भूमिका निभाता है.

संगठन की पत्रिका की संपादक साराह किडनर की सलाह है कि कंप्यूटर पर काम करने वालों को उसकी साफ़-सफ़ाई का भी ख़ास ख़याल रखना चाहिए.

किडनर कहती हैं कि की-बोर्ड से रोज़ाना गंदगी को निकाल देना चाहिए और अल्कोहल से भिगोए किसी मुलायम कपड़े से की-बोर्ड को साफ़ करना चाहिए.

2007 में एरिज़ोना विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं को एक ऐसे ही अध्ययन में दफ़्तरों के कंप्यूटर की-बोर्ड पर शौचालय की सीट से 400 गुना ज़्यादा बैक्टीरिया मिले थे.

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