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टीवी और कंप्यूटर की 'लत' ख़तरनाक | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बच्चों में जिस तरह से टेलीविज़न और कंप्यूटरों की लत बढ़ती जा रही है उस पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने गंभीर चिंता व्यक्त की है. ब्रिटेन में एक शोध किया गया है जिसके मुताबिक बच्चे एक साल में औसतन ढाई महीने का समय टेलीविज़न या कंप्यूटर की स्क्रीन को देखते हुए गुज़ारते हैं जो उनके स्वास्थ्य के लिए बहुत ख़तरनाक है. ब्रिटिश डायटिक एसोसिएशन (बीडीए) ने तीन हज़ार स्कूली बच्चों का अध्ययन किया और पाया कि वे अपने समय का लगभग बीस प्रतिशत हिस्सा कंप्यूटर गेम खेलने, टेलीविज़न देखने और कंप्यूटरों का इस्तेमाल करने में गुज़ारते हैं. अध्ययन में यह भी पता चला कि बच्चे अक्सर खाना भी टेलीविज़न देखते हुए खाना पसंद करते हैं और अपने पसंदीदा कार्यक्रम देखने के लिए अक्सर नाश्ता भी छोड़ देते हैं. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों और लोगों में इस तरह बढ़ते आलस की वजह से मोटापा बढ़ रहा है और यह आलस ही मोटापे की सबसे बड़ी वजह है. ब्रिटेन में दस लाख से ज़्यादा बच्चों को मोटा होने की श्रेणी में रखा गया है और अगर यही चलन जारी रहा तो साल 2020 तक पाँच में से एक लड़का और तीन में से एक लड़की मोटापे से ग्रस्त होने की श्रेणी में आ जाएंगे. बीडीए के इस सर्वे में दिखाया गया है कि किशोरों में टेलीविज़न स्क्रीन सबसे ज़्यादा लोकप्रिय है और वे एक दिन में औसतन दो घंडे टेलीविज़न कार्यक्रम देखने में गुज़ारते हैं. उनमें से लगभग दो तिहाई ऐसे भी होते हैं जो स्कूल जाने से पहले औसतन 25 मिनट तक टेलीविज़न देखते हैं. स्क्रीन समय में स्कूल में कंप्यूटरों पर किया गया काम भी शामिल है और एक तिहाई बच्चे यह काम करने के लिए कम से एक घंटा रोज़ाना कंप्यूटर के सामने गुज़ारते हैं. इस अध्ययन में यह भी पता चला है कि स्कूल जाने के लिए साइकिल चलाने के बजाय बहुत से बच्चे बस या किसी अन्य वाहन से जाना पसंद करते हैं. इस अध्ययन में आगाह किया गया है कि बच्चों में खान-पान की आदतें सुधारने की बेहद ज़रूरत है. खान-पान ब्रिटेन में एक तिहाई से ज़्यादा किशोर शाम का खाना टेलीविज़न के सामने बैठकर और अपने घुटनों पर रखकर ही खाते हैं. पाँच में से एक किशोर टेलीविज़न कार्यक्रम देखने के लिए अपना नाश्ता छोड़ देते हैं और लगभग दस प्रतिशत ऐसे होते हैं जो नाश्ते के समय बिस्तर में ही लेटे रहना पसंद करते हैं.
बीडीए के प्रवक्ता और आहार विशेषज्ञ डॉक्टर फ्रेंकी फ़िलिप का कहना है, "उच्च तकनीक वाले उपकरणों का बच्चों और किशोरों के मन पर व्यापक असर पड़ता है और यह बेहद चिंताजनक बात है कि बच्चे और किशोर किस हद तक अपना समय टेलीविज़न और कंप्यूटरों की स्क्रीन के सामने गुज़ारते हैं." "बच्चों और किशोरों के सामने समय और ऊर्जा ख़र्च करने के लिए बहुत से मौक़े होते हैं और अगर चाहें तो स्कूल और कॉलेज के काम और सामाजिक मेलमिलाप में काफ़ी समय ख़र्च हो सकता है." डॉक्टर फ़िलिप का कहना था, "यह चौंकाने वाली बात है कि इस मामले में बच्चों और किशोरों को कोई ठोस सहायता और दिशा-निर्देश उपलब्ध नहीं हैं, ऐसा लगता है कि इस पीढ़ी को भुला दिया गया है." उनका कहना था कि इन हालात में तुरंत बदलाव की ज़रूरत है, "स्वास्थ्यप्रद आदतें अपनाना बिल्कुल भी मुश्किल नहीं है. सबसे अहम बात है कि जितनी ऊर्जा हम खाने के ज़रिए लेते हैं, उससे ज़्यादा कसरत के ज़रिए ख़र्च भी करें." वज़न संबंधी चिंताओं पर एक संगठन के डॉक्टर इयन कैम्पबेल का कहना है कि ये नतीजे चिंताजनक ज़रूर हैं लेकिन ऐसा नहीं है कि कोई नई बात हो. उन्होंने कहा, "यह तो स्पष्ट है ही कि टेलीविज़न और कंप्यूटरों को देखना एक लत जैसा है और चुनौती यही है कि शारीरिक गतिविधियों को ज़्यादा रुचिकर बनाया जाए. यह कोई मुश्किल बात नहीं है. अभिभावकों और स्कूलों को बच्चों को ज़्यादा सक्रिय होने के लिए प्रोत्साहित करना होगा." | इससे जुड़ी ख़बरें अमरीका में शीतल पेयों से 'मोहभंग'03 दिसंबर, 2005 | कारोबार फ़ास्ट फ़ूड से सावधान02 जुलाई, 2005 | विज्ञान मोटापा और धूम्रपान से जल्दी होंगे बूढ़े14 जून, 2005 | विज्ञान डायबिटीज़ को लेकर चेतावनी14 नवंबर, 2004 | विज्ञान मोटापे ने घटाया एयरलाइनों का मुनाफ़ा08 नवंबर, 2004 | कारोबार यूरोप में मोटापे पर बैठक26 मई, 2004 | विज्ञान अमरीका में मोटापे से बढ़ती मौतें10 मार्च, 2004 | विज्ञान मोटापा कम करने की योजना में देरी21 जनवरी, 2004 | विज्ञान इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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