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यूरोप में मोटापे पर बैठक | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
यूरोप में बढ़ते मोटापे की समस्या से निपटने के लिए चेक गणराज्य की राजधानी प्राग में सम्मेलन हो रहा है. सम्मेलन में भाग ले रहे सैकड़ों विशेषज्ञ इस बात पर विचार करेंगे कि इतने यूरोपीय लोग मोटे क्यों हो रहे हैं. साथ ही, इस बात पर भी चर्चा हो रही है कि मोटापे के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर कितना असर पड़ रहा है. यूरोप में हर साल मोटापे की वजह से 70 हज़ार लोग कैंसर की चपेट में आ जाते हैं और दिल की बीमारियों के अलावा इससे डायबिटीज़ का ख़तरा भी बढ़ जाता है. इस सम्मेलन में ख़ास तौर पर मोटे बच्चों पर ध्यान दिया जाएगा. इटली जैसे यूरोप के कुछ देशों में क़रीब 40 प्रतिशत लोग मोटे हैं जबकि उत्तरी यूरोप में ये आंकड़ा कम है. ब्रिटेन, हंगरी, रोमानिया, ग्रीस और अल्बानिया में मोटे वयस्क लोगों का प्रतिशत सबसे ज़्यादा है. ख़तरा ज़रूरत से ज़्यादा वज़न वाले लोगों को दिल की बीमारियों, डायबिटीज़, हड्डी की बीमारियों और डिप्रेशन यानी अवसाद का ख़तरा ज़्यादा रहता है. वैज्ञानिक मानते हैं कि चर्बी शरीर में ऐसे हॉर्मोन और रसायन पैदा करती है, हो सकता है उन्हीं से कैंसर होता हो. जब तक डॉक्टर ये पता नहीं लगा लेते कि चर्बी शरीर के लिए इतनी बुरी क्यों है तब तक इसका समाधान यही है कि लोगों को स्वस्थ जीवन जीने के लिए प्रोत्साहित किया जाए. यूरोप में ये सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दुनिया भर में मोटापे से निपटने के लिए एक अभूतपूर्व नीति अपनाई है. अब दुनिया के हर छह लोगों में से एक को मोटा माना जाता है. |
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